बिलासपुर में 6 लाख की ठगी: सोने से भरे घड़े का झांसा, फिर फर्जी पुलिस बनकर जब्ती का खेल
बिलासपुर। सस्ते में सोना-चांदी मिलने का लालच देकर लोगों को फंसाने वाली ठगी में जालसाज अक्सर भरोसे, लालच और डर—तीनों का इस्तेमाल करते हैं। बिलासपुर के बेलगहना क्षेत्र से सामने आया मामला इसी पैटर्न का एक चौंकाने वाला उदाहरण है। शिकायत के मुताबिक एक किसान को कथित तौर पर सोने-चांदी से भरा घड़ा दिखाकर छह लाख रुपये लिए गए। इसके बाद रास्ते में वर्दीधारी लोगों ने पुलिस जांच के नाम पर कार रोकी और घड़ा जब्त किए जाने की कहानी सामने रख दी।
मामला तब और उलझ गया, जब शिकायतकर्ता को कथित वर्दीधारी व्यक्ति बाद में मुंगेली कलेक्टोरेट के पास एक चाय दुकान पर दिखाई दिया। शिकायतकर्ता ने उसे पहचानने का दावा किया। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। मामले में कौन-कौन लोग वास्तव में शामिल थे और घड़े में कथित तौर पर गहने थे भी या नहीं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।
पहले बनाया भरोसा, फिर छह लाख रुपये का इंतजाम कराया
शिकायत के अनुसार मुंगेली जिले के गाड़ाघाट निवासी 47 वर्षीय विष्णु बघेल की 25 अगस्त को तखतपुर के बकरी बाजार के पास पालन भास्कर से मुलाकात हुई। बातचीत के दौरान उसे कथित तौर पर बताया गया कि एक व्यक्ति के पास सोने-चांदी से भरा घड़ा है और इसे अपेक्षाकृत कम कीमत पर हासिल किया जा सकता है।
इसके बाद 30 अगस्त को विष्णु अपने भांजे धनेश पात्रे के साथ कुरदर के पास बताए गए स्थान पर पहुंचा। वहां कथित तौर पर गहने दिखाए गए और करीब 12 लाख रुपये में सौदा तय होने की बात शिकायत में कही गई है।
सौदे में छह लाख रुपये पहले और बाकी रकम माल मिलने के बाद देने की बात बताई गई। यहीं से ठगी की योजना का पहला महत्वपूर्ण हिस्सा सामने आता है—पीड़ित से तत्काल बड़ी रकम जुटाने के लिए विश्वास पैदा किया गया और भुगतान को एक तय सौदे की तरह पेश किया गया।
रात में भुगतान और पूजा-पाठ की कहानी
31 अगस्त की रात विष्णु और उसका भांजा कार से छह लाख रुपये लेकर कुरदर पहुंचे। शिकायत के मुताबिक वहां पालन भास्कर के साथ पसउ बैगा और संजय पनिक भी मौजूद थे।
विष्णु ने कथित तौर पर छह लाख रुपये दिए। इसके बाद गहनों की पूजा-पाठ और हिस्सेदारी की बात कही गई। कुछ देर बाद एक बोरी में गहने होने का दावा करते हुए उसे कार तक लाया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता और उसके साथ मौजूद लोग वापस लौटने लगे।
यहीं से कथित ठगी का दूसरा चरण शुरू हुआ।
तीन स्टार वाली वर्दी ने पैदा किया डर
शिकायतकर्ता के अनुसार सेमरिया के पास उनकी कार को दो वर्दीधारी लोगों ने रोका। इनमें से एक के कंधे पर तीन स्टार लगे होने की बात कही गई। कथित पुलिसकर्मियों ने वाहन और लोगों की जांच की, मोबाइल से फोटो भी लिए और फिर उन्हें आगे जाने दिया।
कुछ दूरी पर पहुंचने के बाद साथ चल रहे लोगों में से एक ने तबीयत खराब होने और दूसरे ने मोबाइल गुम होने की बात कही। इसके बाद शिकायतकर्ता को बताया गया कि सेमरिया मोड़ पर पुलिस ने गहनों वाली बोरी जब्त कर ली है।
इसके बाद कथित तौर पर संबंधित लोग एक-एक करके संपर्क से बाहर हो गए और उनके मोबाइल बंद हो गए।
यानी एक ही घटनाक्रम में पहले लालच के जरिए पैसा निकलवाने और फिर पुलिस के नाम का डर दिखाकर कथित माल गायब करने का तरीका अपनाए जाने का आरोप है।
