महंगे होने वाले हैं AC-TV और फ्रिज, जानें पुराने दाम में खरीदारी का शानदार मौका कब तक
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में अगर घर के लिए AC, LED TV, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो खरीदारी का बजट एक बार फिर से देखना जरूरी हो सकता है। कई कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियां 1 अक्टूबर 2026 से कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी में हैं। उद्योग से जुड़े अपडेट्स के मुताबिक, AC की कीमतों में करीब 5 से 8 फीसदी तक और कुछ अन्य घरेलू उपकरणों में लगभग 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, सभी कंपनियों और मॉडलों पर इसका असर समान नहीं होगा।
दिलचस्प बात यह है कि कीमत बढ़ने की घोषणा के बावजूद ग्राहक तुरंत हर दुकान पर नया दाम नहीं देखेंगे। इसकी वजह रिटेलर्स के पास मौजूद पुराना स्टॉक है। यानी आने वाले दिनों में खरीदारी करने वालों के लिए असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कीमत कितनी बढ़ेगी, बल्कि यह भी है कि पुरानी कीमत वाला स्टॉक कहां और कितने समय तक उपलब्ध रहेगा।
AC पर सबसे ज्यादा दबाव क्यों?
इस बार कीमतों की चर्चा में AC सबसे ऊपर है। इसकी बड़ी वजह निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कॉपर की बढ़ी लागत है। Haier India के अनुसार, कॉपर की कीमत पिछले साल करीब 8,000-9,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर लगभग 14,500 डॉलर तक पहुंची है। कंपनी के मुताबिक एक AC में करीब 3 से 4 किलोग्राम कॉपर इस्तेमाल हो सकता है।
इसके अलावा स्टील, एल्युमिनियम, प्लास्टिक और क्रूड से जुड़े इनपुट की लागत, फ्रेट खर्च और मुद्रा विनिमय में उतार-चढ़ाव भी कंपनियों की लागत बढ़ा रहे हैं। उद्योग के लिए यह 2026 में कीमत बढ़ाने का तीसरा दौर बताया जा रहा है।
यही कारण है कि AC की कीमतों पर असर दूसरे उत्पादों की तुलना में ज्यादा दिखाई दे सकता है।
TV, फ्रिज और वॉशिंग मशीन भी बचेंगे नहीं
AC के अलावा LED TV, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन की कीमतों में भी बदलाव की तैयारी है। उपलब्ध उद्योग रिपोर्टों के मुताबिक कुछ कंपनियां इन कैटेगरी में करीब 3-4 फीसदी तक बढ़ोतरी कर रही हैं, जबकि अलग-अलग ब्रांड और मॉडल के हिसाब से वास्तविक बदलाव अलग हो सकता है। कुछ कंपनियां अभी लागत और बाजार की स्थिति का आकलन कर रही हैं।
इसका मतलब यह है कि ग्राहक को सिर्फ एक प्रतिशत देखकर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए। एक ही कैटेगरी में अलग ब्रांड, मॉडल, स्टोरेज क्षमता, फीचर्स और मौजूदा ऑफर के कारण अंतिम कीमत काफी अलग हो सकती है।
पुराने दाम पर सामान मिलने की असली वजह क्या है?
कीमत बढ़ने के बाद भी कुछ दुकानों पर पुराने दाम दिखाई दे सकते हैं। इसका कारण डिस्ट्रिब्यूटर और रिटेलर के पास पहले से खरीदा गया स्टॉक है। जिन उत्पादों को कंपनियों की नई कीमत लागू होने से पहले पुराने दाम पर खरीदा गया था, वे स्टॉक खत्म होने तक पुराने या अलग कीमत पर बिक सकते हैं। उद्योग रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि कुछ डीलरों के पास त्योहारी बिक्री के लिए पहले से इन्वेंटरी मौजूद है।
यही वजह है कि अक्टूबर की शुरुआत में अलग-अलग दुकानों पर एक ही मॉडल की कीमत में अंतर दिखाई दे सकता है।
क्या अभी खरीदना ही जरूरी है?
सिर्फ संभावित कीमत बढ़ोतरी की वजह से बिना जरूरत के कोई महंगा सामान खरीदना जरूरी नहीं है। लेकिन अगर AC, TV, फ्रिज या वॉशिंग मशीन पहले से खरीदने की योजना में है, तो खरीदारी टालने से पहले मौजूदा कीमत, एक्सचेंज ऑफर, बैंक डिस्काउंट, वारंटी और डिलीवरी चार्ज सहित कुल लागत की तुलना करना समझदारी होगी।
कई बार बढ़ी हुई MRP के बावजूद त्योहारों के दौरान मिलने वाली छूट अंतिम कीमत को प्रतिस्पर्धी बनाए रख सकती है। इसलिए सिर्फ ‘कितने प्रतिशत दाम बढ़े’ के बजाय ग्राहक को यह देखना चाहिए कि भुगतान वास्तव में कितना करना पड़ रहा है।
आगे और महंगाई का जोखिम क्यों बना हुआ है?
कीमतों में अक्टूबर का बदलाव अंतिम बढ़ोतरी ही हो, यह जरूरी नहीं है। Haier ने इनपुट लागत ऊंची रहने की स्थिति में अक्टूबर से जनवरी के बीच कई चरणों में कुल करीब 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की संभावना बताई है। दूसरी ओर Panasonic जैसी कुछ कंपनियां स्थिति का आकलन कर रही हैं। यानी आने वाले महीनों की कीमतें कमोडिटी लागत और बाजार की मांग पर भी निर्भर करेंगी।
इसका व्यापक असर यह हो सकता है कि कंपनियां लागत बढ़ने का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाएं, जबकि ग्राहक ऊंची कीमत और त्योहारी ऑफर के बीच बेहतर सौदा तलाशें। खासकर बड़े घरेलू उपकरणों में कुछ प्रतिशत की बढ़ोतरी भी कुल खरीद बजट में अच्छा-खासा अंतर पैदा कर सकती है।
खरीदारी करने वालों के लिए सबसे जरूरी बात
अगर आपका सामान खरीदना पहले से तय है, तो 30 सितंबर तक उपलब्ध पुराने स्टॉक और अक्टूबर के बाद की कीमत—दोनों की तुलना करना उपयोगी रहेगा। दुकान पर केवल डिस्काउंट देखकर फैसला न करें। मॉडल नंबर, नई MRP, वास्तविक बिक्री कीमत, एक्सचेंज वैल्यू और वारंटी को साथ में देखें।



