शरीर की चर्बी सिर्फ अतिरिक्त वजन नहीं, बल्कि ऊर्जा का भंडार और कई जैविक प्रक्रियाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है; बहुत अधिक और बहुत कम फैट—दोनों ही स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं
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नई दिल्ली। शरीर की चर्बी यानी फैट को अक्सर केवल वजन बढ़ने से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका काम इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। शरीर में मौजूद वसा ऊर्जा को सुरक्षित रखने, हार्मोन संबंधी प्रक्रियाओं, शरीर का तापमान बनाए रखने और कई जरूरी जैविक गतिविधियों में भूमिका निभाती है। इसलिए स्वस्थ रहने का मतलब फैट को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि शरीर की जरूरत के अनुरूप संतुलित स्वास्थ्य बनाए रखना है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और मेडिसिन प्रोफेसर एलिफ ओरल के अनुसार, शरीर में फैट की महत्वपूर्ण जैविक भूमिका है। जब हम भोजन करते हैं, तो कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा अलग-अलग पोषक तत्वों में टूटते हैं। शरीर तत्काल जरूरत से ज्यादा ऊर्जा को वसा कोशिकाओं में जमा कर सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके।
फैट शरीर में कैसे काम करता है?
वसा ऊतक केवल ऊर्जा जमा करने की जगह नहीं है। यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक संदेश पहुंचाने वाले कुछ हार्मोन और अन्य संकेतों से भी जुड़ा होता है। इनमें लेप्टिन प्रमुख है, जो शरीर में ऊर्जा के भंडार से संबंधित संकेत दिमाग तक पहुंचाता है।
फैट शरीर को ठंड से बचाने में भी मदद करता है। शरीर में मौजूद अलग-अलग प्रकार के वसा ऊतक ऊर्जा के भंडारण के साथ गर्मी पैदा करने और तापमान नियंत्रित रखने में भूमिका निभा सकते हैं।
बहुत कम फैट भी बन सकता है परेशानी का कारण
स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक शरीर वसा नुकसानदायक हो सकता है और हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। लेकिन दूसरी ओर, जरूरत से बहुत कम ऊर्जा और वसा उपलब्ध होने पर शरीर की सामान्य प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक पर्याप्त पोषण न मिलने की स्थिति में शरीर ऊर्जा बचाने की कोशिश करता है। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली, हार्मोनल संतुलन, मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी बदलाव और पुरुषों में हार्मोन से जुड़े बदलाव भी देखे जा सकते हैं।
यही कारण है कि केवल बहुत दुबला या अत्यधिक मांसल दिखने को स्वास्थ्य का पैमाना मानना सही नहीं है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली ‘शेडेड’ बॉडी हर व्यक्ति के लिए स्वस्थ शरीर की परिभाषा नहीं होती।
शरीर में फैट की सही मात्रा कितनी होनी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, सभी लोगों के लिए शरीर में फैट का कोई एक निश्चित प्रतिशत आदर्श नहीं माना जा सकता। उम्र, शरीर की बनावट, गतिविधि और कई अन्य कारकों के कारण शरीर की संरचना अलग-अलग होती है।
शरीर की संरचना जानने के लिए DEXA जैसे परीक्षण उपलब्ध हैं, लेकिन सामान्य स्वास्थ्य के लिए हर व्यक्ति को नियमित रूप से शरीर की फैट प्रतिशत जांच कराने की जरूरत नहीं होती। BMI भी शरीर में फैट और मांसपेशियों के बीच अंतर नहीं करता, इसलिए इसे अकेले स्वास्थ्य का पूर्ण पैमाना नहीं माना जाना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भोजन में पर्याप्त पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित जीवनशैली पर ध्यान दिया जाए। शरीर की चर्बी को किसी निश्चित दिखावट तक कम करने की कोशिश करने के बजाय समग्र स्वास्थ्य और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्राथमिकता देना ज्यादा उपयोगी है।



