Bilaspur Crime: जलती चिता से छेड़छाड़ का सनसनीखेज आरोप, अघोरी बाबा की पिटाई ने खड़े किए गंभीर सवाल
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में श्मशान घाट से सामने आई एक घटना ने अंतिम संस्कार की गरिमा, अंधविश्वास और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला की जलती चिता के पास कथित तंत्र-साधना और अस्थियां गायब होने के आरोप के बाद मामला हिंसक हो गया। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने एक कथित अघोरी बाबा की बेरहमी से पिटाई कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है।
मामला बिलासपुर के कोनी थाना क्षेत्र का है। घायल व्यक्ति की पहचान शिवराम बाबा के रूप में बताई गई है। उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अंतिम संस्कार के बाद श्मशान में क्या हुआ?
जानकारी के अनुसार, कोनी निवासी अनिता यादव ने 1 नवंबर को आत्महत्या कर ली थी। उसी दिन शाम को परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार के बाद परिवार के लोग घर लौट गए, लेकिन रात में जब कुछ परिजन दोबारा श्मशान घाट पहुंचे तो वहां उन्हें कुछ लोग मौजूद मिले।
परिजनों का आरोप है कि शिवराम बाबा महिला की जलती चिता के पास बैठकर तंत्र-साधना कर रहे थे। मौके पर एक बुजुर्ग और दो युवक भी मौजूद थे। बताया गया कि दोनों युवक वहां से भाग निकले, जबकि बाबा और बुजुर्ग को परिजनों ने पकड़ लिया।
अस्थियां गायब होने और शराब चढ़ाने का आरोप
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप चिता से महिला की खोपड़ी और हड्डियां गायब होने को लेकर लगाया गया है। परिजनों ने मौके पर मौजूद बुजुर्ग से इसके बारे में पूछताछ की। वायरल वीडियो में बुजुर्ग कथित तौर पर कहता दिखाई देता है कि बाबा ने हड्डियां निकाली थीं, लेकिन उन्हें कहां रखा गया है, इसकी जानकारी उसे नहीं है।
बुजुर्ग ने यह भी बताया कि उसे चावल और शराब लाने के लिए कहा गया था। उसके अनुसार, बाबा मंत्र पढ़ते हुए शराब की बूंदें चिता पर डाल रहा था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। चिता से अस्थियां किसने निकालीं और उनका क्या हुआ, यह जांच का विषय है।
आरोपों के बाद हिंसा, वायरल वीडियो में दिखी बेरहमी
घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि मृतका के पति गुड्डा उर्फ राजकुमार यादव सहित कई लोगों ने शिवराम बाबा को घेर लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ लोग एक व्यक्ति को जमीन पर घसीटते, बाल पकड़कर खींचते और लात-घूंसों से हमला करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में घायल व्यक्ति के मुंह से खून निकलता भी नजर आता है।
चिता से छेड़छाड़ का आरोप अपनी जगह गंभीर है, लेकिन किसी व्यक्ति को इस तरह पीटना भी कानून के दायरे में अपराध हो सकता है। किसी अपराध का संदेह होने पर पुलिस को सूचना देना और कानूनी कार्रवाई का इंतजार करना जरूरी है।
जांच के सामने दो महत्वपूर्ण सवाल
इस घटना में पुलिस की जांच केवल कथित तंत्र-साधना तक सीमित नहीं रह सकती। पूरे मामले के दो अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल जरूरी है।
पहला, क्या वास्तव में महिला की चिता से अस्थियां या अन्य अवशेष निकाले गए थे? यदि ऐसा हुआ है तो इसके पीछे कौन था और इसका उद्देश्य क्या था?
दूसरा, शिवराम बाबा के साथ हुई मारपीट में कौन-कौन शामिल था और क्या इस हमले में कानून का उल्लंघन हुआ है? वायरल वीडियो और मौके पर मौजूद लोगों के बयान इस जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल पुलिस की ओर से मामले की जांच किए जाने की जानकारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घटना के समय तक एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई थी।
अंधविश्वास और कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति, दोनों पर सवाल
श्मशान घाट किसी भी परिवार के लिए बेहद संवेदनशील स्थान होता है। यहां अंतिम संस्कार के दौरान मृतक के सम्मान और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना सामाजिक जिम्मेदारी है। यदि किसी ने जानबूझकर चिता से छेड़छाड़ की है, तो उसके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरी ओर, आक्रोश में की गई हिंसा किसी भी जांच को प्रभावित कर सकती है। इससे वास्तविक घटनाक्रम और जिम्मेदार लोगों की पहचान करना भी मुश्किल हो सकता है।
बिलासपुर की यह घटना बताती है कि अंधविश्वास से जुड़े आरोप हों या भीड़ का गुस्सा, दोनों परिस्थितियों में कानून और निष्पक्ष जांच की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। अब लोगों की नजर पुलिस की जांच पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि श्मशान घाट में वास्तव में क्या हुआ और हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है।




