29 सितंबर का मौसम: कई राज्यों में बारिश और गरज-चमक, राजस्थान समेत इन इलाकों में बदल सकता है मौसम
नई दिल्ली। सितंबर का आखिरी सप्ताह खत्म होने से पहले देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां अभी पूरी तरह थमी नहीं हैं। 29 सितंबर को कई राज्यों में हल्की से छिटपुट बारिश, बादल और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। हालांकि, इसे पूरे देश में भारी बारिश का दिन मानना सही नहीं होगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की राज्यवार चेतावनियों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की स्थिति अलग रहेगी और कुछ जगहों पर सिर्फ स्थानीय स्तर पर बारिश या आंधी का असर देखने को मिल सकता है।
मौसम का यह बदलाव खास तौर पर किसानों, लंबी दूरी के यात्रियों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। सितंबर के अंतिम दिनों में खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति, कटाई की तैयारी और जल निकासी पर बारिश का सीधा असर पड़ सकता है।
राजस्थान में पूर्वी हिस्से पर मौसम की नजर
राजस्थान में 29 सितंबर को मौसम का असर पूरे राज्य में एक जैसा नहीं रहेगा। IMD के जयपुर केंद्र की 26 सितंबर को जारी राज्यवार चेतावनी के अनुसार पूर्वी राजस्थान में 29 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं जैसी स्थिति की चेतावनी दर्ज है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के लिए उस दिन कोई चेतावनी नहीं दी गई थी।
इसका मतलब यह है कि राजस्थान में रहने वाले लोगों को अपने जिले के स्थानीय पूर्वानुमान पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। एक ही राज्य के अलग-अलग जिलों में बारिश की तीव्रता और समय अलग हो सकता है।
किसानों के लिए इस समय खेतों में पानी की निकासी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। जिन इलाकों में फसल पकने की स्थिति में है, वहां अचानक बारिश होने पर कटाई और उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना, लेकिन 29 सितंबर को कोई चेतावनी नहीं
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई थी। IMD ने 27 सितंबर को उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना भी जताई थी।
हालांकि, 28 सितंबर को जारी राज्यवार चेतावनी में 29 सितंबर के लिए पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों में कोई चेतावनी नहीं दी गई है। इसका अर्थ है कि बारिश की स्थानीय संभावना और आधिकारिक गंभीर मौसम चेतावनी को अलग-अलग समझना जरूरी है।
यही अंतर मौसम संबंधी खबरों में महत्वपूर्ण है। किसी राज्य में बारिश का अनुमान होना जरूरी नहीं कि वहां भारी बारिश या खराब मौसम का अलर्ट भी हो।
दिल्ली-NCR में बादल, लेकिन बड़ा मौसम अलर्ट नहीं
दिल्ली और आसपास के इलाकों में मंगलवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना बनी रह सकती है। लेकिन IMD के 28 सितंबर के राज्यवार चेतावनी आंकड़ों में 29 सितंबर के लिए दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में कोई चेतावनी नहीं है। पंजाब के लिए भी 29 सितंबर को कोई चेतावनी दर्ज नहीं की गई है।
इसलिए दिल्ली-NCR में मौसम बदलने पर स्थानीय बारिश संभव होने के बावजूद इसे व्यापक खराब मौसम की स्थिति के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
पहाड़ी राज्यों में बारिश का असर सीमित हो सकता है
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी हाल के दिनों में बारिश की गतिविधियां रही हैं। 28 सितंबर को IMD ने उत्तराखंड में भारी बारिश की चेतावनी दर्ज की थी, लेकिन 29 सितंबर के लिए उत्तराखंड में कोई चेतावनी नहीं दिखाई गई। हिमाचल प्रदेश के लिए भी 28 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवा जैसी स्थिति की चेतावनी थी, जबकि 29 सितंबर को कोई चेतावनी नहीं थी।
फिर भी पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है। स्थानीय यात्रियों और पर्यटकों के लिए जिला स्तर का पूर्वानुमान देखना अधिक उपयोगी रहेगा, खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय रह सकता है मौसम
बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। यहां स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।
पूर्वोत्तर भारत में बादल और बारिश का प्रभाव सितंबर के अंतिम दिनों में भी बना रह सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों और IMD के अपडेट पर नजर रखना जरूरी होगा।
तेज हवाओं को लेकर क्यों सावधानी जरूरी?
बारिश के मुकाबले गरज-चमक के दौरान अचानक तेज हवा चलना कई बार ज्यादा व्यावहारिक परेशानी पैदा करता है। कमजोर पेड़, अस्थायी ढांचे, बिजली के तार और खुले स्थानों में रखी सामग्री प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, 60-70 किमी प्रति घंटे की हवा का अनुमान पूरे देश पर लागू नहीं होता। हवा की गति स्थान और मौसम प्रणाली के अनुसार काफी बदल सकती है। इसलिए किसी एक क्षेत्र के तेज हवा वाले पूर्वानुमान को पूरे राज्य या देश के लिए सामान्य चेतावनी मानना सही नहीं होगा।
किसानों के लिए सितंबर का आखिरी मौसम क्यों अहम?
सितंबर का अंतिम सप्ताह खेती के लिहाज से संवेदनशील समय है। खरीफ फसलों में कई जगह दाना भरने या पकने की अवस्था होती है, जबकि कुछ इलाकों में कटाई की तैयारी शुरू हो जाती है।
बारिश की स्थिति में खेतों में पानी रुकने से जड़ क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी और फसल गिरने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। दूसरी तरफ पर्याप्त अंतराल के बाद होने वाली हल्की बारिश कुछ फसलों के लिए उपयोगी भी हो सकती है। इसलिए प्रभाव पूरी तरह फसल, मिट्टी और स्थानीय वर्षा पर निर्भर करता है।
किसानों को कटाई, सिंचाई, उर्वरक या कीटनाशक के छिड़काव जैसे काम स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखकर तय करने चाहिए।
अक्टूबर की शुरुआत में क्या संकेत?
IMD के मौजूदा राज्यवार पूर्वानुमान से संकेत मिलता है कि उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मौसम की गतिविधि धीरे-धीरे कम हो सकती है, हालांकि पूर्वी और कुछ अन्य हिस्सों में बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता। मौसम प्रणालियों की दिशा बदलने के साथ स्थानीय पूर्वानुमान भी बदल सकता है।
इसलिए 29 सितंबर के मौसम को मानसून के अंतिम चरण में क्षेत्रीय बदलाव के रूप में देखना ज्यादा सही होगा, न कि पूरे देश में एक समान बारिश वाले दिन के तौर पर।



