Kabirdham Crime: शक की सनक ने ली महिला की जान, देवर पर हत्या का आरोप; नहर किनारे छिपा मिला आरोपी
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में एक बार फिर पारिवारिक रिश्तों के भीतर पनपते शक और हिंसा का भयावह परिणाम सामने आया है। सहसपुर लोहारा थाना क्षेत्र के मोहगांव में हेमलता निषाद की हत्या के मामले में पुलिस ने उनके देवर देवसिंग निषाद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को महिला के किसी युवक से बातचीत करने को लेकर संदेह था। इसी बात पर विवाद हुआ और आरोप है कि उसने पहले गला दबाया, फिर टंगिया से हमला कर महिला की जान ले ली।
इस घटना का गंभीर पहलू केवल हत्या की क्रूरता नहीं है, बल्कि यह भी है कि आरोपी और पीड़िता एक ही परिवार का हिस्सा थे। रिश्तों के बीच पैदा हुआ संदेह किस तरह हिंसक अपराध में बदल सकता है, यह मामला उसकी गंभीर मिसाल बन गया है।
घर के रिश्ते में बढ़ा विवाद, हत्या तक पहुंचा मामला
पुलिस के अनुसार, 2 नवंबर को हेमलता के पति बीरसिंग निषाद ने सहसपुर लोहारा थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने अपने बड़े भाई देवसिंग निषाद पर पत्नी की हत्या करने का आरोप लगाया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मर्ग दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का अपराध पंजीबद्ध किया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी को हेमलता के किसी युवक से बातचीत करने पर आपत्ति थी। पुलिस का दावा है कि इसी संदेह को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर हत्या करना स्वीकार किया है। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और आरोपी के बयान की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी।
नहर किनारे छिपकर भागने की कोशिश, पुलिस ने पकड़ा
हत्या की सूचना मिलने के बाद सहसपुर लोहारा पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें बनाई। थाना प्रभारी निरीक्षक मनीष मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची। जांच के दौरान एसडीओपी और एफएसएल विशेषज्ञों की मौजूदगी में साक्ष्य जुटाए गए।
पुलिस को घटनास्थल और शव के आसपास खून के निशान, टूटी हुई चूड़ियां तथा खून से सने कपड़े मिले। परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज की। आखिरकार देवसिंग निषाद गांव के पास नहर किनारे छिपा मिला, जहां से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
टंगिया और कपड़े जब्त, आरोपी न्यायिक हिरासत में
पुलिस के अनुसार, आरोपी की निशानदेही पर कथित हत्या में इस्तेमाल टंगिया और घटना के समय पहने गए खून से सने कपड़े जब्त किए गए हैं। इन वस्तुओं को जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेम सागर सिदार के मुताबिक, पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद 32 वर्षीय देवसिंग निषाद को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। वहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी पहले हेमलता के साथ छेड़छाड़ के एक मामले में जेल जा चुका था। यह पिछला मामला जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन वर्तमान हत्या के आरोपों का फैसला मौजूदा प्रकरण के साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
शक और नियंत्रण की मानसिकता क्यों बनती है हिंसा की वजह?
इस घटना में सामने आया कथित कारण समाज के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। किसी व्यक्ति के बातचीत करने, मिलने-जुलने या निजी जीवन को लेकर संदेह होना किसी दूसरे व्यक्ति को हिंसा करने का अधिकार नहीं देता। रिश्तों में असहमति या विवाद हो सकते हैं, लेकिन उनका समाधान धमकी, दबाव या शारीरिक हमले से नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों के नजरिए से ऐसे मामलों में समय रहते दिखाई देने वाले संकेतों को समझना जरूरी है। लगातार निगरानी रखना, किसी की बातचीत पर जबरन नियंत्रण करना, धमकी देना या पहले भी छेड़छाड़ और हिंसा के आरोप सामने आना—ये सभी ऐसे संकेत हो सकते हैं जिन्हें परिवार और आसपास के लोगों को गंभीरता से लेना चाहिए।
यदि किसी महिला को परिवार या परिचित व्यक्ति से खतरा महसूस हो, तो उसे अकेले स्थिति संभालने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। पुलिस और उपलब्ध महिला सहायता सेवाओं तक समय रहते पहुंचना सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अब आगे क्या होगी जांच?
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जब्त हथियार, कपड़ों, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, एफएसएल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को जांच का हिस्सा बनाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मृत्यु के कारण और चोटों की प्रकृति से जुड़े तथ्य सामने आएंगे। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष अदालत में अपना मामला प्रस्तुत करेगा।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, लेकिन मामले का अंतिम निष्कर्ष अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध प्रमाणों से तय होगा।
मोहगांव की यह घटना याद दिलाती है कि शक कभी भी हिंसा का औचित्य नहीं बन सकता। परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि किसी भी तरह की धमकी, उत्पीड़न या हिंसक व्यवहार को सामान्य घरेलू विवाद समझकर नजरअंदाज न किया जाए।




