एशियन गेम्स में शानदार गोल्डन जीत: बेटियों ने रचा इतिहास, भारत को मिला छठा स्वर्ण
नागोया। भारतीय महिला एथलीटों ने ट्रैक पर ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे देश को जश्न का मौका दे दिया। महिला 4×400 मीटर रिले में किदान, मचेत्तिरा पूवम्मा, प्राची और विथ्या रामराज की भारतीय चौकड़ी ने 3:29.69 मिनट का समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह प्रतियोगिता में भारत का छठा गोल्ड और एथलेटिक्स में पहला स्वर्ण रहा।
इस जीत की खासियत सिर्फ स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है। रिले जैसी प्रतियोगिता में चारों धावकों की गति के साथ-साथ बैटन एक्सचेंज, तालमेल और आखिरी चरण में दबाव संभालने की क्षमता भी निर्णायक होती है। भारतीय टीम ने इन सभी पहलुओं में मजबूत प्रदर्शन किया।
0.52 सेकंड का अंतर, लेकिन मुकाबला बेहद कड़ा
फाइनल में भारत और बहरीन के बीच अंतर बहुत बड़ा नहीं था। भारतीय टीम ने 3:29.69 मिनट में रेस पूरी की, जबकि बहरीन 3:30.21 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रही। चीन ने 3:31.02 मिनट के समय के साथ कांस्य पदक हासिल किया। यानी भारत ने बहरीन को केवल 0.52 सेकंड से पीछे छोड़ा।
यह अंतर बताता है कि फाइनल में मामूली तकनीकी गलती भी पदक का रंग बदल सकती थी। रिले में एक धावक की खराब शुरुआत या बैटन ट्रांसफर में छोटी सी चूक पूरी टीम के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मुकाबले में भारतीय चौकड़ी का संयम इस जीत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
एथलेटिक्स में लंबे इंतजार के बाद आया गोल्ड
भारत के लिए यह स्वर्ण इसलिए भी अहम है क्योंकि यह इस संस्करण में एथलेटिक्स का पहला गोल्ड है। इससे पहले ट्रैक एंड फील्ड में भारतीय खिलाड़ियों ने कई पदक हासिल किए थे, लेकिन शीर्ष स्थान तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली थी। महिला रिले टीम ने इस सिलसिले को खत्म किया।
रिले की यह जीत भारतीय एथलेटिक्स के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें व्यक्तिगत प्रदर्शन से ज्यादा टीम की गहराई सामने आती है। चार अलग-अलग धावकों का एक साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना बताता है कि भारत के पास इस स्पर्धा में प्रतिस्पर्धी स्तर की प्रतिभा मौजूद है।
विथ्या रामराज के लिए दूसरा बड़ा पल
विथ्या रामराज के लिए यह स्वर्ण पदक इस प्रतियोगिता में दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने 400 मीटर बाधा दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया था और उस दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पी.टी. उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बेहतर किया था।
रिले में उनकी भूमिका ने इस प्रदर्शन को और खास बना दिया। एक ही प्रतियोगिता में व्यक्तिगत स्पर्धा और रिले दोनों में पदक हासिल करना उनके लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है।
बारिश के बीच भारतीय टीम ने दिखाया धैर्य
फाइनल के दौरान बारिश भी हो रही थी। ऐसे मौसम में ट्रैक की परिस्थितियां बदल सकती हैं और धावकों के लिए पकड़, गति तथा बैटन संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद भारतीय टीम ने अपनी रफ्तार और तालमेल बनाए रखा।
ऐसे हालात में सिर्फ शारीरिक क्षमता पर्याप्त नहीं होती। एथलीटों को परिस्थितियों के अनुसार अपनी दौड़ को नियंत्रित करना पड़ता है। भारतीय टीम की जीत में यह मानसिक मजबूती भी महत्वपूर्ण रही।
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भारत की पदक तालिका में भी बड़ा उछाल
इस स्वर्ण के साथ भारत के गोल्ड मेडल की संख्या छह हो गई। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत के खाते में 6 स्वर्ण, 21 रजत और 25 कांस्य समेत कुल 52 पदक हैं और वह पदक तालिका में 10वें स्थान पर है।
एथलेटिक्स का यह स्वर्ण भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं से मिलने वाले पदक किसी भी बड़े बहु-खेल आयोजन में देश की कुल पदक संख्या को मजबूत करते हैं।
आगे के लिए क्या संकेत?
इस प्रदर्शन का सबसे बड़ा असर आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय महिला रिले टीम की तैयारी पर दिखाई दे सकता है। 4×400 मीटर में सिर्फ चार तेज धावक होना पर्याप्त नहीं है; निरंतर अच्छे परिणाम के लिए बैकअप एथलीटों, बैटन एक्सचेंज और रेस रणनीति पर भी लगातार काम करना पड़ता है।



