बची हुई चना दाल से बनाएं खस्ता कचौड़ी, जानिए ऐसा तरीका जिससे भरावन नहीं होगी गीली
रात के खाने में दाल बच जाना भारतीय घरों में कोई नई बात नहीं है। अक्सर बची हुई दाल अगले दिन दोबारा गर्म करके खा ली जाती है या फिर फ्रिज में रख दी जाती है। लेकिन अगर आप थोड़ी अलग और स्वादिष्ट चीज बनाना चाहते हैं, तो यही बची हुई चना दाल सुबह की गरमा-गरम खस्ता कचौड़ी का शानदार भरावन बन सकती है।
इस रेसिपी की खासियत सिर्फ यह नहीं कि इसमें बची हुई दाल का इस्तेमाल हो जाता है। चना दाल में मौजूद दानेदार टेक्सचर कचौड़ी की स्टफिंग को अच्छा स्वाद देता है, जबकि हींग, सौंफ, धनिया और अमचूर जैसे मसाले इसे पारंपरिक कचौड़ी जैसा चटपटा स्वाद देते हैं।
हालांकि एक बात सबसे महत्वपूर्ण है—स्टफिंग में नमी नहीं रहनी चाहिए। अगर दाल ज्यादा पतली है और उसे सीधे आटे में भर दिया जाए, तो कचौड़ी तलते समय फट सकती है या उसका बाहरी हिस्सा कुरकुरा नहीं बनेगा।
खस्ता कचौड़ी का राज है सही मोयन और सूखी स्टफिंग
कचौड़ी बनाने में दो चीजें टेक्सचर तय करती हैं—आटे में पर्याप्त मोयन और भरावन में नियंत्रित नमी।
आटे के लिए मैदा या गेहूं का आटा लिया जा सकता है। इसमें तेल या घी, अजवाइन और नमक मिलाकर पहले अच्छी तरह रगड़ें। आटा इतना तैयार होना चाहिए कि मुट्ठी में दबाने पर उसका आकार बना रहे। इसके बाद गुनगुने पानी से अपेक्षाकृत सख्त आटा गूंथें।
आटा तैयार होने के बाद उसे करीब 15 मिनट ढककर रखना उपयोगी रहेगा। इससे आटा थोड़ा सेट हो जाता है और कचौड़ी बेलते समय संभालना आसान होता है।
सामग्री
आटे के लिए:
- 2 कप मैदा या गेहूं का आटा
- 3 बड़े चम्मच तेल या घी
- ½ छोटा चम्मच अजवाइन
- स्वादानुसार नमक
- जरूरत के अनुसार गुनगुना पानी
चना दाल की स्टफिंग के लिए:
- 1 कप बची हुई गाढ़ी चना दाल
- 2 बड़े चम्मच बेसन
- 1 बड़ा चम्मच सौंफ, दरदरी कुटी हुई
- 1 छोटा चम्मच साबुत धनिया, दरदरा कुटा हुआ
- ½ छोटा चम्मच जीरा
- ¼ छोटा चम्मच हींग
- ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- ½ छोटा चम्मच अमचूर पाउडर
- ½ छोटा चम्मच गरम मसाला
- 1 बड़ा चम्मच तेल
- बारीक कटा हरा धनिया
स्टफिंग बनाने का सही तरीका
अगर रात की दाल पतली है, तो उसे सीधे मसालों के साथ मिलाने की गलती न करें। पहले कड़ाही में डालकर कुछ मिनट पकाएं, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए।
अब एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें। इसमें हींग, जीरा, सौंफ और दरदरा कुटा धनिया डालकर हल्का भूनें। मसालों को बहुत तेज आंच पर न पकाएं, वरना वे जल्दी जल सकते हैं और पूरी स्टफिंग का स्वाद कड़वा हो सकता है।
इसके बाद बेसन डालें और धीमी आंच पर लगभग 1-2 मिनट भूनें। बेसन का हल्का भुनना जरूरी है, क्योंकि इससे कच्ची महक निकल जाती है और भरावन को बांधने में भी मदद मिलती है।
अब इसमें बची हुई चना दाल डालें। लाल मिर्च, अमचूर, गरम मसाला और जरूरत के अनुसार नमक मिलाकर मिश्रण को धीमी आंच पर पकाएं।
स्टफिंग कब तैयार मानी जाएगी?
यह कचौड़ी की सफलता का सबसे अहम चरण है।
दाल को तब तक चलाते रहें जब तक मिश्रण गाढ़ा, सूखा और आसानी से दबाने योग्य न हो जाए। इसमें पानी या ढीली ग्रेवी जैसी नमी नहीं रहनी चाहिए। आखिर में हरा धनिया मिलाएं और स्टफिंग को पूरी तरह ठंडा होने दें।
गरम स्टफिंग को आटे में भरने से भी कचौड़ी संभालना मुश्किल हो सकता है, इसलिए इसे कमरे के तापमान तक ठंडा करना बेहतर है।
कचौड़ी भरते समय न करें यह गलती
आटे की छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें किनारों की तरफ थोड़ा पतला रखते हुए फैलाएं। बीच में करीब 1-2 चम्मच स्टफिंग रखें।
अब किनारों को उठाकर भरावन को पूरी तरह बंद करें और जोड़ को अच्छी तरह सील करें। इसके बाद हल्के हाथ से दबाकर कचौड़ी का आकार दें।
बहुत ज्यादा स्टफिंग भरने से कचौड़ी तलते समय फट सकती है। वहीं स्टफिंग को जोर से दबाकर भरने या कच्चे आटे को बहुत पतला बेलने से भी समस्या हो सकती है।
धीमी आंच पर तलना क्यों जरूरी है?
कचौड़ी को तेज गर्म तेल में डालने से उसका बाहरी हिस्सा जल्दी रंग पकड़ सकता है, जबकि अंदर की परतें ठीक से पक नहीं पातीं। खस्ता टेक्सचर के लिए तेल को मध्यम से धीमी आंच पर रखें और कचौड़ियों को धीरे-धीरे तलें।
कचौड़ियों को तेल में डालने के बाद तुरंत तेज आंच करने के बजाय धीरे-धीरे सुनहरा होने दें। दोनों तरफ अच्छी तरह रंग आने और सतह कुरकुरी होने पर उन्हें निकाल लें।
अगर तेल का तापमान बहुत कम होगा तो कचौड़ी जरूरत से ज्यादा तेल सोख सकती है। इसलिए यहां लक्ष्य बहुत तेज नहीं, बल्कि नियंत्रित गर्म तेल रखना है।
चाय से लेकर आलू की सब्जी तक, कई चीजों के साथ परोसें
गरमा-गरम चना दाल कचौड़ी को सुबह की चाय के साथ परोसा जा सकता है। इसके साथ हरी चटनी, मीठी इमली की चटनी या मसालेदार आलू की सब्जी स्वाद को और बेहतर बना सकती है।
इस रेसिपी की खासियत यह है कि इसमें बची हुई दाल को एक नए व्यंजन में बदला जा सकता है। यानी रात के खाने की बची सामग्री अगले दिन के नाश्ते की मुख्य सामग्री बन जाती है।
एक जरूरी बात: बची हुई दाल की सुरक्षा
बची हुई दाल का इस्तेमाल तभी करें जब उसे सही तरीके से रखा गया हो और वह खराब न हुई हो। अगर दाल लंबे समय तक कमरे के तापमान पर पड़ी रही हो, उसमें असामान्य गंध, स्वाद या बनावट दिखाई दे रही हो, तो उसे इस्तेमाल न करें।



