सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से नाबालिगों की सोशल मीडिया पहुंच को लेकर कानूनी ढांचा तैयार करने की संभावना पर विचार करने को कहा; अभी 18 साल से कम उम्र वालों के अकाउंट पर कोई पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं
नई दिल्ली: 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर भारत में नियम आने वाले समय में सख्त हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से नाबालिगों को सोशल मीडिया के संभावित खतरों से बचाने के लिए प्रभावी कानूनी और नियामकीय व्यवस्था पर विचार करने को कहा है। हालांकि, फिलहाल भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर कोई देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है।
यह मामला Just Rights for Children Alliance की ओर से दायर याचिका से संबंधित है। याचिका में बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट बनाने और संचालित करने से रोकने तथा उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी उपाय लागू करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के रुख का क्या मतलब है?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मौजूदा कानूनों और नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों और दिशा-निर्देश तैयार करने की संभावना पर विचार करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान बच्चों की कम उम्र में सोशल मीडिया तक पहुंच को लेकर भी सवाल उठे। खास तौर पर यह मुद्दा सामने आया कि 12-13 साल की उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट कैसे बना सकते हैं।
केंद्र की ओर से Digital Personal Data Protection Act, 2023 का भी उल्लेख किया गया। इस कानून में बच्चों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से संबंधित विशेष प्रावधान हैं और कुछ परिस्थितियों में अभिभावक की सत्यापन योग्य सहमति की व्यवस्था भी है।
याचिका में बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्या कहा गया?
याचिका में बच्चों को ऑनलाइन ग्रोमिंग, यौन शोषण, साइबरबुलिंग, अनुचित सामग्री, व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग और प्रोफाइलिंग जैसे जोखिमों से बचाने के लिए कड़े सुरक्षा उपायों की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि सोशल मीडिया अकाउंट बनाते समय यूजर्स को प्लेटफॉर्म की शर्तों, यूजर एग्रीमेंट और प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार करना पड़ता है। ऐसे में नाबालिगों के स्वतंत्र रूप से इस तरह के समझौतों में शामिल होने को लेकर कानूनी सवाल उठते हैं।
क्या 18 साल से कम उम्र वालों के अकाउंट बंद होंगे?
फिलहाल नहीं। भारत में अभी ऐसा कोई लागू देशव्यापी आदेश नहीं है जिसके तहत 18 साल से कम उम्र के सभी बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट तत्काल बंद कर दिए जाएं।
आगे यदि सरकार कोई नया कानूनी ढांचा तैयार करती है, तो उसमें उम्र की पुष्टि, अभिभावकीय सहमति, बच्चों के डेटा की सुरक्षा और नाबालिगों के स्वतंत्र अकाउंट से जुड़े नियम शामिल किए जा सकते हैं। अंतिम व्यवस्था क्या होगी, यह सरकार द्वारा बनाए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।
सोशल मीडिया कंपनियों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि नाबालिगों के लिए उम्र सीमा या अन्य कड़े नियम लागू होते हैं, तो सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी Age Verification/Age Assurance व्यवस्था मजबूत करनी पड़ सकती है।
इससे Instagram, Facebook, YouTube, TikTok समेत अन्य प्लेटफॉर्म्स को उम्र की पुष्टि, बच्चों की सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल से जुड़े अपने सिस्टम में बदलाव करने पड़ सकते हैं। हालांकि, किसी अंतिम नियम के बिना यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी प्लेटफॉर्म पर किस तरह की व्यवस्था लागू होगी।
किन देशों में नाबालिगों के लिए सख्त नियम हैं?
ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र पर प्रतिबंध
ऑस्ट्रेलिया में 10 दिसंबर 2025 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कई age-restricted सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने या रखने पर रोक संबंधी व्यवस्था लागू है। इसमें Facebook, Instagram, TikTok, YouTube, Snapchat, X, Threads और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। नियमों के तहत मुख्य जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म्स की है।
नॉर्वे में 16 साल की उम्र सीमा का प्रस्ताव
नॉर्वे सरकार ने सोशल मीडिया के लिए उम्र सीमा से संबंधित कानून लाने की प्रक्रिया शुरू की है। अप्रैल 2026 में सरकार ने प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 16 साल की उम्र सीमा और प्लेटफॉर्म्स की ओर से उम्र सत्यापन की जिम्मेदारी से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी थी। यह व्यवस्था ऑस्ट्रेलिया की तरह पहले से लागू कानून नहीं है।
यूरोप में भी उम्र सत्यापन पर जोर
यूरोप में भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर उम्र सीमा और उम्र सत्यापन पर चर्चा जारी है। सितंबर 2026 में यूरोपीय आयोग ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और बड़े बच्चों के लिए अभिभावकीय निगरानी जैसे उपायों का प्रस्ताव रखा।
भारत में अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद अब केंद्र सरकार के सामने नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था तैयार करने का मुद्दा है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि सरकार उम्र सत्यापन, अभिभावकीय सहमति, डेटा सुरक्षा और सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े नियमों को किस तरह लागू करती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का रुख इस विषय पर संभावित कानूनी और नियामकीय बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।



