बच्चों को हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं: सुरक्षा के लिए सिखाएं ये 5 आसान तरीके
नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026। बच्चों को बचपन से सच बोलने, बड़ों का सम्मान करने और जरूरत पड़ने पर मदद करने की सीख दी जाती है। लेकिन सुरक्षा के मामले में एक और जरूरी बात उन्हें समझाना जरूरी है—हर व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी देना जरूरी नहीं है।
किसी अनजान व्यक्ति का घर में कौन है, बच्चा कहां रहता है, स्कूल कौन-सा है या माता-पिता कब वापस आएंगे जैसे सवाल पूछना हमेशा सामान्य बातचीत का हिस्सा नहीं होता। ऐसे समय में बच्चे को लंबी सफाई देने के बजाय बातचीत रोकने, सुरक्षित जगह पर जाने और भरोसेमंद वयस्क से संपर्क करने की आदत सिखाना ज्यादा उपयोगी है।
बाल-सुरक्षा विशेषज्ञ भी बच्चों को केवल “Stranger Danger” याद कराने के बजाय अलग-अलग परिस्थितियों में सुरक्षित प्रतिक्रिया का अभ्यास कराने की सलाह देते हैं। National Center for Missing & Exploited Children (NCMEC) के अनुसार बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि किसी के साथ कहीं जाने या कुछ स्वीकार करने से पहले माता-पिता या अभिभावक से अनुमति लें, असहज महसूस होने पर ‘नहीं’ कहें और घटना के बारे में किसी भरोसेमंद वयस्क को बताएं।
1. घर पर अकेले हों तो अपनी स्थिति न बताएं
अगर दरवाजे पर कोई अनजान व्यक्ति पूछता है कि घर में माता-पिता या कोई बड़ा है या नहीं, तो बच्चे को यह नहीं बताना चाहिए कि वह घर में अकेला है।
ऐसे में बच्चा कह सकता है:
“मम्मी-पापा अभी व्यस्त हैं, आप बाद में आइए।”
या
“मैं अभी दरवाजा नहीं खोल सकता।”
यहां उद्देश्य किसी व्यक्ति को धोखा देना नहीं, बल्कि बच्चे की लोकेशन और घर की स्थिति जैसी निजी जानकारी सुरक्षित रखना है। छोटे बच्चों को खास तौर पर यह समझाना चाहिए कि दरवाजा खोलना या किसी अनजान व्यक्ति को अंदर आने देना उनकी जिम्मेदारी नहीं है।
2. कोई साथ चलने या लिफ्ट देने को कहे तो पहले अनुमति लें
रास्ते में कोई व्यक्ति कार या बाइक से लिफ्ट देने की पेशकश करे, स्कूल से लेने आने की बात कहे या किसी जगह साथ चलने के लिए कहे तो बच्चे को तुरंत उसके साथ नहीं जाना चाहिए।
बच्चे के लिए आसान जवाब हो सकता है:
“मैं पहले अपने मम्मी-पापा से पूछूंगा।”
अगर वह व्यक्ति दबाव बनाए तो बच्चे को बहस करने की जरूरत नहीं है। उसे वहां से हटकर किसी भीड़ वाली सुरक्षित जगह, दुकान, स्कूल, पुलिसकर्मी या भरोसेमंद वयस्क के पास जाना चाहिए।
NCMEC के सुरक्षा दिशानिर्देश भी बच्चों को किसी के साथ कहीं जाने से पहले माता-पिता या अभिभावक से अनुमति लेने की आदत डालने पर जोर देते हैं।
3. चॉकलेट, खिलौना या दूसरी चीज के बदले अपनी सुरक्षा से समझौता न करें
बच्चों को आकर्षित करने के लिए कोई व्यक्ति चॉकलेट, खिलौना, पैसे या किसी दूसरी चीज की पेशकश कर सकता है। इसलिए बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि किसी चीज को स्वीकार करना उसकी मजबूरी नहीं है।
वह सीधे कह सकता है:
“नहीं, मुझे इसकी जरूरत नहीं है।”
इसके बाद वहां से हट जाना बेहतर है।
NCMEC के अनुसार बच्चों को अलग-अलग सुरक्षा परिस्थितियों का रोल-प्ले कराकर अभ्यास करवाना उपयोगी है। इसके सुरक्षा संसाधनों में बच्चों को ऑफर स्वीकार करने से पहले अनुमति लेने और असहज स्थिति में स्पष्ट रूप से ‘No’ कहने की ट्रेनिंग शामिल है।