दो दिन बाद कहानी बदली, फिर सामने आया बड़ा सुराग
शिकायत के मुताबिक आरोपी बताए जा रहे लोगों के मोबाइल करीब दो दिन तक बंद रहे। तीसरे दिन पालन से संपर्क हुआ तो कथित तौर पर उसने कहा कि गहने पुलिस ने जब्त कर लिए हैं और अब न तो गहने वापस मिलेंगे और न ही रकम।
इसके बाद विष्णु ने अपने रिश्तेदार संतोष भास्कर को घटना की जानकारी दी। दोनों ने कुरदर जाकर उस व्यक्ति के घर के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की, जिसने अपना नाम बलराम यादव बताया था। वहीं अन्य लोगों से संपर्क की कोशिश भी की गई, लेकिन कुछ लोग नहीं मिले और कुछ के मोबाइल बंद रहे।
बाद में पैसे लौटाने का भरोसा दिए जाने के कारण शिकायतकर्ता ने कुछ समय तक पुलिस में शिकायत नहीं की।
चाय की दुकान पर हुई पहचान ने बदल दिया पूरा मामला
इस मामले का सबसे अहम मोड़ 6 सितंबर को आया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक वह मुंगेली कलेक्टोरेट के पास एक चाय दुकान के सामने था, तभी उसकी नजर उस व्यक्ति पर पड़ी जिसे उसने 31 अगस्त की रात सेमरिया के पास जांच करने वाले वर्दीधारी लोगों में शामिल बताया।
शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर उसकी पहचान की। उसके साथ संतोष भास्कर और धनेश पात्रे भी मौजूद थे। पूछताछ में उस व्यक्ति का नाम लोकेश राजपुत बताए जाने के बाद शिकायतकर्ता ने उसकी भूमिका की भी जांच की मांग पुलिस से की।
हालांकि, किसी व्यक्ति की पहचान या शिकायत में नाम आने मात्र से उसकी संलिप्तता साबित नहीं होती। पुलिस जांच में उपलब्ध साक्ष्यों, बयान, तकनीकी जानकारी और अन्य तथ्यों के आधार पर भूमिका तय होगी।
असली चुनौती: क्या घड़े में सचमुच सोना-चांदी था?
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है।
शिकायत के अनुसार जिस घड़े और गहनों के आधार पर छह लाख रुपये लिए गए, वही कथित तौर पर रास्ते में पुलिस द्वारा जब्त किए जाने की कहानी के साथ गायब हो गया। इसलिए जांच के सामने सिर्फ रकम की ठगी का सवाल नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित गहने वास्तव में मौजूद थे या शुरुआत से ही नकली कहानी तैयार की गई थी।
अगर घड़े में वास्तविक सोना-चांदी था, तो उसकी खरीद-बिक्री, स्रोत और कथित जब्ती की पुष्टि के लिए अलग तरह के सबूत मिलने चाहिए। वहीं अगर पूरा घड़ा केवल भरोसा पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया गया था, तो यह ठगी की एक अधिक सुनियोजित रणनीति की ओर संकेत कर सकता है।
इस तरह की ठगी से क्या सबक मिलता है?
सस्ते सोने, जमीन, पुराने खजाने या अचानक मिले कीमती सामान को बाजार कीमत से बहुत कम में देने का दावा अपने आप में बड़ा जोखिम संकेत है। खासकर तब, जब सामने वाला व्यक्ति तुरंत नकद भुगतान, गोपनीय सौदा या बिना दस्तावेज के लेन-देन पर जोर दे।
इस मामले में कथित ठगी की रकम छह लाख रुपये बताई गई है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को ऐसी पेशकश मिलने पर सामान की स्वतंत्र जांच, बिल या स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और कानूनी सत्यापन के बिना पैसा देना नहीं चाहिए। इसी तरह कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी बनकर जांच या जब्ती की कार्रवाई करे तो उसकी पहचान और कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि करना भी जरूरी है।



