विजय देवरकोंडा का चौंकाने वाला खुलासा: ‘लाइगर’ के लिए पानी तक छोड़ा, बर्फ चूसकर पूरी की शूटिंग
फिल्मी पर्दे पर जब किसी अभिनेता का शरीर बिल्कुल अलग नजर आता है, तो दर्शक अक्सर उसके पीछे की मेहनत को सिर्फ जिम और डाइट तक सीमित समझते हैं। लेकिन विजय देवरकोंडा ने ‘लाइगर’ की शूटिंग से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया है, जो फिल्मी ग्लैमर के पीछे छिपे शारीरिक दबाव की एक अलग तस्वीर दिखाता है।
एक हालिया इंटरव्यू में विजय ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें लंबे समय तक पानी पीने से बचना पड़ता था और वह अपनी प्यास नियंत्रित करने के लिए बर्फ के टुकड़े चूसते थे। उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया कि कुछ दिनों में पानी की मात्रा बेहद कम रह जाती थी और उनका पूरा ध्यान पानी पीने पर टिक जाता था।
शरीर को कैमरे के सामने बदलने की कीमत
‘लाइगर’ एक स्पोर्ट्स ड्रामा थी और विजय ने फिल्म में एक बॉक्सर की भूमिका निभाई थी। ऐसे किरदार के लिए अभिनेता को केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि शरीर की फिटनेस, मांसपेशियों की परिभाषा और स्क्रीन पर एथलेटिक लुक पर भी काम करना पड़ता है।
यहीं से इस कहानी का अहम पहलू सामने आता है। कैमरे पर कुछ सेकंड के लिए दिखाई देने वाला शरीर कई बार अभिनेता की महीनों की ट्रेनिंग, डाइट और शूटिंग के दौरान किए गए कठोर बदलावों का परिणाम होता है।
विजय के मुताबिक, शूटिंग के दौरान उन्हें कई घंटे पानी से दूर रहना पड़ता था। उन्होंने बताया कि उस समय बर्फ का इस्तेमाल प्यास संभालने के लिए किया जाता था। एक चरण में उन्होंने बहुत कम मात्रा में पानी लेने की बात कही और बाद में नारियल पानी की मांग की।
‘पानी-पानी’ सोचने लगे थे विजय
विजय ने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि जब वह बहुत कम पानी ले रहे थे, तब उनका ध्यान बार-बार पानी पर जाता था। उन्होंने यह भी बताया कि सोते समय तक उनके दिमाग में पानी का ख्याल रहता था।
यह अनुभव बताता है कि शरीर की सामान्य जरूरतों को लंबे समय तक दबाकर रखना किसी भी कलाकार के लिए केवल शारीरिक नहीं, मानसिक चुनौती भी बन सकता है।
हालांकि यहां एक जरूरी फर्क समझना चाहिए—किसी अभिनेता द्वारा किसी खास फिल्म के लिए अपनाई गई तैयारी को सामान्य फिटनेस मॉडल नहीं माना जा सकता। फिल्म की जरूरत, शूटिंग शेड्यूल, कॉस्ट्यूम, कैमरा लाइटिंग और शरीर की दृश्यात्मक जरूरतें ऐसी रणनीतियों के पीछे हो सकती हैं।
4 लीटर नारियल पानी की मांग क्यों की?
विजय के मुताबिक, जब शूटिंग के दौरान पानी सीमित किया जा रहा था, तब उन्होंने नारियल पानी लेने की इच्छा जताई। उन्होंने बताया कि वह भोजन की जगह बड़ी मात्रा में ठंडा नारियल पानी लेना चाहते थे।
यहां भी उनके इंटरव्यू को व्यक्तिगत अनुभव के रूप में देखना ज्यादा सही है। लंबे समय तक पानी कम लेने के बाद अचानक बहुत अधिक तरल पदार्थ लेने की रणनीति हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
डिहाइड्रेशन शरीर के प्रदर्शन, एकाग्रता और ऊर्जा पर असर डाल सकता है। गंभीर स्थिति में यह स्वास्थ्य के लिए जोखिम भी पैदा कर सकता है। इसलिए किसी अभिनेता की शूटिंग तैयारी को देखकर ऐसी प्रक्रिया को खुद दोहराना उचित नहीं होगा।
‘लाइगर’ की कहानी में मेहनत और नतीजे का विरोधाभास
विजय की यह बात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ‘लाइगर’ को लेकर उम्मीदें काफी बड़ी थीं। 2022 में रिलीज हुई इस पैन-इंडिया फिल्म में विजय के साथ अनन्या पांडे और राम्या कृष्णन नजर आई थीं, जबकि माइक टायसन भी फिल्म का हिस्सा थे।
बड़े स्तर के प्रमोशन और व्यापक रिलीज के बावजूद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली। यानी पर्दे पर दिखाई देने वाले अंतिम परिणाम और उसके पीछे अभिनेता द्वारा की गई व्यक्तिगत मेहनत हमेशा एक जैसे नहीं होते।
यही फिल्म इंडस्ट्री की वास्तविकता है—किसी कलाकार की शारीरिक मेहनत, शूटिंग की कठिनाई या तैयारी अपने आप फिल्म की सफलता की गारंटी नहीं बनती।
अब नजर ‘राणाबली’ पर
विजय देवरकोंडा की अगली चर्चित फिल्म ‘राणाबली’ है, जिसमें वह रश्मिका मंदाना के साथ नजर आएंगे। यह जोड़ी शादी के बाद पहली बार किसी फिल्म में साथ दिखाई देने को लेकर भी चर्चा में है।
फिल्म को ऐतिहासिक एक्शन ड्रामा के रूप में पेश किया जा रहा है और कहानी ब्रिटिश शासन के दौर की पृष्ठभूमि में रखी गई है। विजय इसमें राणाबली की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि रश्मिका उनके किरदार की पत्नी जयम्मा के रूप में दिखाई देंगी। हॉलीवुड अभिनेता अर्नोल्ड वॉसलू भी फिल्म का हिस्सा हैं।
फिल्म की घोषित रिलीज डेट 16 अक्टूबर 2026 बताई गई है।
इस खुलासे का बड़ा मतलब क्या है?
विजय की ‘लाइगर’ वाली याद केवल एक फिल्म के पुराने शूट की कहानी नहीं है। यह दिखाती है कि स्टार इमेज के पीछे कई बार ऐसी तैयारी होती है, जिसकी पूरी कीमत दर्शक स्क्रीन पर नहीं देख पाता।
लेकिन इस कहानी का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है—शारीरिक बदलाव और डिहाइड्रेशन को उपलब्धि समझना सही नहीं है। प्रोफेशनल शूटिंग की जरूरतों और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
आने वाले समय में फिल्म इंडस्ट्री में फिटनेस और बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ने के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण होगा कि कलाकारों को पर्दे की जरूरतों के लिए किस हद तक शारीरिक दबाव से गुजरना चाहिए। विजय का अनुभव इसी बहस को फिर सामने लाता है।



