Dussehra 2026: दुनिया में गूंजेगा विजय का संदेश, इन 5 देशों में भी होता है रावण दहन
भारत में दशहरा केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत और अन्याय के अंत का प्रतीक है। लेकिन इस पर्व की परंपरा भारत की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। मॉरीशस से लेकर अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा तक भारतीय मूल के लोग रामलीला, विजयदशमी के उत्सव और रावण दहन के जरिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।
विदेशों में आयोजित होने वाले ये कार्यक्रम दिखाते हैं कि भौगोलिक दूरी बढ़ने के बावजूद परंपराएं लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ सकती हैं। खासकर विदेशों में जन्मी नई पीढ़ी के लिए ऐसे आयोजन भारतीय इतिहास, रामायण की कथा और पारिवारिक सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का अवसर बनते हैं।
Mauritius: भारतीय परंपराओं से जुड़ा दशहरे का उत्सव
मॉरीशस में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी होने के कारण भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष महत्व है। यहां दशहरे के अवसर पर रामलीला और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई आयोजनों में रावण के पुतले का दहन भी किया जाता है।
इन उत्सवों की खासियत यह है कि धार्मिक परंपरा केवल पूजा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सामुदायिक मेल-जोल का माध्यम भी बनती है। परिवारों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से नई पीढ़ी को रामायण की कथा और विजयदशमी के महत्व से परिचित कराया जाता है।
Australia: सिडनी और मेलबर्न में जुटता है भारतीय समुदाय
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में भारतीय समुदाय विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों पर एकजुट होता है। दशहरे के दौरान भी कई हिंदू संगठन और सामुदायिक समूह कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
जहां रावण दहन का आयोजन होता है, वहां यह उत्सव लोगों के लिए केवल धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का अवसर भी बनता है। बच्चों को रामलीला के माध्यम से भारतीय महाकाव्यों की कहानियां समझने का मौका मिलता है, जबकि परिवारों के लिए यह अपनी परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है।
हालांकि, कार्यक्रमों का स्वरूप और आयोजन स्थल हर शहर तथा स्थानीय संगठन के अनुसार अलग हो सकते हैं।
America: मंदिरों और सांस्कृतिक संगठनों की अहम भूमिका
अमेरिका में न्यू जर्सी, टेक्सास और कैलिफोर्निया जैसे क्षेत्रों में भारतीय समुदाय के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन देखने को मिलते हैं। दशहरे पर कई संगठन रामलीला, सामुदायिक मिलन और विजयदशमी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करते हैं। कुछ आयोजनों में रावण दहन भी प्रमुख आकर्षण होता है।
अमेरिका जैसे बहुसांस्कृतिक देश में इन कार्यक्रमों का महत्व एक और वजह से बढ़ जाता है। यहां भारतीय मूल के परिवारों के बच्चे अलग-अलग सांस्कृतिक प्रभावों के बीच बड़े होते हैं। ऐसे में त्योहार उन्हें अपनी विरासत को केवल किताबों या परिवार की बातचीत से नहीं, बल्कि सामूहिक अनुभव के जरिए समझने का अवसर देते हैं।
साथ ही, सार्वजनिक आयोजनों में स्थानीय नियमों, अग्नि सुरक्षा और प्रशासनिक अनुमति का पालन करना जरूरी होता है।
United Kingdom: लंदन और लीसेस्टर में दिखती है सांस्कृतिक विरासत
ब्रिटेन में भारतीय समुदाय लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों के आयोजन में सक्रिय रहा है। लंदन और लीसेस्टर जैसे शहरों में दशहरे के अवसर पर रामलीला तथा विजयदशमी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कुछ स्थानों पर रावण दहन भी उत्सव का हिस्सा होता है।
इन आयोजनों में भारतीय मूल के लोगों के साथ अन्य समुदायों की भागीदारी भी देखने को मिल सकती है। इस तरह दशहरा अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखते हुए सांस्कृतिक संवाद का अवसर भी बनता है।
रामलीला के मंचन के जरिए रामायण के पात्रों, उनके निर्णयों और कथा के नैतिक संदेश को अलग-अलग पीढ़ियों तक पहुंचाया जाता है।
Canada: रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाद के पुतले भी
कनाडा के टोरंटो और वैंकूवर जैसे शहरों में भारतीय समुदाय विजयदशमी सहित विभिन्न भारतीय त्योहारों को मनाता है। कुछ दशहरा आयोजनों में रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का भी दहन किया जाता है।
यह परंपरा रामायण के उस प्रसंग को मंचित करती है जिसमें भगवान राम की सेना और रावण की सेना के बीच संघर्ष होता है। अलग-अलग आयोजनों में पुतलों का आकार, कार्यक्रमों का स्वरूप और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं।
ऐसे उत्सव प्रवासी परिवारों को एक साझा मंच देते हैं, जहां धार्मिक परंपरा, भाषा, संगीत और सामुदायिक संबंध एक साथ दिखाई देते हैं।
आखिर रावण दहन का असली संदेश क्या है?
रावण दहन को सामान्यतः बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। रामायण की कथा में यह प्रसंग अहंकार, अन्याय और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष से जुड़ा है। विजयदशमी का संदेश केवल किसी एक पात्र की हार तक सीमित नहीं, बल्कि उन प्रवृत्तियों पर विचार करने का अवसर भी है जो समाज और व्यक्ति को गलत दिशा में ले जाती हैं।
आज के संदर्भ में इस पर्व का महत्व ईमानदारी, जिम्मेदारी, संयम और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों से भी जुड़ता है। रावण का पुतला जलाना प्रतीकात्मक है; वास्तविक अर्थ तभी सामने आता है जब त्योहार के संदेश को रोजमर्रा के व्यवहार में अपनाया जाए।
विदेशों में दशहरा मनाने का बढ़ता सांस्कृतिक महत्व
प्रवासी भारतीयों के लिए त्योहार अपनी जन्मभूमि और पारिवारिक विरासत से संबंध बनाए रखने का माध्यम हैं। रामलीला, पारंपरिक वेशभूषा, धार्मिक अनुष्ठान और रावण दहन जैसी गतिविधियां बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ने में मदद करती हैं।
हालांकि, हर देश और हर शहर में दशहरा एक ही तरीके से नहीं मनाया जाता। कुछ जगहों पर सार्वजनिक रावण दहन होता है, जबकि अन्य स्थानों पर धार्मिक सभाओं, मंचीय प्रस्तुतियों या सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए पर्व मनाया जाता है।




