छत्तीसगढ़ में 6 शहरों में बन रहे 338 MLD STP, ट्रीटेड पानी के उपयोग की तैयारी शुरू
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरों में सीवेज से निकलने वाले पानी को केवल साफ कर बहा देने के बजाय उसका दोबारा इस्तेमाल करने की दिशा में नगरीय प्रशासन विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। राज्य के छह नगर निगमों में निर्माणाधीन 338 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले उपचारित पानी के संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान अभी से की जा रही है।
राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) ने संबंधित नगर निगम आयुक्तों को निर्देश दिया है कि वे STP के आसपास 50 किलोमीटर के दायरे में मौजूद उद्योगों, थर्मल पावर प्लांट, रेलवे, सरकारी विभागों और अन्य संस्थानों से संपर्क कर पता लगाएं कि उन्हें कितने उपचारित पानी की आवश्यकता हो सकती है।
इस पहल का महत्व केवल सीवेज प्रबंधन तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध शहरों में पानी की बढ़ती मांग, औद्योगिक जल उपयोग और भविष्य में ताजे पानी पर दबाव कम करने से है।
छह शहरों में 338 एमएलडी की नई क्षमता
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और अमृत 2.0 के तहत छह नगर निगमों में अलग-अलग क्षमता के STP बनाए जा रहे हैं। इनमें:
| नगर निगम | निर्माणाधीन STP क्षमता |
|---|---|
| बीरगांव | 55 MLD |
| भिलाई-चरौदा | 13 MLD |
| भिलाई | 150 MLD |
| दुर्ग | 47 MLD |
| अंबिकापुर | 32 MLD |
| राजनांदगांव | 41 MLD |
| कुल | 338 MLD |
यह क्षमता पूरी तरह उपलब्ध होने के बाद रोजाना बड़ी मात्रा में सीवेज के उपचार की व्यवस्था तैयार होगी। लेकिन किसी STP की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि वह कितने एमएलडी पानी को ट्रीट कर सकता है। उसके बाद तैयार होने वाले उपचारित पानी का सुरक्षित और आर्थिक उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
यही कारण है कि सरकार ने प्लांट शुरू होने से पहले ही संभावित खरीदारों और उपयोगकर्ताओं का डेटा जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है।
50 किलोमीटर के दायरे में तलाशे जाएंगे उपयोगकर्ता
SUDA के निर्देशों का एक प्रमुख हिस्सा STP के आसपास के क्षेत्र में पानी की संभावित मांग तलाशना है। नगर निगमों को 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले बड़े संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों से संपर्क करने को कहा गया है।
इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- थर्मल पावर प्लांट
- औद्योगिक इकाइयां
- रेलवे
- सरकारी विभाग
- अन्य बड़े संस्थान
इन संस्थानों से केवल संपर्क करने के बजाय उनकी वास्तविक जल आवश्यकता का आकलन करने पर जोर दिया गया है।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उपचारित पानी के पुन: उपयोग में सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती केवल पानी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उत्पादन स्थल से उपयोग स्थल तक नियमित आपूर्ति की व्यवस्था बनाना होती है।
यदि किसी उद्योग को प्रतिदिन निश्चित मात्रा में उपचारित पानी चाहिए और वह STP से उचित दूरी पर है, तो पाइपलाइन, भंडारण और गुणवत्ता संबंधी व्यवस्था के आधार पर दीर्घकालीन सप्लाई मॉडल तैयार किया जा सकता है।
338 एमएलडी पानी का मतलब क्या है?
MLD यानी Million Litres per Day। 1 MLD का अर्थ प्रतिदिन 10 लाख लीटर पानी होता है।
इस हिसाब से 338 MLD क्षमता का अर्थ है कि सभी प्लांट अपनी निर्धारित क्षमता पर काम करने लगें तो कुल 33.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन सीवेज के उपचार की क्षमता विकसित होगी।
हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि पूरा 338 MLD उपचारित पानी तुरंत किसी दूसरे उपयोग में पहुंच जाएगा। वास्तविक पुन: उपयोग STP के संचालन, उपचारित पानी की गुणवत्ता, मांग, पाइपलाइन नेटवर्क और संबंधित संस्थानों के साथ बने समझौतों पर निर्भर करेगा।
यही वजह है कि सरकार अभी से संभावित उपयोगकर्ताओं का आकलन कर रही है।
थर्मल पावर प्लांट के लिए उपचारित पानी क्यों महत्वपूर्ण है?
