छत्तीसगढ़ में बाढ़ का बड़ा संकट: 300 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूटा, रेल-सड़क और हवाई सेवा प्रभावित
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में लगातार बारिश ने सामान्य जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब के असर से पिछले कई दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण इंद्रावती, शबरी समेत कई नदियां उफान पर हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 300 से अधिक गांव बाढ़ और जलभराव के कारण मुख्य संपर्क से कटकर टापू जैसे हालात में पहुंच गए हैं।
नदी का बढ़ता जलस्तर बना सबसे बड़ी चुनौती
बस्तर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां भारी बारिश का असर केवल निचले इलाकों तक सीमित नहीं रहता। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों और संपर्क मार्गों पर भी आवागमन प्रभावित होने लगता है। मौजूदा बारिश के दौर में यही स्थिति तेजी से गंभीर हुई है।
इंद्रावती नदी के बढ़ते जलस्तर ने जगदलपुर और आसपास के निचले इलाकों में चिंता बढ़ाई है। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव हुआ है और प्रशासन ने नदी किनारे तथा संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक ओडिशा क्षेत्र में बांधों के गेट खोले जाने के बाद भी नदी के प्रवाह का असर बस्तर के कुछ हिस्सों में दिखाई दिया है। ऐसे में बारिश थमने के बाद भी नदी का पानी तत्काल नीचे नहीं उतरता, जिससे राहत एवं बचाव अभियान के लिए चुनौती बनी रहती है।
गांवों में रेस्क्यू ऑपरेशन, राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे लोग
बाढ़ से घिरे गांवों में फंसे लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ और प्रशासन की टीमें सक्रिय हैं। भेजापदर, घाट धनोरा सहित कई प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू अभियान चलाकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाया गया है।
संभाग में 50 से अधिक राहत शिविर बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। सुकमा, बीजापुर और बस्तर में स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरक्षित स्थान पर पहुंचना है, क्योंकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सड़क मार्ग से संपर्क तेजी से टूट सकता है।
बाढ़ ने बस्तर की कनेक्टिविटी पर लगाया ब्रेक
इस आपदा का असर सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है। बस्तर की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों की रीढ़ माने जाने वाले सड़क और रेल संपर्क पर भी बारिश और भूस्खलन का असर पड़ा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-30 और राष्ट्रीय राजमार्ग-63 के कई हिस्सों में पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। वहीं भारी बारिश के कारण रेलवे ट्रैक पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके चलते किरंदुल-विशाखापट्टनम रेल मार्ग की ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और कुछ ट्रेनें रद्द की गईं।
हवाई संपर्क भी प्रभावित हुआ है। खराब मौसम के चलते जगदलपुर-हैदराबाद फ्लाइट सेवा रद्द होने की जानकारी सामने आई है। इससे बस्तर से बाहर जाने वाले यात्रियों के साथ-साथ आपातकालीन और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ता है।
सातों जिलों में स्कूल बंद, बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता
लगातार बारिश और जलभराव के बीच विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए बस्तर संभाग के प्रभावित जिलों में स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। बस्तर जिले में 25 सितंबर को सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया था। बीजापुर में भी भारी बारिश के बीच स्कूल बंद रखने की जानकारी सामने आई है।
ऐसे हालात में स्कूल बंद करने का फैसला केवल शैक्षणिक गतिविधियों को रोकने तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को कई बार लंबी दूरी तय कर स्कूल पहुंचना पड़ता है और बीच में उफनते नाले या जलमग्न पुल-पुलिया पड़ सकते हैं। इसलिए प्रशासन के लिए विद्यार्थियों की आवाजाही को रोकना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम बन जाता है।
आगे की चुनौती: पानी उतरने के बाद शुरू होगी असली बहाली
बाढ़ के दौरान बचाव कार्य सबसे पहली प्राथमिकता है, लेकिन संकट खत्म होने के बाद प्रशासन के सामने दूसरी बड़ी चुनौती खड़ी होगी। क्षतिग्रस्त मकानों, ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों और रेल ट्रैक की स्थिति का आकलन करना होगा। प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ सामान्य आवागमन बहाल करना भी जरूरी होगा।
बस्तर जैसे दूरस्थ और वन क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने का मतलब केवल यात्रा में परेशानी नहीं है। इसका सीधा असर राशन, स्वास्थ्य सेवाओं, बाजार और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता पर पड़ सकता है। इसलिए जलस्तर घटने के बाद भी राहत एवं पुनर्बहाली अभियान कई दिनों तक जारी रह सकता है



