बीजापुर के जंगलों में नक्सली डंप पर शिकंजा, चीनी हैंड ग्रेनेड समेत हथियार और विस्फोटक बरामद
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में जंगलों के भीतर छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री की बरामदगी का सिलसिला जारी है। सुरक्षा बलों ने बेदरे थाना क्षेत्र के लंका पहाड़ी जंगल में तलाशी और बारूदी सुरंग हटाने के अभियान के दौरान एक ऐसे डंप का पता लगाया, जिसमें हथियार, ग्रेनेड, मैगजीन और अन्य सामग्री छिपाकर रखी गई थी। पुलिस के अनुसार, बरामद सामान में चीनी हैंड ग्रेनेड भी शामिल है।
तलाशी अभियान के दौरान सामने आया हथियारों का डंप
पुलिस के मुताबिक लंका पहाड़ी क्षेत्र में चलाए गए अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने संदिग्ध स्थान की तलाशी ली। इसी दौरान छिपाकर रखी गई हथियार और अन्य सामग्री बरामद हुई। जब्ती में एक सेल्फ-लोडिंग राइफल (SLR), एक राइफल, एक बंदूक, दो बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL), एक चीनी हैंड ग्रेनेड और SLR की मैगजीन समेत अन्य सामान शामिल बताया गया है।
ऐसे इलाकों में तलाशी अभियान केवल हथियार बरामद करने तक सीमित नहीं होता। जंगल में पहले से छिपाकर रखे गए हथियार और विस्फोटक सुरक्षा बलों के लिए संभावित खतरा भी बन सकते हैं। इसलिए सर्च ऑपरेशन के साथ डिमाइनिंग और संदिग्ध सामग्री की सुरक्षित जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
सितंबर में लगातार मिल रहे हथियार और विस्फोटक
बीजापुर में यह कार्रवाई किसी एक अलग घटना के रूप में नहीं देखी जा रही है। सितंबर के दौरान जिले के कई थाना क्षेत्रों में अलग-अलग अभियानों में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
20 सितंबर को भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के उतला जंगल में जमीन के नीचे छिपाए गए डंप से AK-47, .315 बोर रायफल, सिंगल शॉट रायफल और 9 एमएम पिस्टल के साथ मैगजीन और 76 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।
इससे पहले 16 सितंबर को फरसेगढ़ थाना क्षेत्र के बड़ेआलवाड़ा इलाके में तलाशी अभियान के दौरान हथियारों और कारतूस के साथ करीब 8 किलो जिलेटिन भी बरामद होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसी तरह, महीने की शुरुआत में बीजापुर के अलग-अलग जंगल क्षेत्रों से BGL के कलपुर्जे, ग्रेनेड, डेटोनेटर और वायर जैसी सामग्री मिलने की जानकारी भी सामने आई थी।
बरामदगी का सुरक्षा अभियानों के लिए क्या महत्व है?
घने जंगलों में हथियारों के डंप का इस्तेमाल लंबे समय तक सामग्री को छिपाकर रखने के लिए किया जा सकता है। ऐसे ठिकानों का पता लगना सुरक्षा बलों को केवल तत्काल हथियारों की उपलब्धता रोकने में ही मदद नहीं करता, बल्कि जंगलों में मौजूद संभावित लॉजिस्टिक नेटवर्क और गतिविधियों की जांच के लिए भी सुराग दे सकता है।
विशेष रूप से अलग-अलग स्थानों से लगातार बरामदगी होने पर जांच एजेंसियां यह भी देखती हैं कि इन हथियारों और विस्फोटक सामग्री का स्रोत क्या था, इन्हें कब और किस उद्देश्य से छिपाया गया तथा इनके पीछे कोई संगठित सप्लाई या भंडारण नेटवर्क तो नहीं था।
आगे जांच और तलाशी पर रहेगा जोर
पुलिस ने ताजा बरामदगी के बाद आगे की जांच जारी रहने की बात कही है। आने वाले दिनों में बरामद सामग्री के स्रोत, उसके संभावित इस्तेमाल और संबंधित नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाना जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।



