छत्तीसगढ़ की हाउसिंग कॉलोनियों में बदलेंगे नियम और सुविधाएं, EV चार्जिंग से फायर सेफ्टी तक बड़े फैसले
रायपुर,। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की 87वीं बैठक में आवासीय योजनाओं से जुड़े कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिनका सीधा असर आने वाले समय में मंडल की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों और नई आवासीय परियोजनाओं पर पड़ सकता है। बैठक में करीब 55 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी, बहुमंजिला इमारतों के फायर सेफ्टी ऑडिट और मंडल की जमीन पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई।
नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंडल मुख्यालय में अध्यक्ष अनुराग सिंह देव की अध्यक्षता में हुई बैठक में आवासीय एवं व्यावसायिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन, नागरिक सुविधाओं और हितग्राहियों से जुड़े कई मुद्दों पर निर्णय लिया गया।
कॉलोनियों में बढ़ेगा EV चार्जिंग नेटवर्क
इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग सुविधा अब किसी भी आधुनिक आवासीय क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों में शामिल होती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंडल की चिन्हित और स्वामित्व वाली जमीन पर EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई है।
इसके लिए एजेंसी को लाइसेंस फीस मॉडल के तहत जमीन उपयोग का अधिकार देने का प्रावधान रखा गया है। संबंधित एजेंसी चार्जिंग स्टेशन के डिजाइन, वित्त पोषण, स्थापना, परीक्षण, संचालन और रखरखाव का काम करेगी।
इस फैसले का महत्व केवल चार्जिंग प्वाइंट बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यदि इन्हें प्रमुख आवासीय योजनाओं और व्यावसायिक क्षेत्रों में व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाता है, तो इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले लोगों के लिए रोजमर्रा की चार्जिंग अधिक सुविधाजनक हो सकती है। भविष्य में नए आवासीय प्रोजेक्ट की योजना बनाते समय चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को शुरुआती स्तर पर शामिल करना भी महत्वपूर्ण होगा।
बहुमंजिला इमारतों की फायर सेफ्टी की होगी जांच
बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण फैसला बहुमंजिला भवनों की अग्नि सुरक्षा से जुड़ा है। मंडल की आवासीय और व्यावसायिक इमारतों में फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा।
ऑडिट में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, आपातकालीन व्यवस्था और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच की जाएगी। इसके लिए योग्य फायर सेफ्टी ऑडिटरों और फर्मों के एम्पेनलमेंट की प्रक्रिया को भी मंजूरी दी गई है।
प्रस्तावित प्रक्रिया नेशनल बिल्डिंग कोड-2016 के भाग-4 और छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपात सेवा अधिनियम, 2018 के अनुरूप रखी जाएगी।
बहुमंजिला इमारतों में फायर सेफ्टी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि किसी आपात स्थिति में केवल अग्निशमन उपकरण होना पर्याप्त नहीं होता। निकासी मार्ग, अलार्म सिस्टम, आपातकालीन पहुंच और उपकरणों की नियमित कार्यशीलता भी उतनी ही जरूरी होती है। ऐसे ऑडिट से कागज पर मौजूद व्यवस्था और वास्तविक स्थिति के बीच का अंतर सामने आ सकता है।
एकमुश्त बकाया जमा करने वालों को 50% राहत
मंडल के हितग्राहियों के लिए भी बैठक में राहत का फैसला किया गया है। बकाया राशि एकमुश्त जमा करने वाले हितग्राहियों को विलंबित अवधि के ब्याज और वाटर चार्ज के सरचार्ज में 50 प्रतिशत की छूट देने की स्वीकृति दी गई है।
इस व्यवस्था से उन लोगों को आर्थिक राहत मिल सकती है जो अपनी लंबित देनदारी का एक साथ भुगतान करने की स्थिति में हैं। वहीं मंडल के लिए भी पुराने बकाये की वसूली तेज होने की संभावना है।
यह कदम दो स्तरों पर महत्वपूर्ण है—हितग्राही पर लंबित देनदारी का बोझ कम करना और मंडल की वित्तीय स्थिति में सुधार लाना।
करीब 55 करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी
बैठक में विभिन्न आवासीय योजनाओं के विकास और निर्माण कार्यों के लिए करीब 55 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इन परियोजनाओं के तहत आवासीय सुविधाओं के साथ आवश्यक अधोसंरचना से जुड़े कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
किसी आवासीय योजना की उपयोगिता केवल मकान उपलब्ध कराने से तय नहीं होती। सड़क, जल निकासी, पानी, बिजली, सार्वजनिक सुविधाएं और आसपास की कनेक्टिविटी जैसी व्यवस्थाएं भी कॉलोनी की वास्तविक गुणवत्ता निर्धारित करती हैं। इसलिए स्वीकृत राशि का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि विकास कार्य कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ जमीन पर पूरे होते हैं।
संपत्ति हस्तांतरण के नियमों में भी बदलाव
बैठक में मंडल की संपत्तियों के हस्तांतरण और नामांतरण से जुड़े नियमों पर भी निर्णय लिया गया। बिना विक्रय अनुमति के आवासीय या व्यावसायिक भवन/भूखंड बेचने की स्थिति में हस्तांतरण या नामांतरण शुल्क को दोगुना भारित कर प्रक्रिया पूरी करने की स्वीकृति दी गई है।
इसका उद्देश्य संपत्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया में नियमों के पालन को प्रोत्साहित करना है। खरीदारों और मौजूदा संपत्ति धारकों के लिए ऐसे मामलों में दस्तावेजों और मंडल की अनुमति की स्थिति पहले जांचना महत्वपूर्ण रहेगा।
इसके अलावा शैक्षणिक प्रयोजन के लिए आरक्षित भूखंडों के आवंटन से संबंधित 2026 के निर्देशों में विकसित भूमि के प्रीमियम में आंशिक संशोधन को भी मंजूरी दी गई।
क्वींस क्लब के लिए PPP मॉडल को मंजूरी
रायपुर के क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन और रखरखाव के लिए PPP मॉडल पर एजेंसी नियुक्त करने की अनुमति भी बैठक में दी गई। लाइसेंस आधार पर संचालन की व्यवस्था से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस तरह की सार्वजनिक संपत्तियों में PPP मॉडल का वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि चयनित एजेंसी को किस तरह की जिम्मेदारियां दी जाती हैं और संचालन एवं रखरखाव के मानकों की निगरानी कैसे होती है।
फैसलों का व्यापक असर
87वीं बैठक के निर्णयों को एक साथ देखें तो गृह निर्माण मंडल अब केवल आवास उपलब्ध कराने के पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़कर सुरक्षित, आधुनिक और बेहतर प्रबंधित आवासीय परिसरों पर जोर देता दिखाई देता है।
EV चार्जिंग भविष्य की परिवहन जरूरतों से जुड़ा कदम है, फायर सेफ्टी सीधे नागरिक सुरक्षा से जुड़ी है, 55 करोड़ रुपये की स्वीकृति अधोसंरचना विस्तार से संबंधित है और बकाया राहत हितग्राहियों तथा मंडल दोनों के वित्तीय हितों से जुड़ी है।



