राजनांदगांव में खौफनाक हत्याकांड: जादू-टोने के शक में मां-बेटे की हत्या, बेटी पर कुल्हाड़ी से हमला; 3 गिरफ्तार
राजनांदगांव। परिवार में बीमारी की वजह को लेकर पैदा हुआ अंधविश्वास इतना खतरनाक मोड़ ले सकता है कि अपने ही रिश्तेदारों की जान चली जाए, चौथना गांव की घटना इसका भयावह उदाहरण है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में जादू-टोना करने के संदेह में एक महिला और उसके बेटे की हत्या कर दी गई, जबकि बेटी पर भी धारदार हथियार से हमला किया गया। पुलिस ने मामले में परिवार से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, घटना डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र के चौथना गांव की है। मृतकों की पहचान कमला सोनकर और उनके बेटे खुमेन्द्र सोनकर के रूप में हुई है। उनकी बेटी ममता सोनकर हमले में गंभीर रूप से घायल हुई। उसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया था।
इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि विवाद किसी प्रमाणित तथ्य के बजाय जादू-टोना करने के संदेह से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, हत्या के पीछे की पूरी परिस्थितियों और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
बीमारी के लिए जादू-टोने को माना जा रहा था जिम्मेदार
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी परिवार की एक महिला के मन में यह संदेह था कि कमला सोनकर जादू-टोना करती हैं। परिवार के कुछ सदस्यों की तबीयत खराब रहने को इसी कथित गतिविधि से जोड़कर देखा जा रहा था। इसी बात को लेकर परिवार में तनाव और विवाद होने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीण समाज में बीमारी, पारिवारिक परेशानियों या लगातार होने वाली प्रतिकूल घटनाओं को कभी-कभी अंधविश्वास से जोड़ दिया जाता है। समस्या तब गंभीर हो जाती है, जब बिना किसी प्रमाण के किसी व्यक्ति को दोषी ठहराकर उसके प्रति शत्रुता पैदा कर ली जाती है।
चिकित्सकीय दृष्टि से बीमारी के कारणों की पहचान जांच, लक्षणों और स्वास्थ्य संबंधी तथ्यों के आधार पर की जाती है। किसी व्यक्ति पर जादू-टोना करने का आरोप लगाना न तो बीमारी का समाधान है और न ही किसी तरह की हिंसा को उचित ठहरा सकता है।
घर में घुसकर किया हमला, मां-बेटे की गई जान
पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर की रात आरोपियों ने कमला सोनकर के घर में घुसकर धारदार हथियार से हमला किया। इस दौरान कमला और उनके बेटे खुमेन्द्र को गंभीर चोटें आईं। उनकी बेटी ममता सोनकर भी हमले की चपेट में आ गईं।
वारदात के समय कमला के पति सुखी सोनकर घर पर मौजूद नहीं थे। जब वह घर पहुंचे, तो पत्नी और बेटे के शव मिले, जबकि बेटी गंभीर हालत में पड़ी थी। इस घटना के सामने आने के बाद गांव में सनसनी फैल गई।
ग्रामीणों से सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल युवती को अस्पताल भिजवाया। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर किया।
इस घटना में एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत और तीसरे सदस्य के गंभीर रूप से घायल होने से परिवार पर गहरा संकट आ गया। साथ ही, घटना ने पारिवारिक विवादों के हिंसक रूप लेने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जांच में मां और दो बेटों की भूमिका सामने आने का दावा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए टीम गठित की। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ आसपास की परिस्थितियों, पारिवारिक विवाद और संदिग्ध व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई गई।
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान हेमंत कुमार सोनकर पर संदेह गहराया। उसे 12 अक्टूबर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद उसके भाई सोनू सोनकर और मां केशर सोनकर की कथित भूमिका भी सामने आई।
पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वारदात में उनकी भूमिका और परिवार में चल रहे विवाद से संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य, उनकी जांच और अदालत में होने वाली सुनवाई के आधार पर ही अंतिम कानूनी निष्कर्ष निकलेगा।
सबूत मिटाने की कोशिश का भी आरोप
पुलिस का दावा है कि वारदात के बाद आरोपियों ने घटना के समय पहने गए कपड़ों और हथियार के लकड़ी के बेंट को जलाने की कोशिश की थी। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कथित तौर पर इस्तेमाल की गई लोहे की कुल्हाड़ी और एक मोटरसाइकिल भी बरामद की है।
इसके अतिरिक्त, कपड़ों और हथियार के लकड़ी के हिस्से को जलाने के प्रयास से जुड़े अवशेष मिलने की जानकारी दी गई है। पुलिस ने मामले में साजिश और साक्ष्य मिटाने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 61(2) और 238 भी जोड़ी हैं।
इन बरामदगियों और कथित साक्ष्य मिटाने के प्रयास की जांच मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है। फॉरेंसिक परीक्षण, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के बीच मेल बैठाना जांच को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
अंधविश्वास और पारिवारिक हिंसा पर गंभीर सवाल
चौथना गांव की घटना केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है। यह इस बात की ओर भी ध्यान दिलाती है कि जब बीमारी या किसी परेशानी के लिए बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो पारिवारिक संबंध किस तरह हिंसा की ओर बढ़ सकते हैं।
ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर सही जानकारी, समय पर चिकित्सा सहायता और स्थानीय स्तर पर जागरूकता जरूरी है। यदि किसी परिवार में धमकी, लगातार आरोप या हिंसा की आशंका दिखाई दे, तो उसे केवल निजी विवाद मानकर नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सहायता लेने की जरूरत होती है।
साथ ही, प्रशासन और स्थानीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि अंधविश्वास के आधार पर किसी व्यक्ति को प्रताड़ित करने या उसके खिलाफ हिंसा करने जैसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाए।
अब जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगी नजर
पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में हथियार समेत अन्य सामग्री बरामद करने की जानकारी दी है। आगे की जांच में हमले की परिस्थितियों, प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका और साक्ष्य मिटाने के आरोपों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
इस हत्याकांड में सबसे जरूरी है कि घायल ममता सोनकर को उचित उपचार मिले और मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो। दोष तय करने की प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे बढ़नी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।



