मौसम बदलते ही बढ़ने लगे अस्थमा के लक्षण? थाली में शामिल करें ये चीजें, इनसे बनाएं दूरी
हेल्थ डेस्क। मौसम में बदलाव के साथ कुछ अस्थमा मरीजों को खांसी, सीने में जकड़न, सांस फूलने या घरघराहट जैसी परेशानियां ज्यादा महसूस हो सकती हैं। इसकी वजह हर व्यक्ति में अलग हो सकती है, लेकिन धूल, धुआं, वायु प्रदूषण, परागकण और वायरल संक्रमण जैसे कारक अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। ऐसे समय में केवल ट्रिगर से बचना ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के खान-पान पर ध्यान देना भी उपयोगी हो सकता है।
हालांकि एक बात स्पष्ट है—डाइट अस्थमा की दवा या इनहेलर का विकल्प नहीं है। Global Initiative for Asthma (GINA) के 2026 दिशानिर्देश भी स्वस्थ आहार को समग्र स्वास्थ्य और अस्थमा नियंत्रण के एक हिस्से के रूप में देखते हैं, न कि दवा के स्थान पर।
अस्थमा में कैसी डाइट मददगार हो सकती है?
अस्थमा मरीजों के लिए किसी एक ‘चमत्कारी’ खाद्य पदार्थ की बजाय पूरी डाइट का संतुलित होना ज्यादा महत्वपूर्ण है। ताजे फल-सब्जियों, फाइबर और पौष्टिक प्रोटीन से भरपूर भोजन शरीर को जरूरी पोषक तत्व देता है।
GINA के अनुसार, अधिक मात्रा में ताजे फल और सब्जियां खाने को बेहतर अस्थमा नियंत्रण तथा कम exacerbation risk से जोड़ने वाले कुछ प्रमाण उपलब्ध हैं।
इसलिए मौसम बदलने पर खाने की थाली में इन चीजों को जगह देना व्यावहारिक कदम हो सकता है।
फल और हरी सब्जियां बनाएं रोज के भोजन का हिस्सा
सेब, संतरा, केला, पपीता और अन्य मौसमी फल विटामिन, फाइबर और दूसरे पोषक तत्वों के स्रोत हैं। इसी तरह पालक, गाजर, टमाटर, ब्रोकली और अन्य सब्जियों को भोजन में शामिल किया जा सकता है।
विशेषज्ञ संस्थानों की डाइट संबंधी सलाह में भी फल-सब्जियों की पर्याप्त मात्रा पर जोर दिया गया है। Cambridge University Hospitals के अनुसार, फल-सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार अस्थमा प्रबंधन के लिए उपयोगी हो सकता है।
यहां जोर किसी एक फल या सब्जी पर नहीं, बल्कि विविधता पर होना चाहिए। अलग-अलग रंग और प्रकार की सब्जियां तथा फल भोजन में शामिल करने से पोषण की विविधता बढ़ती है।
दाल, चना और बीन्स से मिलेगा फाइबर
दालें, चना, राजमा, मटर और दूसरी pulses फाइबर के साथ-साथ प्रोटीन, विटामिन और खनिज प्रदान करती हैं। फाइबर वाली डाइट को बेहतर अस्थमा नियंत्रण से जोड़ने वाले प्रमाण भी उपलब्ध हैं।
भारतीय भोजन में इन्हें शामिल करना भी आसान है। दाल को नियमित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है, जबकि चना या अन्य बीन्स को सलाद, सब्जी या अन्य व्यंजनों के रूप में लिया जा सकता है।
बादाम, अखरोट और बीज भी विकल्प
बादाम, अखरोट और विभिन्न बीज पौष्टिक वसा, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों के स्रोत हैं। इन्हें सीमित मात्रा में संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
अगर कोई व्यक्ति मछली खाता है तो सैल्मन, सार्डिन या मैकेरल जैसी oily fish से omega-3 fatty acids मिलते हैं। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—मछली खाना और fish-oil supplement लेना एक ही बात नहीं है। अस्थमा के इलाज के लिए किसी खास nutritional supplement की नियमित सलाह देने के लिए पर्याप्त मजबूत प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना fish-oil या अन्य सप्लीमेंट शुरू करना जरूरी नहीं है।
किन चीजों को कम करना बेहतर है?
स्वस्थ डाइट का मतलब केवल कुछ चीजें जोड़ना नहीं, बल्कि अत्यधिक processed और calorie-dense foods को सीमित करना भी है।
फास्ट फूड, अत्यधिक तला हुआ भोजन, बहुत अधिक मीठे पेय, processed meat और saturated fat वाली चीजों का नियमित और ज्यादा सेवन कम करना बेहतर है। विशेषज्ञ आहार संबंधी सलाह भी फल-सब्जियों और फाइबर बढ़ाने के साथ ऐसे खाद्य पदार्थों को सीमित करने पर जोर देती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि अस्थमा मरीज को हर तरह का पसंदीदा भोजन पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। लक्ष्य ऐसी नियमित भोजन शैली बनाना है जिसमें पौष्टिक और कम-processed foods की हिस्सेदारी ज्यादा हो।
मौसम बदलने पर सिर्फ डाइट नहीं, इन बातों का भी रखें ध्यान
अस्थमा नियंत्रण में भोजन के साथ ट्रिगर से बचाव और डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार का पालन ज्यादा महत्वपूर्ण है। वायु प्रदूषण, धुआं, परागकण, धूल और कुछ संक्रमण लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। NHS भी अस्थमा मरीजों को अपने ज्ञात ट्रिगर्स से बचने और निर्धारित इनहेलर का सही तरीके से इस्तेमाल करने की सलाह देता है।
इनहेलर हमेशा साथ रखना और डॉक्टर द्वारा बताए गए तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है। अगर मौसम बदलते ही इनहेलर की जरूरत सामान्य से ज्यादा पड़ने लगे या लक्षण बार-बार लौटने लगें, तो डॉक्टर से उपचार की समीक्षा करानी चाहिए।
सांस ज्यादा फूल रही हो तो डाइट के भरोसे न रहें
लगातार खांसी, घरघराहट, सीने में ज्यादा जकड़न या सांस लेने में बढ़ती परेशानी को केवल मौसम या खान-पान से जोड़कर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अस्थमा अटैक गंभीर हो सकता है और ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अपने डॉक्टर द्वारा दिए गए asthma action plan का पालन करना चाहिए। गंभीर या तेजी से बिगड़ते लक्षणों में तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।



