बस्तर में बाढ़ के बीच राहत अभियान तेज: NH-30 पर फंसे ट्रक चालक सुरक्षित निकाले गए, अब गांवों में स्वास्थ्य शिविरों की तैयारी
रायपुर, 26 सितंबर 2026: बस्तर संभाग में भारी बारिश और बाढ़ के बाद प्रशासन के सामने अब चुनौती केवल लोगों को सुरक्षित निकालने तक सीमित नहीं है। बाढ़ के दौरान राहत-बचाव के साथ-साथ पानी उतरने के बाद फैलने वाली बीमारियों को रोकने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और राहत-बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रहे हैं।
इस अभियान का एक अहम हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर सामने आया, जहां सोनारपाल के पास बाढ़ के पानी में कई ट्रक फंस गए थे। दूसरी ओर जगदलपुर और नगरनार के राहत शिविरों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जांच कर दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं।
NH-30 पर बढ़ते पानी के बीच ट्रक चालकों का रेस्क्यू
जगदलपुर-रायपुर मार्ग पर सोनारपाल के पास बाढ़ का पानी कई फीट तक भर जाने से करीब पांच ट्रक फंस गए। पानी बढ़ने पर लगभग आधा दर्जन चालक और परिचालक ट्रकों की छत पर पहुंच गए और मदद के लिए प्रशासन से संपर्क किया।
सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव दल ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। तेज बहाव के बीच बचाव दल ने लाइफ जैकेट और जरूरी उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए सभी फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रेस्क्यू के बाद उन्हें गणेश मंदिर पहुंचाया गया, जहां उनके लिए सूखे कपड़े, गर्म भोजन, पेयजल और ठहरने की व्यवस्था की गई। इस घटना ने यह भी दिखाया कि बाढ़ के दौरान प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर फंसे यात्रियों और मालवाहक वाहनों की निगरानी कितनी महत्वपूर्ण हो जाती है।
राहत शिविरों में इलाज और दवाइयों की व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ प्रशासन ने राहत शिविरों में स्वास्थ्य सेवाएं भी शुरू की हैं। जगदलपुर और नगरनार क्षेत्र के शिविरों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लोगों की जांच कर रही हैं।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. मैत्री के नेतृत्व में शहरी स्वास्थ्य विभाग की टीम और मितानिनों ने भगत सिंह वार्ड, भैरमगंज, पंचपथ और प्रवीरचंद्र वार्ड समेत विभिन्न राहत शिविरों में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण किया।
बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जांच के दौरान जरूरत के अनुसार निःशुल्क दवाइयां भी वितरित की गईं।
नदी बोड़ना गांव के लोगों के लिए राहत शिविर बना सहारा
नगरनार क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित नदी बोड़ना गांव के ग्रामीणों को सुरक्षित निकालकर शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में रखा गया है।
शिविर में केवल रहने और भोजन की व्यवस्था ही नहीं की गई, बल्कि स्वास्थ्य जांच, प्राथमिक उपचार, दवाइयां, स्वच्छ पेयजल और ओआरएस भी उपलब्ध कराया जा रहा है। बाढ़ के दौरान दूषित पानी और खान-पान से होने वाली समस्याओं को देखते हुए ओआरएस और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता विशेष महत्व रखती है।
पानी उतरने के बाद असली स्वास्थ्य चुनौती
बाढ़ के दौरान तत्काल राहत और रेस्क्यू सबसे पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन पानी उतरने के बाद स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। जमा पानी, दूषित पेयजल और खराब स्वच्छता की स्थिति में उल्टी-दस्त, डायरिया, पीलिया और टायफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रभावित गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। कलेक्टर आकाश छिकारा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रीना लक्ष्मी को मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और विशेषज्ञों के सहयोग से प्रभावित गांवों में सघन स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
इन शिविरों में जलजनित बीमारियों के साथ त्वचा संबंधी फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण की जांच एवं उपचार भी किया जाएगा।
सर्पदंश के खतरे को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा
बाढ़ के बाद सांप और अन्य जीव सुरक्षित सूखी जगहों की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश और पशुदंश की संभावनाओं को देखते हुए एंटी-वेनम और जरूरी जीवनरक्षक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज की संयुक्त टीमें संवेदनशील और दूरदराज के गांवों तक पहुंचेंगी। लोगों को जांच और उपचार के साथ क्लोरीन की गोलियां तथा ओआरएस के पैकेट भी दिए जाएंगे। गंभीर मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाएगा।
ग्रामीणों को पानी और स्वच्छता को लेकर सलाह
बाढ़ के बाद संक्रमण रोकने में प्रशासनिक व्यवस्था के साथ स्थानीय लोगों की सावधानी भी अहम होगी। प्रभावित ग्रामीणों से पानी उबालकर पीने, ताजा भोजन करने और घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बाढ़ के बाद स्वास्थ्य संकट को केवल अस्पतालों तक सीमित रखकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता। सुरक्षित पानी, स्वच्छता, समय पर जांच और बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर उपचार—इन सभी स्तरों पर एक साथ काम करना जरूरी होता है।
राहत से आगे बढ़कर अब पुनर्वास और निगरानी की चुनौती
बस्तर में मौजूदा राहत अभियान का अगला चरण पानी उतरने के बाद और महत्वपूर्ण होगा। सड़क और गांवों की स्थिति सामान्य करने के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रभावित परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से पहुंचें।
प्रशासन की मौजूदा रणनीति में रेस्क्यू, राहत शिविर, चिकित्सा जांच और बाढ़ के बाद की बीमारी रोकथाम को एक साथ जोड़ा गया है। आने वाले दिनों में प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविरों की पहुंच और पेयजल की सुरक्षा इस अभियान की अहम कसौटी रहेगी।



