भारत का कबड्डी में डबल धमाका: ईरान को 40-34 से हराकर पुरुष टीम ने जीता गोल्ड, बना 9वीं बार एशियन चैंपियन
नागोया: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय कबड्डी ने एक बार फिर अपनी ताकत का परिचय दिया है। शनिवार, 26 सितंबर को पुरुष टीम ने बेहद कड़े फाइनल में ईरान को 40-34 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। खास बात यह रही कि मुकाबले का पहला हाफ भारत के पक्ष में नहीं था, लेकिन दूसरे हाफ में टीम ने खेल का रुख पूरी तरह बदल दिया।
भारत के लिए यह सिर्फ एक और गोल्ड मेडल नहीं है। इस जीत के साथ पुरुष कबड्डी टीम ने एशियाई खेलों में अपना 9वां स्वर्ण पदक हासिल किया है। 2018 में खिताब गंवाने के बाद 2022 में वापसी करने वाली भारतीय टीम ने अब लगातार दूसरी बार पुरुष कबड्डी का खिताब अपने नाम किया है।
पहले हाफ में ईरान का दबदबा, दूसरे हाफ में बदली कहानी
फाइनल की शुरुआत दोनों टीमों के बीच बराबरी की टक्कर के साथ हुई। ईरान ने पहले हाफ के अंत तक 18-17 की मामूली बढ़त बना ली थी। भारत के लिए चुनौती यह थी कि ईरानी डिफेंस और रेडिंग के दबाव के बीच वापसी का रास्ता कैसे निकाला जाए।
लेकिन दूसरे हाफ में भारतीय टीम ने अपनी रणनीति और डिफेंस दोनों को प्रभावी तरीके से बदला। भारत ने इस अवधि में 23 अंक जुटाए, जबकि ईरान 16 अंक ही बना सका। मैच आगे बढ़ने के साथ भारतीय डिफेंस ने ईरानी रेडरों पर दबाव बढ़ाया और एक समय ईरान को ऑलआउट भी झेलना पड़ा।
यही वह मोड़ था जहां मुकाबले की दिशा बदल गई। ईरान को लगातार अंक जुटाने के लिए जोखिम लेना पड़ा और भारत को इसका फायदा मिला।
ईरान के खिलाफ जीत का अलग महत्व
कबड्डी में भारत और ईरान की प्रतिद्वंद्विता नई नहीं है। 2018 के एशियाई खेलों में ईरान ने भारत की लगातार स्वर्ण पदक जीतने की लय तोड़ी थी। उस टूर्नामेंट में भारतीय पुरुष टीम को चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था, जबकि ईरान ने स्वर्ण पदक जीता था।
इसके बाद 2022 में भारत ने पुरुष कबड्डी का गोल्ड वापस हासिल किया और अब 2026 में फाइनल में फिर ईरान को हराकर खिताब बरकरार रखा है।
इसलिए 40-34 की यह जीत केवल स्कोरलाइन नहीं है। यह एशियाई कबड्डी में भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिस्पर्धा की अगली कड़ी भी है।
महिलाओं ने भी ईरान को हराया, भारत का गोल्डन डबल
भारत के लिए 26 सितंबर का दिन कबड्डी में दोहरी खुशी लेकर आया। पुरुष फाइनल से पहले भारतीय महिला टीम ने भी ईरान को 37-34 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था।
यानी एक ही दिन भारत ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में ईरान को फाइनल में मात देकर गोल्ड हासिल किया। यह उपलब्धि बताती है कि भारतीय कबड्डी में केवल एक टीम या एक पीढ़ी पर निर्भरता नहीं है, बल्कि दोनों वर्गों में प्रतिस्पर्धी स्तर मजबूत बना हुआ है।
2018 की निराशा के बाद लगातार मजबूत हुई भारतीय कबड्डी
एशियाई खेलों में कबड्डी भारत के सबसे सफल खेलों में शामिल है। पुरुष वर्ग में 1990 से 2026 तक भारत ने नौ बार स्वर्ण पदक जीता है। एकमात्र बड़ा व्यवधान 2018 के जकार्ता खेलों में आया, जब भारत पदक तालिका में शीर्ष पर नहीं पहुंच सका।
2022 में स्वर्ण की वापसी और 2026 में फिर खिताब बरकरार रखने से भारतीय टीम ने अपनी एशियाई पकड़ को मजबूत किया है।
इस निरंतरता के पीछे घरेलू स्तर पर बढ़ी प्रतिस्पर्धा भी महत्वपूर्ण है। प्रो कबड्डी लीग जैसे मंचों ने खिलाड़ियों को उच्च स्तर के मुकाबलों का अनुभव दिया है और युवा खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।
आगे के लिए क्या मायने रखती है यह जीत?
एशियन गेम्स का गोल्ड भारतीय कबड्डी के लिए सिर्फ पदक तालिका में एक संख्या नहीं है। यह खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है। लगातार अंतरराष्ट्रीय सफलता से घरेलू स्तर पर कबड्डी के प्रति रुचि और प्रतिस्पर्धा दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि, एशियाई प्रभुत्व को बनाए रखना आसान नहीं होगा। ईरान समेत कई टीमें भारतीय खेल शैली को समझती हैं और हर बड़े टूर्नामेंट में बेहतर तैयारी के साथ उतरती हैं। ऐसे में भारत के लिए आगे की चुनौती केवल खिताब जीतना नहीं, बल्कि नई प्रतिभाओं को तैयार करते हुए टीम की गुणवत्ता और रणनीतिक विविधता बनाए रखना होगी।



