भारत चाहता है कि देश में बनने वाले 96 राफेल विमानों में स्वदेशी मिसाइल और रडार जैसी प्रणालियां लगाई जाएं। फ्रांस की सहमति को लेकर बातचीत जारी है। सोर्स कोड दिए बिना भारतीय हथियार प्रणाली लगाने का विकल्प भी सामने आया है।
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नई दिल्ली। भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर बातचीत जारी है। इस दौरान विमानों में स्वदेशी हथियार प्रणालियां लगाने का मुद्दा महत्वपूर्ण बन गया है। भारत चाहता है कि फ्रांस से खरीदे जाने वाले राफेल विमानों में भारतीय रक्षा तकनीक और देश में विकसित हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा सके। इनमें मिसाइल और रडार जैसी प्रणालियां शामिल हैं। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर फ्रांस की सहमति अभी स्पष्ट नहीं है।
राफेल सौदे से जुड़े घटनाक्रम के अनुसार, भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विमानों में स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता देना चाहता है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि स्वदेशी हथियार प्रणालियों को शामिल करना उसकी प्रमुख जरूरतों में से एक है।
भारत में बनेंगे 96 राफेल विमान
प्रस्तावित समझौते के तहत कुल 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना है। इनमें से 18 विमान फ्रांस में निर्मित होकर भारत आएंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाना है।
भारत चाहता है कि देश में बनने वाले इन विमानों में भारतीय रक्षा प्रणालियों को स्थापित करने की सुविधा मिले। इससे स्वदेशी रक्षा उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और देश की तकनीकी क्षमता का लाभ उठाने में मदद मिल सकती है।
दूसरी ओर, फ्रांस चाहता है कि राफेल विमानों में इस्तेमाल होने वाली रक्षा प्रणालियां भी उसी से खरीदी जाएं। इसी अंतर के कारण बातचीत में यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। भारत की प्राथमिकता स्वदेशी उपकरणों को अधिक स्थान देना है, जबकि फ्रांस अपनी प्रणालियों के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है।
सोर्स कोड के बिना हथियार लगाने का विकल्प
इस मामले में सोर्स कोड का मुद्दा भी चर्चा में है। सोर्स कोड वह प्रोग्रामिंग निर्देश होता है, जिसके आधार पर किसी सॉफ्टवेयर का संचालन और नियंत्रण होता है। आधुनिक लड़ाकू विमानों में विभिन्न प्रणालियों के संचालन के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है।
राफेल विमान बनाने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन की ओर से सोर्स कोड साझा करने को लेकर सहमति नहीं होने की बात सामने आई है। हालांकि, भारतीय वायुसेना का रुख है कि स्वदेशी हथियार प्रणालियों को विमान में शामिल करने के लिए सोर्स कोड हासिल करना जरूरी नहीं है।
वायुसेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत ने फ्रांस को बताया है कि वह सोर्स कोड के बिना भी राफेल विमानों में भारतीय हथियार प्रणालियां स्थापित करने में सक्षम है। इस दिशा में भारतीय वायुसेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने तकनीकी समाधान तलाशा है।
50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री पर बनी थी सहमति
इससे पहले भारत ने भारत में निर्मित होने वाले 96 राफेल विमानों में 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल की शर्त रखी थी। शुरुआत में फ्रांस इस प्रस्ताव को लेकर तैयार नहीं था, लेकिन बाद में इस शर्त पर सहमति बनने की बात सामने आई।
अब स्वदेशी हथियार प्रणालियों को शामिल करने का विषय बातचीत का एक और महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। भारत चाहता है कि घरेलू रक्षा उद्योग की क्षमताओं का इस्तेमाल विमानों के निर्माण और उनके संचालन से जुड़ी प्रणालियों में भी हो।
सौदे पर फैसले का इंतजार
वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने हाल ही में कहा था कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल सौदे पर चालू वित्त वर्ष के अंत तक फैसला हो सकता है। इससे इस प्रस्ताव पर आगे की प्रगति को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।
फिलहाल, स्वदेशी हथियार प्रणालियों को शामिल करने की शर्त पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत का नतीजा महत्वपूर्ण रहेगा। यदि इस मुद्दे पर सहमति बनती है, तो प्रस्तावित सौदे में भारतीय रक्षा तकनीक की भूमिका तय करने का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, अंतिम समझौते और उसकी शर्तों को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।



