बिलासपुर में गांजा तस्करी पर बड़ा शिकंजा, महिला आरोपी गिरफ्तार; 27.57 लाख के नेटवर्क की खुली अहम कड़ी
बिलासपुर में रेलवे के जरिए चल रहे कथित गांजा तस्करी नेटवर्क की जांच में GRP को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। 55 किलो से अधिक गांजा बरामदगी के मामले में करीब तीन महीने से फरार चल रही 45 वर्षीय अनुपमा मोहंती को सेंट्रल जेल के बाहर गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, वह जेल में बंद आरोपियों से मिलने और उन्हें धमकाने पहुंची थी।
55 किलो गांजा बरामदगी से शुरू हुई जांच
मामला 11 जुलाई का है, जब GRP ने रेलवे प्लेटफॉर्म पर चार आरोपियों—पंकजनी बेहरा, रीना पटनायक, आयुष कुशवाहा और एक नाबालिग—को पकड़ा था। तलाशी के दौरान उनके पास से 55 किलो 150 ग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने इसकी अनुमानित कीमत 27.57 लाख रुपये बताई थी।
पूछताछ आगे बढ़ी तो जांच केवल गांजा ले जाने वाले आरोपियों तक सीमित नहीं रही। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अनुपमा मोहंती का नाम कथित तौर पर नेटवर्क के संचालन से जोड़ा। इसके बाद GRP ने उस व्यक्ति तक पहुंचने पर फोकस किया, जिसे जांच में नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा था।
सप्लायर की गिरफ्तारी ने जांच को आगे बढ़ाया
14 जुलाई को GRP ने संबलपुर निवासी निहार रंजन पटनायक को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में उससे भी अनुपमा के संबंध में जानकारी मिली।
जांच एजेंसी का दावा है कि युवाओं को कमीशन देकर अलग-अलग राज्यों में गांजा पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। ओडिशा से छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश तक फैले इस कथित नेटवर्क में रेलवे परिवहन का इस्तेमाल जांच का महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
यही कारण है कि इस मामले को केवल एक खेप की बरामदगी के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। यदि पुलिस के दावे जांच में प्रमाणित होते हैं, तो मामला सप्लायर, परिवहनकर्ता और कथित संचालनकर्ता के बीच बने पूरे नेटवर्क तक पहुंच सकता है।
जेल के बाहर गिरफ्तारी ने खोली नई कड़ी
GRP के अनुसार, अनुपमा मोहंती धुतरापारा, संबलपुर की रहने वाली है। पुलिस को सूचना मिली थी कि वह बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद आरोपियों से संपर्क करने पहुंची है। इसके बाद जेल के बाहर निगरानी बढ़ाई गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों और सप्लायर से मिली जानकारी को जोड़ने के बाद उसकी भूमिका की पड़ताल की जा रही थी।
पति के जेल जाने के बाद कारोबार संभालने का आरोप
रेलवे पुलिस के मुताबिक, अनुपमा का पति सुधांशु मोहंती पिछले करीब दो वर्षों से गांजा तस्करी से जुड़े एक मामले में संबलपुर जेल में बंद है। पुलिस की जांच में यह आरोप सामने आया है कि उसके जेल जाने के बाद अनुपमा ने कथित तौर पर तस्करी के कारोबार को संभाला।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। फिलहाल पुलिस उसकी कथित भूमिका, संपर्कों और आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है।
अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पैसों के रास्ते की जांच
इस मामले की अगली बड़ी कड़ी आर्थिक जांच हो सकती है। GRP अब अनुपमा की संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है। पुलिस का कहना है कि यदि किसी संपत्ति या वित्तीय लेन-देन का संबंध कथित तस्करी से अर्जित रकम से मिलता है, तो कानून के तहत उसे जब्त करने और राजसात करने की कार्रवाई की जा सकती है।
यहीं से जांच का दायरा महज गांजा बरामदगी से आगे बढ़ता है। किसी संगठित तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए केवल कैरियर को पकड़ना पर्याप्त नहीं होता; सप्लाई, फंडिंग, संपर्क और अवैध कमाई से बनी संपत्ति तक पहुंचना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
युवाओं को कैरियर बनाए जाने का पहलू सबसे गंभीर
पुलिस के दावे में सबसे चिंताजनक पहलू युवाओं को कमीशन देकर तस्करी में इस्तेमाल करने का है। ऐसे नेटवर्क में मुख्य संचालक अक्सर खुद नशीले पदार्थ लेकर यात्रा करने के बजाय अलग-अलग लोगों का इस्तेमाल करते हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक संचालनकर्ता तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
अगर जांच में यह मॉडल प्रमाणित होता है, तो रेलवे पुलिस के सामने चुनौती केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में ऐसे मामलों में यात्रियों की निगरानी, संदिग्ध खेप की पहचान और अंतरराज्यीय नेटवर्क के बीच सूचना साझा करना अहम भूमिका निभा सकता है।



