Raipur Crime: 25 करोड़ की रंगदारी ने मचाई सनसनी, विदेशी नंबर से परिवार को हत्या की धमकी; शोएब ढेबर पर पहुंची पुलिस जांच
रायपुर: राजधानी रायपुर में 25 करोड़ रुपये की रंगदारी और परिवार के सदस्यों की हत्या की धमकी से जुड़े मामले में पुलिस की साइबर जांच ने एक स्थानीय आरोपी तक पहुंच बनाई है। तेलीबांधा थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में पुलिस ने शोएब ढेबर को गिरफ्तार कर पूछताछ की और उसके कब्जे से घटना से जुड़े पांच आईफोन जब्त किए। पुलिस के अनुसार इन मोबाइल की कुल कीमत करीब 5 लाख रुपये है।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि धमकी देने वाले ने सामान्य फोन कॉल के बजाय विदेशी मोबाइल नंबर से WhatsApp का इस्तेमाल किया और खुद को एक आपराधिक गिरोह से जुड़ा बताया। रकम नहीं देने पर शिकायतकर्ता आनंदमल कुकरेजा, उनके बेटे अजीत और परिवार के अन्य सदस्यों को जान से मारने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने इस मामले को केवल धमकी का मामला मानकर नहीं छोड़ा, बल्कि डिजिटल माध्यम से भेजे गए संदेशों, वीडियो और मोबाइल नंबरों की तकनीकी कड़ियों को खंगालना शुरू किया।
विदेशी नंबर ने बढ़ाई जांच की चुनौती
शिकायत के मुताबिक 14 सितंबर 2026 को आनंदमल कुकरेजा के मोबाइल पर विदेशी नंबर से WhatsApp संदेश पहुंचे। संदेश में 25 करोड़ रुपये की मांग की गई और भुगतान नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
धमकी देने वाले ने खुद को अमन साहू गैंग से संबंधित बताया था। हालांकि, अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में इसी मामले में दूसरे गैंग का नाम भी सामने आया है। इसलिए अभी किसी वास्तविक गैंग की प्रत्यक्ष संलिप्तता को अंतिम रूप से स्थापित मानना उचित नहीं होगा। जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि धमकी देने वाले ने वास्तव में किसके निर्देश पर काम किया और इस्तेमाल किए गए गैंग के नाम का उद्देश्य क्या था।
पुलिस ने कैसे जोड़ी डिजिटल कड़ियां?
मामले में पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग वही डिजिटल सामग्री बनी, जो धमकी के दौरान इस्तेमाल हुई थी। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा तेलीबांधा थाना पुलिस ने विदेशी नंबर, WhatsApp संदेश, वीडियो, मोबाइल नंबरों और उनसे जुड़े तकनीकी इनपुट का विश्लेषण किया।
पुलिस के मुताबिक अलग-अलग मोबाइल कनेक्शनों और संपर्कों की कड़ियां जोड़ने के बाद जांच शोएब ढेबर तक पहुंची। इसके बाद पूछताछ की गई और पुलिस ने उसकी भूमिका का पता लगाने के लिए डिजिटल उपकरणों की जांच की। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपी ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की।
हालांकि, किसी आरोपी से पूछताछ के दौरान कथित स्वीकारोक्ति अपने आप में अदालत में अंतिम दोषसिद्धि नहीं होती। मामले में डिजिटल साक्ष्य, तकनीकी रिकॉर्ड और अन्य जांच सामग्री की कानूनी जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
पांच आईफोन जब्त, अब डेटा की होगी जांच
पुलिस ने शोएब ढेबर के कब्जे से पांच आईफोन जब्त किए हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 5 लाख रुपये बताई गई है। इन उपकरणों की जांच से पुलिस को WhatsApp संचार, इंटरनेट कनेक्शन, संपर्कों और संभावित अन्य डिजिटल गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
साइबर अपराध की जांच में यही हिस्सा सबसे अहम होता है। अपराधी विदेशी नंबर या इंटरनेट कॉल का इस्तेमाल करके अपनी वास्तविक पहचान छिपाने की कोशिश कर सकता है, लेकिन डिवाइस, नेटवर्क, अकाउंट, संपर्क और भुगतान से जुड़े डिजिटल निशान जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सुराग बन सकते हैं।
क्या अकेला आरोपी है या पीछे पूरा नेटवर्क?
अब जांच का अगला चरण इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 25 करोड़ रुपये की मांग के पीछे केवल एक व्यक्ति था या उसके साथ दूसरे लोग भी जुड़े थे।
जांच में यह भी देखा जाना स्वाभाविक है कि विदेशी नंबर की व्यवस्था कैसे हुई, WhatsApp अकाउंट किस तरह इस्तेमाल किया गया, धमकी भेजने के लिए कौन से डिवाइस या इंटरनेट कनेक्शन इस्तेमाल हुए और कथित गैंग के नाम का चयन किस आधार पर किया गया।
कुछ रिपोर्टों में इसी घटनाक्रम से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ और पहले सामने आए दूसरे रंगदारी मामलों के संभावित कनेक्शन की जांच का भी उल्लेख है। हालांकि इन कड़ियों को अभी जांच का हिस्सा माना जाना चाहिए, स्थापित तथ्य नहीं।
इस मामले का बड़ा संकेत क्या है?
रायपुर का यह मामला बताता है कि रंगदारी और धमकी के लिए अपराधी अब केवल पारंपरिक फोन कॉल पर निर्भर नहीं हैं। विदेशी नंबर, इंटरनेट कॉल, WhatsApp और दूसरे डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से जांच को जटिल बनाने की कोशिश की जा सकती है।
दूसरी तरफ पुलिस की तकनीकी जांच भी उसी तेजी से विकसित हो रही है। इस मामले में भी शुरुआती धमकी से लेकर आरोपी की पहचान तक पहुंचने में डिजिटल साक्ष्यों की अहम भूमिका बताई गई है।
ऐसे मामलों में पीड़ितों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि धमकी मिलने के बाद संदेश या नंबर को तुरंत डिलीट करने के बजाय उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए और पुलिस को उपलब्ध कराया जाए। स्क्रीनशॉट, चैट, वीडियो, कॉल डिटेल और संबंधित डिवाइस जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
आगे जांच से खुल सकते हैं कई राज
शोएब ढेबर की गिरफ्तारी के बाद मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि 25 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम की मांग के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
उपलब्ध बाद की रिपोर्टों में शोएब ढेबर को अदालत से जमानत मिलने की जानकारी भी सामने आई है। जमानत मिलना मामले में आरोपों का अंतिम निपटारा नहीं है; जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है।



