Durg Crime: शादी का झूठा वादा पड़ा भारी, महिला से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 7 साल की सजा
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में शादी का भरोसा देकर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने और बाद में विवाह से इनकार करने के मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। भिलाई निवासी 33 वर्षीय योगेश कुमार साहू को दोषी ठहराते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने आरोपी पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
इस मामले की अहमियत केवल सजा तक सीमित नहीं है। अदालत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या आरोपी ने महिला के साथ संबंध बनाते समय वास्तव में विवाह करने का इरादा रखा था या शादी का भरोसा केवल शारीरिक संबंध बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। सुनवाई के दौरान सामने आए घटनाक्रम और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी की मंशा को लेकर निष्कर्ष निकाला।
पहचान से शुरू हुई बातचीत, शादी के भरोसे तक पहुंचा मामला
अभियोजन के मुताबिक, आरोपी की बुआ महिला के घर किराए से रहती थी। इसी वजह से उसका वहां आना-जाना होता था और दोनों की पहचान हुई। बाद में आरोपी ने अपने फुफेरे भाई के माध्यम से महिला का मोबाइल नंबर प्राप्त किया। फोन और संदेशों के जरिए बातचीत बढ़ने लगी।
महिला ने आरोपी को अपने पिछले वैवाहिक जीवन और तलाक के बारे में बताया था। इसके बावजूद आरोपी ने उसके साथ प्रेम और विवाह की इच्छा जताई। उसने परिवार को साथ लेकर शादी की चर्चा करने आने का भरोसा भी दिया। होली के अवसर पर आरोपी महिला के घर पहुंचा और उसके परिजनों के साथ त्योहार मनाया।
इन घटनाओं से महिला को विवाह की बात पर भरोसा हुआ। लेकिन बाद में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे मामले को आपराधिक मुकदमे तक पहुंचा दिया।
शादी की बातचीत के नाम पर घर पहुंचा, फिर अचानक बंद कर लिया फोन
मामले में 24 मार्च 2025 का दिन महत्वपूर्ण रहा। महिला के अनुसार, आरोपी ने उसे फोन करके बताया कि वह विवाह के संबंध में बातचीत करने उसके घर आ रहा है। दोपहर लगभग 2:30 बजे वह वहां पहुंचा। उस समय महिला घर में अकेली थी।
महिला ने अदालत को बताया कि उसने विवाह से पहले शारीरिक संबंध बनाने से मना किया था, लेकिन आरोपी ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए। इसके बाद उसने जल्द ही परिवार के साथ आने की बात कही और वहां से चला गया।
महिला के मुताबिक, उसी दिन शाम को आरोपी का मोबाइल बंद हो गया। कई बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद बात नहीं हो सकी। जब महिला उसके भिलाई स्थित घर पहुंची, तब उसे पता चला कि आरोपी दूसरी युवती से विवाह का रिश्ता तय करने खुरसुनी गांव गया है।
यह घटनाक्रम मामले की जांच और बाद की न्यायिक सुनवाई में महत्वपूर्ण बन गया।
दूसरी शादी की तैयारी की जानकारी सामने आने पर खुला पूरा मामला
महिला अपनी बहन के साथ खुरसुनी पहुंची और दूसरी युवती के परिवार को आरोपी के साथ अपने संबंधों के बारे में बताया। इसके बाद आरोपी को बुलाकर पूछताछ की गई। अभियोजन के अनुसार, उसने महिला के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की, लेकिन बाद में उससे विवाह करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद महिला ने 26 अप्रैल 2025 को दुर्ग कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया।
अदालत में आरोपी ने संबंध स्वीकारे, लेकिन शादी के वादे से किया इनकार
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी ने महिला के साथ शारीरिक संबंध होने की बात स्वीकार की, लेकिन यह दावा किया कि संबंध सहमति से बने थे और उसने शादी का कोई झूठा आश्वासन नहीं दिया था।
बचाव पक्ष ने दोनों के बीच पहले से बातचीत होने, महिला की शिक्षा और घटना के दिन उसके घर में अकेले होने की जानकारी जैसे तथ्यों को अपने तर्कों का आधार बनाया।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने महिला के बयान के साथ उसकी मां और बहन की गवाही प्रस्तुत की। अदालत ने इन बयानों और अन्य परिस्थितियों को एक साथ परखा। विशेष रूप से घटना के बाद आरोपी द्वारा मोबाइल बंद करना, दूसरी युवती से विवाह का रिश्ता तय करने जाना और महिला के साथ संबंध होने की स्वीकारोक्ति को महत्वपूर्ण माना गया।
अदालत के अनुसार, महिला का बयान प्रतिपरीक्षण के दौरान महत्वपूर्ण पहलुओं पर कायम रहा और मामले के कई तथ्यों की पुष्टि अन्य साक्ष्यों से भी हुई।
BNS की धारा 69 के तहत दोषी, सात साल का सश्रम कारावास
अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) अवध किशोर की अदालत ने 2 नवंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने माना कि आरोपी ने शुरुआत से ही विवाह करने का वास्तविक इरादा नहीं रखते हुए महिला को शादी का भरोसा दिलाया और इसी आधार पर शारीरिक संबंध बनाए। इसी निष्कर्ष के आधार पर उसे सात वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं चुकाने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग को पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत आर्थिक क्षतिपूर्ति दिलाने की अनुशंसा भी की है।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है? सहमति और धोखे के बीच अंतर समझना जरूरी
इस मामले में कानूनी रूप से महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हर असफल प्रेम संबंध या विवाह से इनकार अपने आप में अपराध नहीं बन जाता। भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 उन परिस्थितियों से संबंधित है, जहां धोखे से या विवाह करने का इरादा न रखते हुए विवाह का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए जाते हैं और मामला दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता।
इसलिए ऐसे मामलों में अदालत केवल बाद में विवाह से इनकार किए जाने को नहीं देखती, बल्कि यह भी जांचती है कि संबंध बनाते समय आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी और क्या विवाह का आश्वासन शुरू से ही धोखे का हिस्सा था।
दुर्ग के इस मामले में अदालत ने घटनाओं के क्रम, गवाहों के बयानों और आरोपी की स्वीकारोक्ति को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया।
यह निर्णय उन मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिनमें सहमति, भरोसे और कथित धोखे के बीच कानूनी अंतर तय करना होता है। हालांकि, प्रत्येक मामले का फैसला उसके अपने साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर ही किया जाता है।
अब इस मामले में सजा के साथ पीड़िता को प्रतिकर दिलाने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। न्याय का उद्देश्य केवल दोषी को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ित पक्ष को कानूनी और सामाजिक स्तर पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना भी है।




