भिलाई में बड़ा खुलासा: कबाड़ी के गोदाम में मिली BSP की रेल पटरी, मैनेजर गिरफ्तार
भिलाई न्यूज: छत्तीसगढ़ के भिलाई में बीएसपी (भिलाई स्टील प्लांट) की रेल पटरी के टुकड़े कबाड़ी के गोदाम में मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। जामुल पुलिस ने शंकर नगर छावनी स्थित पांडे कबाड़ी के गोदाम पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में लोहे का स्क्रैप, एंगल, सरिया और जाली जब्त की है। मौके से गैस कटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, एलपीजी सिलेंडर और तौल मशीन भी बरामद हुई है। पुलिस ने गोदाम के मैनेजर नरसिंह यादव (51) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
ट्रक ड्राइवरों से खरीदा जा रहा था बीएसपी का लोहा
पुलिस को 13 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि शंकर नगर छावनी में उदय स्कूल के पीछे स्थित पांडे कबाड़ी के गोदाम में बीएसपी में बनी रेल पटरी के टुकड़े और दूसरी लोहे की सामग्री खरीदी जा रही है। सूचना के आधार पर जामुल पुलिस की टीम ने गोदाम की तलाशी ली। यहां बड़ी मात्रा में लोहे का सामान मिला, जिसके बाद मैनेजर से पूछताछ की गई।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान नरसिंह यादव ने सुरेश सिंह और अन्य श्रमिकों के साथ अलग-अलग स्थानों से बीएसपी का लोहा खरीदने की जानकारी दी। गोदाम में दूसरे लोगों से भी स्क्रैप खरीदे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, बरामद सामग्री की पूरी सप्लाई चेन और उसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
गैस कटर से काटा जाता था लोहा, फिर होता था वजन
गोदाम से गैस कटर और गैस सिलेंडर मिलने के बाद वहां स्क्रैप को काटने और तौलकर भुगतान करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। पुलिस के अनुसार, लोहे की सामग्री को गैस कटर से छोटे टुकड़ों में काटने के बाद उसका वजन किया जाता था और फिर भुगतान होता था।
जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि गोदाम में पहुंचने वाला लोहा वैध तरीके से खरीदा गया था या उसमें चोरी की सामग्री भी शामिल थी। केवल कबाड़ के रूप में किसी वस्तु की खरीद-बिक्री होना उसकी वैधता का प्रमाण नहीं है। खासकर औद्योगिक संयंत्रों से जुड़े लोहे के मामले में उसके स्रोत और खरीद के दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी होता है।
पुराने चोरी के मामले से भी जुड़ा मिला सामान
पुलिस की जांच में गोदाम से बरामद लोहे के एंगल और जाली का संबंध जामुल थाने में दर्ज एक पुराने चोरी के मामले से सामने आया है। पुलिस ने अपराध क्रमांक 400/2025 में दर्ज मामले के तहत चोरी गए एंगल और जाली की पहचान कर उन्हें जब्त किया है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत दर्ज है।
इस बरामदगी से जांच का दायरा बढ़ गया है। अब पुलिस को यह पता लगाना होगा कि चोरी का सामान गोदाम तक किस माध्यम से पहुंचा, इसे किसने बेचा और क्या दूसरे लोगों की भी इसमें भूमिका थी। इसके साथ ही अन्य जब्त सामग्री के संबंध में भी जांच की जा रही है।
बीएसपी की रेल पटरी पर ‘सेल’ की मुहर से बढ़े सवाल
गोदाम में ‘सेल’ लिखा हुआ बीएसपी की रेल पटरी का टुकड़ा मिलना मामले का महत्वपूर्ण पहलू है। इससे पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पटरी कहां से आई और उसे गोदाम तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही।
औद्योगिक इकाइयों से जुड़ी धातु सामग्री की अवैध निकासी केवल संपत्ति के नुकसान तक सीमित नहीं रहती। इससे औद्योगिक सुरक्षा, परिवहन व्यवस्था और संस्थानों की आंतरिक निगरानी पर भी सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, इस मामले में रेल पटरी की वास्तविक उत्पत्ति और उसके गोदाम तक पहुंचने की परिस्थितियां जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।
स्क्रैप कारोबार पर निगरानी क्यों जरूरी?
भिलाई जैसे औद्योगिक क्षेत्र में कबाड़ का कारोबार कई इकाइयों, श्रमिकों और परिवहन से जुड़े लोगों की आजीविका का हिस्सा है। लेकिन यदि चोरी की सामग्री सामान्य स्क्रैप के साथ मिलाकर बेची जाती है, तो वैध कारोबारियों को भी नुकसान होता है और अपराधियों के लिए चोरी का सामान खपाना आसान हो सकता है।
ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्क्रैप खरीदने वाले प्रतिष्ठानों में सामग्री की पहचान, खरीद की रसीद, विक्रेता का विवरण और माल के स्रोत का रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली धातु सामग्री की बिक्री और परिवहन का सत्यापन भी प्रभावी निगरानी का हिस्सा होना चाहिए।
इस मामले में आगे की जांच का सबसे अहम पहलू यह होगा कि बीएसपी की रेल पटरी और अन्य लोहे की सामग्री कहां से आई, क्या चोरी की घटनाओं के बीच कोई संबंध है और क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग शामिल हैं।
फिलहाल नरसिंह यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका और बरामद स्क्रैप के स्रोत की जांच कर रही है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।



