रायगढ़ में AI का बड़ा धमाका: 5,136 रजिस्ट्रेशन के बीच 1,750 चयनित, 120 युवाओं को मिलेगी खास ट्रेनिंग
रायपुर, 1 अक्टूबर 2026। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ तकनीकी कंपनियों या बड़े शहरों तक सीमित रहने वाली तकनीक नहीं रह गई है। रायगढ़ में 3 अक्टूबर को होने जा रही विशेष कार्यशाला इसी बदलाव को स्थानीय स्तर पर गति देने की कोशिश है। खास बात यह है कि कार्यक्रम के लिए 5,136 लोगों ने पंजीयन कराया, जबकि 1,750 प्रतिभागियों को इसमें शामिल होने का अवसर दिया गया है।
‘रायगढ़ की एआई उड़ान—जागरूकता से नवाचार तक’ थीम पर होने वाली इस कार्यशाला का शुभारंभ वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी करेंगे। आयोजन को आईआईआईटी नया रायपुर के एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और जिला प्रशासन रायगढ़ की संयुक्त पहल के रूप में तैयार किया गया है।
सिर्फ AI समझने की नहीं, इस्तेमाल करने की तैयारी
इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि फोकस केवल एआई की जानकारी देने पर नहीं रखा गया है। कार्यशाला में शिक्षा, प्रशासन, उद्योग, व्यवसाय, रोजगार और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में AI के वास्तविक उपयोग पर चर्चा होगी।
औद्योगिक गतिविधियों वाले रायगढ़ जैसे जिले में इसका महत्व और बढ़ जाता है। यहां AI का इस्तेमाल स्थानीय जरूरतों के हिसाब से डेटा विश्लेषण, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, औद्योगिक दक्षता, कौशल प्रशिक्षण और नागरिक सेवाओं में संभावित रूप से किया जा सकता है।
यानी लक्ष्य यह है कि AI को केवल ‘नई तकनीक’ के रूप में देखने के बजाय उसे स्थानीय समस्याओं के समाधान के एक उपकरण के रूप में समझा जाए।
5,136 में से 1,750 तक पहुंचा मौका
कार्यशाला के लिए मिले 5,136 पंजीयन यह संकेत देते हैं कि विद्यार्थियों, युवाओं, शिक्षकों, अधिकारियों, कारोबारियों और तकनीक में रुचि रखने वाले लोगों के बीच AI को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है।
इनमें से 1,750 प्रतिभागियों का चयन किया गया है। पहले चरण में उन्हें AI की मौजूदा क्षमताओं और अलग-अलग क्षेत्रों में उसके संभावित इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ स्थानीय समस्याओं पर भी चर्चा करेंगे, ताकि तकनीक की चर्चा केवल सैद्धांतिक न रह जाए।
120 प्रतिभागियों के लिए असली टेक्निकल चुनौती
कार्यशाला का दूसरा चरण और अधिक व्यावहारिक है। चयनित 120 प्रतिभागियों को विशेष हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें AI टूल्स के इस्तेमाल और छोटे प्रोजेक्ट आधारित अभ्यास पर जोर रहेगा।
यही हिस्सा इस पहल को सामान्य जागरूकता कार्यक्रम से अलग दिशा देता है। AI की जानकारी हासिल करना और AI से कोई काम करवाना दो अलग क्षमताएं हैं। वास्तविक कौशल तब विकसित होता है जब व्यक्ति किसी समस्या को पहचानकर उपयुक्त टूल चुन सके, सही निर्देश दे सके, परिणाम की जांच कर सके और उसे अपने काम में लागू कर सके।
इस प्रशिक्षण में प्रोजेक्ट आधारित अभ्यास इसी व्यावहारिक क्षमता को विकसित करने की कोशिश होगी।
रायगढ़ को ‘AI Living Lab’ बनाने की तैयारी
कार्यशाला की असली बड़ी योजना एक दिन के आयोजन के बाद शुरू होगी। आईआईआईटी नया रायपुर के AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और जिला प्रशासन की योजना रायगढ़ में लंबे समय के लिए AI इकोसिस्टम विकसित करने की है।
हब-स्पोक मॉडल के तहत जिले को AI-COE के सक्रिय स्पोक के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण, कौशल विकास, स्थानीय समस्याओं के लिए तकनीकी समाधान और नवाचार आधारित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना है।
भविष्य में रायगढ़ को ‘AI Living Lab’ की दिशा में विकसित करने का विचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे तकनीक का परीक्षण वास्तविक परिस्थितियों में किया जा सकता है। यदि स्थानीय विद्यार्थी और युवा जिले की समस्याओं पर छोटे AI प्रोजेक्ट विकसित करते हैं, तो इससे केवल रोजगार योग्य कौशल नहीं बल्कि स्थानीय नवाचार की संस्कृति भी बन सकती है।
उद्योग और युवाओं के बीच बन सकता है नया कनेक्शन
रायगढ़ की औद्योगिक पहचान इस पहल के लिए एक अतिरिक्त अवसर पैदा करती है। उद्योगों को प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन की जरूरत होती है, जबकि युवाओं को ऐसे कौशल चाहिए जिनका इस्तेमाल वास्तविक काम में हो सके।
AI प्रशिक्षण इन दोनों जरूरतों के बीच एक कड़ी बना सकता है। आने वाले समय में डेटा आधारित निर्णय, ऑटोमेशन, दस्तावेज विश्लेषण, ग्राहक सेवा, गुणवत्ता नियंत्रण और पूर्वानुमान जैसे क्षेत्रों में AI का उपयोग बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों को लगातार मार्गदर्शन, प्रोजेक्ट अवसर और संस्थागत सहयोग कितना मिलता है। केवल एक कार्यशाला से AI इकोसिस्टम तैयार नहीं होता; उसके लिए निरंतर प्रशिक्षण और स्थानीय स्तर पर उपयोगी परियोजनाओं की जरूरत होती है।
जागरूकता से आगे बढ़कर परिणाम पर होगी नजर
रायगढ़ की यह पहल एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने रखती है—क्या AI की तकनीक को स्थानीय स्तर पर वास्तविक परिणामों में बदला जा सकता है?
5,136 पंजीयन से शुरुआती रुचि साफ दिखाई देती है। अब आगे की चुनौती इस रुचि को कौशल, प्रोजेक्ट और रोजगार या उद्यमिता के अवसरों में बदलने की होगी।
यदि प्रशिक्षण के बाद स्थानीय समस्याओं पर AI आधारित समाधान विकसित होते हैं और उन्हें प्रशासन, शिक्षा तथा उद्योग में प्रयोग करने का अवसर मिलता है, तो रायगढ़ की यह पहल लंबे समय तक प्रभाव पैदा कर सकती है। फिलहाल 3 अक्टूबर की कार्यशाला इस व्यापक तकनीकी यात्रा की शुरुआती कड़ी बनने जा रही है।



