सरगुजा से रणजी टीम में राहुल प्रधान की एंट्री, 10 साल बाद फिर चमका क्रिकेट
अंबिकापुर: सरगुजा के क्रिकेट के लिए 2026 का साल एक खास उपलब्धि लेकर आया है। सीतापुर विकासखंड के छोटे से गांव चलता के विकेटकीपर-बल्लेबाज राहुल प्रधान ने छत्तीसगढ़ की सीनियर रणजी टीम में जगह बनाकर यह साबित किया है कि बड़े क्रिकेट मंच तक पहुंचने के लिए बड़े शहर से होना जरूरी नहीं है। करीब एक दशक बाद सरगुजा से किसी खिलाड़ी का रणजी स्तर तक पहुंचना जिले के युवा क्रिकेटरों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
गांव की पिच से रणजी टीम तक पहुंचा नाम
राहुल प्रधान का क्रिकेट सफर किसी बड़े क्रिकेट सेंटर की चमक-दमक से नहीं, बल्कि ग्रामीण माहौल से शुरू हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनके गांव में अभ्यास के लिए पिच और नेट की व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर की गई थी। लगातार अभ्यास और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन करते हुए राहुल ने अपनी पहचान बनाई।
विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर उनकी दोहरी भूमिका इस चयन की अहम वजहों में मानी जा रही है। आधुनिक क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ियों की उपयोगिता अधिक होती है जो विकेट के पीछे जिम्मेदारी संभालने के साथ बल्लेबाजी में भी टीम को मजबूती दे सकें। राहुल ने स्थानीय और क्षेत्रीय क्रिकेट में इसी संयोजन के जरिए चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।
छत्तीसगढ़ प्रीमियर लीग में खेलने का अवसर भी उनके सफर में महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। वहां प्रदर्शन के बाद उनका मुकाबला अपेक्षाकृत बड़े स्तर के खिलाड़ियों से हुआ और अपनी क्षमता दिखाने का मंच मिला। इसके बाद रणजी टीम तक पहुंचना उनके लिए घरेलू क्रिकेट के अगले बड़े चरण की शुरुआत है।
10 साल बाद दोबारा सरगुजा की मौजूदगी
राहुल का चयन इसलिए भी खास है क्योंकि सरगुजा से इससे पहले आशुतोष सिंह छत्तीसगढ़ की रणजी टीम में पहुंचे थे। आशुतोष ने 6 अक्टूबर 2016 को त्रिपुरा के खिलाफ छत्तीसगढ़ के रणजी पदार्पण मुकाबले में प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत की और 140 रन की पारी खेली। वह छत्तीसगढ़ के लिए रणजी क्रिकेट में शतक बनाने वाले शुरुआती ऐतिहासिक खिलाड़ियों में शामिल रहे।
इसके बाद 2017-18 रणजी सत्र में भी आशुतोष छत्तीसगढ़ के प्रमुख रन बनाने वाले बल्लेबाजों में रहे। उनके प्रदर्शन ने यह दिखाया था कि सरगुजा की प्रतिभा राज्य के सर्वोच्च घरेलू क्रिकेट स्तर तक पहुंच सकती है। राहुल प्रधान का चयन उसी संभावना को करीब दस साल बाद एक नई दिशा देता है।
राहुल का चयन सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं
सरगुजा जैसे क्षेत्र में किसी युवा खिलाड़ी का रणजी टीम तक पहुंचना केवल व्यक्तिगत सफलता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका असर उन बच्चों पर भी पड़ता है जो स्थानीय मैदानों पर क्रिकेट सीख रहे हैं और राज्य या राष्ट्रीय स्तर तक जाने का सपना देखते हैं।
राहुल की कहानी यह भी बताती है कि प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए केवल खिलाड़ी की मेहनत पर्याप्त नहीं होती। नियमित कोचिंग, बेहतर पिच, फिटनेस सुविधाएं, प्रतियोगिताओं में लगातार अवसर और प्रदर्शन की निष्पक्ष पहचान—ये सभी किसी ग्रामीण प्रतिभा को अगले स्तर तक पहुंचाने में भूमिका निभाते हैं।
हाल के वर्षों में सरगुजा के युवा क्रिकेटरों की अलग-अलग आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में मौजूदगी भी इस बात की ओर संकेत करती है कि जिले में प्रतिभा का आधार तैयार हो रहा है। ऐसे में राहुल का रणजी चयन आने वाले खिलाड़ियों के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण बन सकता है कि जिला और क्षेत्रीय क्रिकेट से आगे बढ़ने का रास्ता मौजूद है।
अब राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस मौके को लगातार प्रदर्शन में बदलने की होगी। रणजी क्रिकेट में जगह मिलना मंजिल नहीं, बल्कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लंबे सफर की शुरुआत है। यदि वह अपनी विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी दोनों में निरंतरता बनाए रखते हैं, तो यह चयन उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।



