Bilaspur News: बिजली ऑपरेटर की मौत से भड़का आक्रोश, अधिकारी से मारपीट ने बढ़ाया गंभीर संकट
बिलासपुर जिले के ग्राम कुरेली में बिजली सब-स्टेशन पर काम करने वाले एक ऑपरेटर की करंट लगने से मौत ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया। परिवार के लिए मुआवजे और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे ग्रामीणों का गुस्सा उस समय हिंसक हो गया, जब बिजली विभाग के डिवीजनल इंजीनियर को भीड़ ने घेरकर पीट दिया। घटना ने एक साथ दो गंभीर सवाल खड़े किए हैं—आखिर बिजली कर्मचारी की जान किन परिस्थितियों में गई और सरकारी विभागों के प्रति लोगों का भरोसा इस स्तर तक क्यों कमजोर हो रहा है?
एक कर्मचारी की मौत और परिवार के सामने भविष्य का संकट
जानकारी के अनुसार, 31 अक्टूबर की सुबह कुरेली सब-स्टेशन में तैनात 35 वर्षीय अमन साहू की करंट लगने से मौत हो गई। वह ढनढन गांव का निवासी था। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों ने शव उठाने से रोक दिया। उनकी मांग थी कि मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता दी जाए और परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
ऐसी घटनाओं में परिवार के सामने केवल तत्काल आर्थिक संकट नहीं होता, बल्कि घर चलाने, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारियों का सवाल भी खड़ा हो जाता है। यदि मृतक परिवार का प्रमुख कमाने वाला सदस्य था, तो उसकी मौत का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
यही वजह है कि ग्रामीणों की मांग को केवल मुआवजे तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। परिवार को मिलने वाली सहायता, रोजगार और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
बातचीत के बीच हिंसा, अधिकारी को भीड़ ने घेरा
मृतक के परिजनों की मांगों को लेकर ठेकेदार और बिजली विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे थे। ग्रामीण लिखित आश्वासन चाहते थे। इसी दौरान डिवीजनल इंजीनियर मिलिंद पांडेय कुछ ग्रामीणों से बातचीत करने के लिए अलग गए, जहां भीड़ ने उन्हें घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी।
प्रत्यक्ष घटनाक्रम के अनुसार, अधिकारी पर लात-घूंसे और चप्पलों से हमला किया गया। मौके पर मौजूद दो पुलिसकर्मियों ने किसी तरह उन्हें भीड़ से बाहर निकाला। हमले में उनके कपड़े फट गए और शरीर पर चोटें आईं। बाद में उनकी शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
ग्रामीणों की नाराजगी और उनकी मांगों को सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी अधिकारी या व्यक्ति के साथ मारपीट को विरोध का स्वीकार्य तरीका नहीं माना जा सकता। इससे मूल मुद्दा पीछे छूटता है और विवाद कानूनी कार्रवाई की दिशा में बढ़ जाता है।
सब-स्टेशन में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अमन साहू की मौत की परिस्थितियां हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी में बताया गया है कि ऑपरेटर बिना चप्पल पहने सब-स्टेशन में काम कर रहा था। कुछ लोगों के अनुसार, नहाने के बाद फीडर ट्रिप होने पर वह उसे चालू करने गया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि दुर्घटना ठीक किन परिस्थितियों में हुई।
इन जानकारियों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पुलिस और संबंधित तकनीकी अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि कर्मचारी को करंट कैसे लगा, उस समय बिजली आपूर्ति की स्थिति क्या थी और सुरक्षा प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
बिजली के काम में मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे कार्यों में उचित सुरक्षा उपकरण, निर्धारित प्रक्रिया, बिजली आपूर्ति बंद करने की पुष्टि और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। यदि किसी स्तर पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी?
अमन साहू की मौत की निष्पक्ष जांच के लिए कुछ बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी है—
- क्या कर्मचारी को निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे?
- क्या फीडर और बिजली आपूर्ति से जुड़ी सुरक्षा प्रक्रिया का पालन हुआ था?
- दुर्घटना के समय सब-स्टेशन पर किसकी ड्यूटी थी?
- क्या कर्मचारी को संबंधित कार्य के लिए उचित निर्देश और प्रशिक्षण दिया गया था?
- क्या ठेकेदार और बिजली विभाग की ओर से कार्यस्थल सुरक्षा की नियमित निगरानी की जाती थी?
इन सवालों के जवाब सामने आने से न केवल इस दुर्घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकती है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय भी तय किए जा सकेंगे।
प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी
कुरेली की घटना प्रशासन के लिए दो अलग-अलग मोर्चों पर कार्रवाई की मांग करती है। पहला, कर्मचारी की मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कर परिवार को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराना। दूसरा, डिवीजनल इंजीनियर के साथ हुई मारपीट में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करना।
दोनों मामलों को एक-दूसरे से जोड़कर किसी एक को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कर्मचारी की मौत का सच सामने आना और अधिकारी पर हमले की जवाबदेही तय होना, दोनों जरूरी हैं।
इस घटना से बिजली विभाग के कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता भी सामने आई है। यदि जांच में सुरक्षा संबंधी खामियां मिलती हैं, तो केवल इस मामले में कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। पूरे जिले में सब-स्टेशनों और फील्ड ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण किया जाना चाहिए।
कुरेली में हुआ घटनाक्रम एक परिवार के दुख, ग्रामीणों के आक्रोश और सरकारी व्यवस्था के प्रति जवाबदेही से जुड़ा मामला है। अब सबसे जरूरी है कि जांच तथ्यों के आधार पर आगे बढ़े, पीड़ित परिवार को न्याय मिले और कानून हाथ में लेने वालों पर भी नियमानुसार कार्रवाई हो।




