रायपुर में अब रजिस्ट्री के लिए नहीं लगानी पड़ेगी लंबी कतार! 5 नए केंद्र खुलेंगे, 14 जगहों पर मिलेगी सुविधा
रायपुर, 24 सितंबर 2026। राजधानी रायपुर में जमीन, मकान और प्लॉट की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए आने वाले महीनों में व्यवस्था काफी आसान हो सकती है। शहर में बढ़ते संपत्ति लेनदेन और मौजूदा रजिस्ट्री कार्यालयों पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए प्रशासन पांच नए उपपंजीयक कार्यालय खोलने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए उपयुक्त भवनों की तलाश शुरू कर दी गई है।
नए केंद्र शुरू होने के बाद रायपुर में अलग-अलग स्थानों पर कुल 14 जगहों से संपत्ति पंजीयन की सुविधा उपलब्ध होने की योजना है। खास बात यह है कि नए कार्यालय केवल अतिरिक्त काउंटर के रूप में नहीं होंगे, बल्कि इन्हें आधुनिक डिजिटल सुविधाओं के अनुरूप विकसित करने की तैयारी है।
शहर बढ़ा, लेकिन रजिस्ट्री की सुविधा उतनी तेजी से नहीं बढ़ी
रायपुर का शहरी क्षेत्र लगातार फैल रहा है। आउटर इलाकों में नई कॉलोनियां, आवासीय प्रोजेक्ट और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने के साथ जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े काम भी अलग-अलग क्षेत्रों में फैल गए हैं।
ऐसे में शहर के कुछ चुनिंदा रजिस्ट्री कार्यालयों पर निर्भरता लोगों के लिए समय और आवाजाही दोनों बढ़ाती है। विभागीय जानकारी के मुताबिक पहले रायपुर के प्रमुख पंजीयन कार्यालय में एक दिन में 400 से ज्यादा रजिस्ट्री होने की स्थिति रही है। वर्तमान में औसतन करीब 150 रजिस्ट्री प्रतिदिन होने की जानकारी दी गई है।
इसी दबाव को कम करने के लिए पंजीयन व्यवस्था को अलग-अलग क्षेत्रों तक ले जाने की कवायद की जा रही है।
आउटर क्षेत्रों में खुलेंगे नए केंद्र
नए कार्यालयों के लिए जिन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, उनमें टाटीबंध-हीरापुर, अमलीडीह-अवंति विहार और बीरगांव-सिलतरा जैसे इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कार्यालय खुलने का सबसे सीधा फायदा उन लोगों को होगा, जिन्हें वर्तमान में संपत्ति पंजीयन के लिए शहर के दूसरे हिस्सों तक जाना पड़ता है।
रजिस्ट्री जैसी प्रक्रिया में केवल सरकारी शुल्क ही खर्च नहीं होता। लोगों को आने-जाने, दस्तावेजों की तैयारी, समय और कई बार काम से छुट्टी लेने की भी जरूरत पड़ती है। नजदीकी पंजीयन केंद्र इस अतिरिक्त बोझ को कम कर सकते हैं।
कलेक्टोरेट की नई बिल्डिंग से भी बढ़ेगी क्षमता
रायपुर कलेक्टोरेट परिसर में तैयार की जा रही नई पांच मंजिला पंजीयन बिल्डिंग भी इस विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। विभागीय जानकारी के अनुसार यहां पंजीयक के साथ 8 उपपंजीयकों के बैठने की व्यवस्था होगी।
वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यालयों की संख्या बढ़ाने के साथ यदि कर्मचारियों और तकनीकी संसाधनों की क्षमता भी बढ़ती है, तो इसका असर केवल भीड़ कम होने तक सीमित नहीं रहेगा। दस्तावेजों की जांच, पंजीयन प्रक्रिया और नागरिकों के लिए उपलब्ध सेवाओं को अधिक व्यवस्थित करने में भी मदद मिल सकती है।
डिजिटल सुविधा बढ़ने से क्या बदलेगा?
संपत्ति पंजीयन अब केवल कागजी प्रक्रिया नहीं रह गया है। दस्तावेजों की ऑनलाइन तैयारी, डिजिटल रिकॉर्ड, अपॉइंटमेंट और डेटा आधारित निगरानी जैसी व्यवस्थाएं पंजीयन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद करती हैं।
हालांकि केवल नए कार्यालय खोलना पर्याप्त नहीं होगा। इन केंद्रों में प्रशिक्षित स्टाफ, पर्याप्त तकनीकी संसाधन, सर्वर कनेक्टिविटी और दस्तावेजों की जांच की मजबूत व्यवस्था भी जरूरी होगी। यदि ये सभी व्यवस्थाएं साथ चलती हैं, तो छोटे और मध्यम संपत्ति लेनदेन करने वाले नागरिकों के लिए प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है।
जमीन-जायदाद के कारोबार पर भी पड़ सकता है असर
रजिस्ट्री सुविधा का विकेंद्रीकरण रायपुर के तेजी से विकसित हो रहे बाहरी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। टाटीबंध, हीरापुर, अमलीडीह, अवंति विहार, बीरगांव और सिलतरा जैसे क्षेत्रों में आबादी और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के साथ संपत्ति से जुड़े सरकारी कामों की मांग भी बढ़ती है।
भविष्य में शहर का विस्तार और तेज होता है तो पंजीयन कार्यालयों का स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होना प्रशासनिक ढांचे को भीड़ के बजाय मांग के हिसाब से विकसित करने में मदद कर सकता है।



