छत्तीसगढ़ में विस्फोटक हादसे का बड़ा अलर्ट: CRPF के 4 जवान झुलसे, दो ASI गंभीर
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र में गुरुवार को विस्फोटकों के सुरक्षित विनष्टीकरण के दौरान हुआ हादसा सुरक्षा अभियानों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के निस्तारण की चुनौती को सामने लाता है। एलामडगु कैंप के पास हुई इस घटना में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के चार जवान घायल हुए हैं। इनमें दो ASI को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि दो अन्य जवानों को अपेक्षाकृत सामान्य चोटें बताई गई हैं।
घटना उस समय हुई जब अलग-अलग कैंपों में रखे अनुपयोगी और बचे हुए विस्फोटकों को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत नष्ट किया जा रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के दौरान विस्फोटक का एक हिस्सा उछलकर पास के इलाके में जा गिरा और वहां ब्लास्ट हो गया।
नक्सल प्रभावित इलाके में विस्फोटकों का निस्तारण क्यों चुनौतीपूर्ण है?
सुकमा और कोंटा का इलाका लंबे समय से सुरक्षा बलों के अभियानों के लिहाज से संवेदनशील रहा है। ऐसे क्षेत्रों में कैंपों पर ऑपरेशन से संबंधित विभिन्न प्रकार की सामग्री रखी जाती है। इनमें ऐसी विस्फोटक सामग्री भी शामिल हो सकती है, जिसका इस्तेमाल अभियान के दौरान किया गया हो या जो बाद में अनुपयोगी बची रह गई हो।
ऐसी सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी जोखिम पैदा कर सकता है। दूसरी ओर, उसका विनष्टीकरण भी बेहद नियंत्रित प्रक्रिया है। यही वजह है कि इस तरह के काम के लिए विशेषज्ञ तकनीकी टीम की मौजूदगी और सुरक्षा घेरा महत्वपूर्ण होता है।
एलामडगु में भी जगदलपुर से एम्युनिशन टेक्नीशियन (ATT) टीम को इसी उद्देश्य से भेजा गया था। प्रक्रिया कैंप से करीब 200 मीटर दूर बोदराजपदर नाला के पास की जा रही थी।
हादसे में दो ASI को गंभीर चोटें
घटना में ATT टीम के ASI एमके तिवारी और 50वीं वाहिनी CRPF के ASI अनीश खान गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
वहीं ATT के निरीक्षक अमरनाथ मिश्रा और 50वीं वाहिनी के प्रधान आरक्षक कुलदीप राज को सामान्य चोटें आई हैं।
हादसे के तुरंत बाद सभी घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद उन्हें शासकीय अस्पताल कोंटा में भर्ती कराया गया, जहां इलाज जारी है। गंभीर रूप से घायल दोनों जवानों को आवश्यकता पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थान भेजने की तैयारी की जा रही है।
फिलहाल अधिकारियों ने स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही है।
एक छोटे हिस्से ने पैदा किया बड़ा खतरा
इस घटना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हादसा विस्फोटकों के निस्तारण की प्रक्रिया के दौरान हुआ। शुरुआती पुलिस जानकारी के अनुसार, एक विस्फोटक का हिस्सा निर्धारित स्थान से उड़कर पास में जा गिरा और वहां ब्लास्ट हो गया।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विस्फोटक सामग्री के निस्तारण में केवल मुख्य विस्फोट की शक्ति ही चिंता का विषय नहीं होती। विस्फोट के बाद उछलने वाले टुकड़े, दबाव और आसपास मौजूद सामग्री भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
यही कारण है कि विशेषज्ञों की निगरानी में ऐसी प्रक्रिया के दौरान दूरी, सुरक्षा घेरा और क्षेत्र की निगरानी बेहद अहम मानी जाती है।
सुरक्षा बलों के लिए क्या सबक?
यह घटना किसी एक टीम की कार्यप्रणाली पर निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि हादसे की विस्तृत तकनीकी जांच अभी सामने नहीं आई है। लेकिन ऐसी घटनाएं सुरक्षा बलों के लिए SOP यानी मानक संचालन प्रक्रिया की लगातार समीक्षा की जरूरत जरूर दिखाती हैं।
खासकर पुराने या अनुपयोगी विस्फोटकों के मामले में उनकी स्थिति, संरचना और व्यवहार हमेशा एक जैसा नहीं माना जा सकता। इसलिए प्रत्येक निस्तारण अभियान में सामग्री की प्रकृति के अनुसार जोखिम का आकलन जरूरी होता है।
आने वाले समय में इस घटना की जांच से यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि विस्फोटक का हिस्सा निर्धारित क्षेत्र से बाहर कैसे पहुंचा और सुरक्षा घेरे की व्यवस्था किस तरह की थी। इससे भविष्य के निस्तारण अभियानों में अतिरिक्त सावधानियां तय करने में मदद मिल सकती है।
घायल जवानों का इलाज अब सबसे बड़ी प्राथमिकता
हादसे के बाद सबसे अहम चिंता घायल जवानों की स्थिति है। दो ASI के गंभीर रूप से घायल होने के कारण उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता होगी।
ऐसे हादसों में शुरुआती उपचार के बाद विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थान में समय पर रेफर किया जाना भी महत्वपूर्ण होता है, विशेषकर जब चोटें विस्फोट से संबंधित हों।
फिलहाल अस्पताल में चारों जवानों का उपचार चल रहा है और जरूरत पड़ने पर गंभीर घायलों को उच्च चिकित्सा संस्थान भेजने की तैयारी की जा रही है।
आगे जांच से सामने आएगी हादसे की पूरी तस्वीर
प्रारंभिक जानकारी घटना की वजह के बारे में केवल इतना बताती है कि निस्तारण प्रक्रिया के दौरान विस्फोटक का एक हिस्सा उड़कर पास में गिरा और फिर ब्लास्ट हुआ। हादसे के पीछे तकनीकी कारण, सामग्री की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विस्तृत तथ्य जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सुरक्षा अभियानों में खतरा केवल ऑपरेशन के दौरान ही नहीं होता। अभियान के बाद बची सामग्री को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करना भी उतनी ही गंभीर जिम्मेदारी है। ऐसे काम में छोटी-सी अप्रत्याशित घटना भी प्रशिक्षित जवानों की जान को खतरे में डाल सकती है।