बिजली उत्पादन में पानी की जरूरत कई प्रक्रियाओं में होती है। विशेष रूप से थर्मल पावर प्लांटों में कूलिंग जैसी प्रक्रियाओं के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता हो सकती है।
ऐसे में जहां शहरी STP और थर्मल पावर प्लांट अपेक्षाकृत नजदीक हों, वहां उपचारित सीवेज का इस्तेमाल ताजे पानी के विकल्प के रूप में किया जा सकता है।
इसी दिशा में केंद्र की ऊर्जा नीति में भी STP से निकलने वाले उपचारित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। राज्य की मौजूदा पहल इसी व्यापक नीति ढांचे के अनुरूप दिखाई देती है।
इसका संभावित लाभ दो तरफ हो सकता है—एक ओर शहर के सीवेज का बेहतर प्रबंधन और दूसरी ओर उद्योग या बिजली संयंत्रों के लिए वैकल्पिक जल स्रोत।
एनजीटी के निर्देशों से भी जुड़ा है मामला
उपचारित सीवेज के पुन: उपयोग का मुद्दा पर्यावरणीय नियमन से भी जुड़ा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी उपचारित जल के पुन: उपयोग को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार का वर्तमान कदम इसी व्यापक पर्यावरणीय दृष्टिकोण को स्थानीय स्तर पर लागू करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
शहरी आबादी बढ़ने के साथ सीवेज की मात्रा भी बढ़ती है। यदि उपचारित पानी को बिना उपयोग के केवल नदियों या अन्य जल निकायों में छोड़ने की व्यवस्था पर निर्भर रहा जाए, तो पानी के पुनर्चक्रण की संभावनाएं सीमित रह जाती हैं।
इसके उलट, उपचारित जल का औद्योगिक या अन्य गैर-पेय उपयोग बढ़ाने से उपलब्ध ताजे पानी को अधिक महत्वपूर्ण घरेलू और पेयजल जरूरतों के लिए बचाया जा सकता है।
असली चुनौती STP बनने के बाद शुरू होगी
STP का निर्माण अपने आप में पूरी व्यवस्था का अंतिम चरण नहीं है। असली परीक्षा तब होगी जब प्लांट चालू होंगे और नियमित रूप से उपचारित पानी उपलब्ध होगा।
इसके लिए कम से कम चार चीजों का एक साथ काम करना जरूरी होगा:
पहला—गुणवत्ता। उपचारित पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए और जिस उपयोग के लिए भेजा जा रहा है, उसके अनुसार गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी।
दूसरा—पाइपलाइन नेटवर्क। प्लांट से उपयोगकर्ता तक पानी पहुंचाने के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा चाहिए।
तीसरा—नियमित मांग। उद्योग या संस्थान को लगातार पानी की जरूरत होनी चाहिए, ताकि STP से निकलने वाला उपचारित पानी व्यर्थ न जाए।
चौथा—आर्थिक मॉडल। पानी के उपचार, भंडारण, पंपिंग और परिवहन की लागत तथा उपयोगकर्ता से मिलने वाले राजस्व के बीच व्यावहारिक संतुलन बनाना होगा।
इसलिए अभी जुटाया जा रहा डेटा आगे की पूरी व्यवस्था के लिए आधार बन सकता है।
नगर निगमों को 15 दिन में देना होगा डेटा
SUDA ने संबंधित नगर निगमों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता से जुड़ी जानकारी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इसका उद्देश्य प्लांट शुरू होने के बाद उपयोगकर्ता तलाशने में समय बर्बाद करने के बजाय पहले से एक संभावित मांग सूची तैयार करना है।
यदि यह प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी होती है तो प्रत्येक STP के लिए यह स्पष्ट किया जा सकता है कि उसके आसपास कितनी संभावित मांग है, किस क्षेत्र में पानी की आवश्यकता है और भविष्य में किन संस्थानों के साथ पुन: उपयोग की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
शहरों के लिए बदल सकता है पानी प्रबंधन का तरीका
छत्तीसगढ़ के छह शहरों में बन रहे ये STP केवल सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाएं नहीं हैं। इनके जरिए शहरी जल प्रबंधन को ‘उपयोग करो और छोड़ दो’ मॉडल से ‘ट्रीट करो और दोबारा उपयोग करो’ मॉडल की ओर ले जाने की संभावना है।
खासकर औद्योगिक क्षेत्रों और बड़े संस्थानों के आसपास यदि उपचारित पानी की स्थायी मांग तैयार होती है, तो भविष्य में ताजे पानी पर दबाव कम करने में इसका योगदान हो सकता है।
हालांकि इसके वास्तविक परिणाम STP की क्षमता के साथ-साथ उपचारित पानी की गुणवत्ता, वितरण नेटवर्क और उपयोगकर्ताओं की भागीदारी पर निर्भर करेंगे।



