बारिश के मौसम को बीमारियों का मौसम भी कहा जाता है। इस मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है जिससे सर्दी, जुकाम, बुखार और कई तरह के इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। मानसून के आते ही मच्छरों से होने वाली बीमारियां जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया भी तेजी से फैलती हैं। वहीं पिछले कुछ दिनों में आंध्र प्रदेश, ओडिशा और बिहार में कोविड-19 के केस भी सामने आने लगे हैं। कोविड-10 के बढ़ते खतरे को देखते हुए कई राज्यों में एडवाइजरी भी जारी की गई हैं। आइये डॉक्टर से जानते हैं कोविड-19 के नए लक्षण क्या हैं?
डॉक्टर ने बताया कि कोविड-19 के नए वेरिएंट्स के सामने आने के बाद इसके लक्षणों में कुछ बदलाव देखने को मिले हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में संक्रमण पहले की तुलना में हल्का होता है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षण वायरल बुखार जैसे होने की वजह से लोग अक्सर दोनों में अंतर नहीं कर पाते।
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कोविड-19 और वायरल में अंतर
कोविड-19 और वायरल संक्रमण, दोनों में बुखार, गले में खराश, खांसी, नाक बहना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और थकान जैसी शिकायतें हो सकती हैं। यही वजह है कि कई लोग इसे सामान्य वायरल समझकर घर पर ही इलाज शुरू कर देते हैं। लेकिन अगर बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, स्वाद या गंध में बदलाव आए या कमजोरी तेजी से बढ़ जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कोविड-19 के नए लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, नए कोविड वेरिएंट में गले में तेज दर्द, लगातार खांसी, हल्का या तेज बुखार, नाक बंद होना, मांसपेशियों में दर्द और बहुत थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं। कुछ मरीजों में पेट से जुड़ी समस्याएं, जैसे मतली या दस्त भी हो सकते हैं। वहीं सामान्य वायरल बुखार में अधिकांश लोग कुछ दिनों में ठीक होने लगते हैं, जबकि कोविड-19 के कुछ मामलों में लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, लगातार खांसी या सांस लेने में परेशानी हो वह किसी कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो, तो डॉक्टर की सलाह लेकर कोविड जांच करवाना बेहतर होता है। समय पर जांच और उपचार से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है और गंभीर जटिलताओं का खतरा भी कम होता है।
हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बीमार होने पर भरपूर आराम करें, शरीर में पानी की कमी न होने दें, संतुलित भोजन लें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर आवश्यक सावधानियां बरतें। यदि लक्षण गंभीर हों या कई दिनों तक बने रहें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना सबसे जरूरी है।






