एशियन गेम्स 2026 में मेडल से चूकीं मनु भाकर, दिवंगत कोच को याद कर हुईं भावुक; बोलीं- आगे और बेहतर करूंगी
नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में भारत की स्टार शूटर मनु भाकर 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल में पदक हासिल नहीं कर सकीं। वह पांचवें स्थान पर रहीं। नतीजा उनके लिए निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन प्रतियोगिता के बाद उनकी प्रतिक्रिया में हार से ज्यादा एक ऐसे कोच की याद दिखाई दी, जिसका उनके करियर पर गहरा प्रभाव रहा है।
जून में अपने शुरुआती दौर के महत्वपूर्ण कोच समरेश जंग को खोने के बाद यह पहला बड़ा मल्टी-स्पोर्ट इवेंट था, जिसमें मनु भाकर ने हिस्सा लिया। ऐसे में जब उनसे जंग की सीख और उनके प्रभाव के बारे में सवाल पूछा गया तो वह भावुक हो गईं।
मनु ने बताया कि किसी करीबी व्यक्ति की याद किसी एक मौके तक सीमित नहीं रहती। उनके मुताबिक, जब कोई व्यक्ति जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाता है तो उसकी दी हुई सीख और यादें लंबे समय तक साथ रहती हैं।
मेडल नहीं मिला, लेकिन प्रक्रिया पर भरोसा कायम रहा
शूटिंग जैसे खेल में एक छोटे से अंतर का असर पूरे फाइनल के नतीजे पर पड़ सकता है। मनु भाकर के लिए भी फाइनल का आठवां शॉट निर्णायक क्षणों में से एक रहा, जिसमें उन्होंने 8.9 का स्कोर बनाया। बाद में जब उनसे पूछा गया कि क्या इस शॉट ने पदक की संभावना को प्रभावित किया, तो उन्होंने माना कि इससे उनके अवसर निश्चित रूप से कम हुए।
लेकिन उनका पूरा आकलन सिर्फ इस एक शॉट से नहीं किया जा सकता। मनु ने बताया कि प्रतियोगिता से पहले ट्रेनिंग के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। प्री-ट्रेनिंग सेशन उनके लिए अच्छा नहीं रहा और साइटर्स को ठीक से देखने में भी परेशानी हुई।
ऐसी स्थिति में उनका ध्यान परिणाम पर टिकने के बजाय अपनी शूटिंग प्रक्रिया को दोहराने पर रहा। यही वह जगह है जहां उनके दिवंगत कोच समरेश जंग की सीख सामने आती है।
जंग उन्हें लगातार यह समझाते थे कि शूटिंग में किसी एक नतीजे के पीछे भागने के बजाय हर शॉट की प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। मनु ने बताया कि उन्होंने क्वालिफिकेशन और फाइनल दोनों में इसी सोच को अपनाने की कोशिश की।
समरेश जंग की सीख ने कठिन समय में संभाला
मनु भाकर के करियर में समरेश जंग का नाम विशेष महत्व रखता है। जंग खुद एशियाई खेलों के अनुभवी निशानेबाज रहे थे और उन्होंने अलग-अलग एशियन गेम्स में आठ पदक जीते थे, जिनमें चार स्वर्ण पदक शामिल थे।
2006 दोहा एशियन गेम्स में उनका प्रदर्शन विशेष रूप से याद किया जाता है। बीमारी और तेज बुखार के बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। उनके खेल करियर की यही मानसिक मजबूती बाद में कोच के रूप में भी उनकी सोच का हिस्सा बनी।
मनु के लिए जंग सिर्फ तकनीकी सलाह देने वाले कोच नहीं थे। उनके करियर के शुरुआती वर्षों में मिली ट्रेनिंग और मानसिक तैयारी ने उनकी शूटिंग यात्रा को प्रभावित किया। यही वजह है कि एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर मेडल से चूकने के बाद भी उनकी बातचीत बार-बार उसी सीख पर लौटती रही।
मनु ने कहा कि वह जापान में खेलने को लेकर काफी उत्साहित थीं और चाहती थीं कि जंग के साथ वहां की यात्रा का अनुभव साझा करें। परिस्थितियां अलग रहीं, लेकिन उनकी दी हुई सीख प्रतियोगिता के दौरान उनके साथ रही।
पांचवां स्थान भविष्य के लिए क्या संकेत देता है?
10 मीटर एयर पिस्टल में पांचवें स्थान पर रहना मनु के लिए व्यक्तिगत पदक के लिहाज से अपेक्षित परिणाम नहीं रहा। लेकिन प्रतियोगिता के प्रदर्शन को केवल पोडियम या गैर-पोडियम के आधार पर देखना शूटिंग जैसे खेल की वास्तविक जटिलता को छोटा कर देता है।
मनु ने खुद बताया कि जापान में ट्रेनिंग के दौरान जिन चुनौतियों का सामना उन्होंने किया, उनके मुकाबले प्रतियोगिता में उनका प्रदर्शन बेहतर रहा। उन्होंने भोपाल में किए गए सिमुलेटेड फाइनल और एशियन गेम्स के फाइनल की तुलना करते हुए भी अपने प्रदर्शन में सुधार महसूस किया।
यानी उनके लिए इस प्रतियोगिता से एक महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत यह है कि कठिन तैयारी के बावजूद वह दबाव वाले मुकाबले में अपनी प्रक्रिया को काफी हद तक कायम रख सकीं।
आगे की तैयारी में मानसिक पक्ष अहम होगा
एलीट शूटिंग में तकनीकी क्षमता के साथ मानसिक स्थिरता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। फाइनल में एक खराब शॉट के बाद अगली कोशिश में नियंत्रण बनाए रखना उतना ही जरूरी है जितना निशाना लगाने की तकनीक।
मनु भाकर की मौजूदा स्थिति में यही पहलू आगे की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। उनके सामने अब केवल तकनीकी सुधार की चुनौती नहीं होगी, बल्कि अलग परिस्थितियों में अपनी प्रक्रिया को लगातार दोहराने की चुनौती भी रहेगी।
मनु ने अपनी प्रतिक्रिया में भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि वह आगे और बेहतर कर सकती हैं और लगातार सुधार जारी रख सकती हैं। उन्होंने अपनी कोच जेलेना को भी कठिन परिस्थितियों में मेहनत और धैर्य के लिए श्रेय दिया।



