उमरिया में मामी के घर से 1.55 लाख के जेवर चोरी, आरोपी ने जबलपुर जाकर खरीदा iPhone
उमरिया। घर के भीतर मौजूद रिश्तों का भरोसा जब चोरी की वारदात में बदल जाए तो नुकसान सिर्फ पैसों का नहीं होता। उमरिया जिले के चंदिया में सामने आया एक मामला इसी वजह से चर्चा में है। पुलिस के मुताबिक एक महिला के घर से करीब 1.55 लाख रुपये के सोने के जेवर चोरी किए गए और इस वारदात में उसके ही रिश्ते के भांजे की भूमिका सामने आई। चोरी के बाद आरोपी कथित तौर पर अपने दो साथियों के साथ जबलपुर गया, जहां सोने के बदले मिली रकम का एक हिस्सा मोबाइल खरीदने और ऑनलाइन शॉपिंग में खर्च किया गया।
चंदिया पुलिस ने मामले में आदर्श उर्फ अंशू शर्मा, रामानंद सिंह उर्फ छोटू और संतोष कोल को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद चोरी के सामान की बिक्री और रकम खर्च किए जाने से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर लिया गया।
करीब तीन सप्ताह बाद सामने आई जेवर चोरी
पुलिस के अनुसार संध्या शर्मा 27 अगस्त को अपने मायके रीवा गई थीं। 31 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे चंदिया स्थित घर लौटने के बाद उन्होंने अपने पहने हुए आभूषण अलमारी में रख दिए।
कुछ समय तक सब सामान्य रहा। लेकिन 20 सितंबर को अलमारी खोलने पर उन्हें जेवरों में कमी दिखाई दी। मंगलसूत्र, मनचली, झुमकी की एक जोड़ी, अंगूठी, दो छोटे लॉकेट और चार कंगनों में से एक कंगन गायब था।
गायब जेवरों की अनुमानित कीमत करीब 1.55 लाख रुपये बताई गई। इसके बाद शिकायत के आधार पर चंदिया थाने में मामला दर्ज किया गया।
इस घटना में पुलिस के सामने एक अहम सवाल यह था कि घर से जेवर कब और कैसे निकाले गए तथा चोरी करने वाले को घर और सामान के बारे में कितनी जानकारी थी।
जांच में सामने आया परिचितों का कनेक्शन
विवेचना के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर आदर्श उर्फ अंशू शर्मा से पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी करने की बात स्वीकार की।
पुलिस के अनुसार वारदात में रामानंद सिंह उर्फ छोटू और संतोष कोल की संलिप्तता भी सामने आई। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पूछताछ में सामने आई बातों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।
चोरी के बाद जबलपुर गए, सोने के बदले मिले 70 हजार
पुलिस के मुताबिक आदर्श ने पूछताछ में बताया कि चोरी के बाद तीनों मोटरसाइकिल से जबलपुर गए थे। वहां चोरी किए गए सोने के बदले उन्हें करीब 70 हजार रुपये मिले।
इसके बाद इस रकम का इस्तेमाल अलग-अलग चीजों पर किया गया। पुलिस के अनुसार करीब 22 हजार रुपये में सेकेंड हैंड iPhone 11 खरीदा गया, जबकि साथी रामानंद के लिए लगभग 10,500 रुपये का Vivo Y28 मोबाइल लिया गया।
इसके अलावा करीब 13 हजार रुपये ऑनलाइन खरीदारी में खर्च किए जाने की बात पुलिस ने बताई है। सिम कार्ड पर भी 350 रुपये खर्च किए गए।
यानी चोरी से मिली रकम का बड़ा हिस्सा कुछ ही समय में ऐसी वस्तुओं और खर्चों में चला गया, जिन्हें आसानी से ट्रैक किया जा सकता था। पुलिस की बरामदगी में यही डिजिटल और भौतिक सामान जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस ने क्या-क्या किया बरामद?
पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से:
- iPhone 11
- Vivo Y28 मोबाइल
- पल्सर मोटरसाइकिल
- 13 हजार रुपये नकद
समेत करीब 1.43 लाख रुपये का सामान और रकम बरामद की गई है।
बरामदगी में शामिल वस्तुएं जांच के दौरान चोरी की रकम से उनके संबंध और आरोपियों की भूमिका स्थापित करने में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग भी जांच का हिस्सा बन सकती है
इस मामले का एक अलग पहलू ऑनलाइन खर्च है। आज चोरी या ठगी से हासिल रकम को डिजिटल माध्यम से खर्च करना आरोपी के लिए आसान हो सकता है, लेकिन दूसरी ओर डिजिटल भुगतान, ऑर्डर हिस्ट्री, डिलीवरी विवरण और संबंधित खातों की जानकारी जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सुराग भी बन सकती है।
अगर ऑनलाइन खर्च वास्तव में चोरी की रकम से जुड़ा था, तो ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि आधुनिक आपराधिक जांच में सिर्फ बरामद सामान ही नहीं, बल्कि मोबाइल और डिजिटल लेन-देन भी अहम हो गए हैं।
रिश्ते का भरोसा बना वारदात की सबसे बड़ी कड़ी
इस घटना की सबसे गंभीर बात सिर्फ जेवरों की कीमत नहीं है। घर के भीतर रखे सामान की जानकारी और उस तक पहुंच का सवाल भी महत्वपूर्ण है। जब किसी परिचित या रिश्तेदार पर भरोसा किया जाता है, तो सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी अक्सर कम हो जाती है।
हालांकि इस मामले में चोरी किस तरह की गई, आरोपी को जेवरों की जानकारी कैसे मिली और वारदात में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी—इन सवालों का अंतिम जवाब पुलिस की विस्तृत जांच और अदालत की प्रक्रिया से सामने आएगा।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया है। अब आगे की जांच में चोरी किए गए जेवरों की बिक्री, रकम के लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण रहेगी।