4. कोई “सीक्रेट” रखने को कहे तो उसे घर में बताना जरूरी है
यह नियम बच्चों को सबसे स्पष्ट रूप से सिखाया जाना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति कहता है कि “यह बात किसी को मत बताना”, तो बच्चे को समझना चाहिए कि किसी व्यक्ति का दबाव उसकी सुरक्षा से बड़ा नहीं है।
ऐसी स्थिति में बच्चे को वहां से निकलने के लिए छोटा जवाब देना आना चाहिए:
“ठीक है, मैं बाद में बताऊंगा।”
लेकिन घर पहुंचने के बाद माता-पिता या किसी भरोसेमंद वयस्क को पूरी घटना बतानी चाहिए।
NCMEC बच्चों को विशेष रूप से यह बताने की सलाह देता है कि अगर कोई उन्हें कोई बात गुप्त रखने को कहता है, असहज महसूस कराता है या कहीं साथ चलने के लिए दबाव डालता है, तो बच्चे को तुरंत भरोसेमंद वयस्क को जानकारी देनी चाहिए।
यहां एक महत्वपूर्ण फर्क बच्चों को समझाना जरूरी है—सरप्राइज और खतरनाक सीक्रेट एक जैसे नहीं होते। जन्मदिन का उपहार कुछ समय तक छिपाना अलग बात है; लेकिन कोई व्यक्ति अगर डराकर, धमकाकर या असहज स्थिति पैदा करके कोई बात छिपाने को कह रहा है, तो उसे तुरंत बताना चाहिए।
5. घर, स्कूल और परिवार की निजी जानकारी साझा न करें
अगर कोई अनजान व्यक्ति पूछता है कि बच्चा किस स्कूल में पढ़ता है, घर कहां है, माता-पिता कब आते हैं या उसका फोन नंबर क्या है, तो बच्चे को जवाब देना जरूरी नहीं है।
वह कह सकता है:
“मुझे नहीं पता।”
या
“मैं यह जानकारी नहीं बता सकता।”
इसके बाद बच्चे को वहां से हट जाना चाहिए।
हालांकि, बच्चों को केवल “झूठ बोलो” कहना सही सुरक्षा शिक्षा नहीं है। बेहतर संदेश यह है कि उन्हें अपनी निजी जानकारी पर नियंत्रण रखने का अधिकार है। यही नियम ऑनलाइन दुनिया में भी लागू होता है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम और चैट में भी बच्चे को घर का पता, स्कूल, फोन नंबर, पासवर्ड या दूसरी निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। NCMEC के ऑनलाइन सुरक्षा संसाधन भी बच्चों को अत्यधिक निजी जानकारी साझा करने से बचने और भरोसेमंद वयस्क से बात करने की सलाह देते हैं।
सिर्फ अजनबी से सावधान करना काफी नहीं
बच्चों की सुरक्षा की बात करते समय सबसे आम सलाह होती है—“अजनबियों से बात मत करना।” लेकिन यह संदेश अधूरा हो सकता है।
बाल-सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को यह समझाना ज्यादा उपयोगी है कि व्यक्ति कैसा दिखता है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि वह क्या कर रहा है। NCMEC का KidSmartz कार्यक्रम भी “stranger danger” की जगह परिस्थितियों को पहचानने और प्रतिक्रिया देने पर जोर देता है। बच्चों को यह भी पता होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर पुलिस अधिकारी, दुकान के कर्मचारी या बच्चों के साथ मौजूद किसी भरोसेमंद परिवार से मदद मांगी जा सकती है।
यानी बच्चे को हर अनजान व्यक्ति से डराना लक्ष्य नहीं है। लक्ष्य यह है कि वह असुरक्षित स्थिति पहचान सके।
बच्चों को ये 4 बातें जरूर याद कराएं
माता-पिता बच्चों के साथ घर पर छोटी-छोटी परिस्थितियों का अभ्यास कर सकते हैं:
- पहले पूछो: कहीं जाने या किसी चीज को स्वीकार करने से पहले माता-पिता से पूछो।
- ‘नहीं’ कहना ठीक है: कोई व्यक्ति असहज करे तो स्पष्ट रूप से मना कर सकते हो।
- सुरक्षित जगह तलाशो: परेशानी में भीड़, दुकान, स्कूल या पुलिस जैसे सुरक्षित स्थान की ओर जाओ।
- बात जरूर बताओ: डर, धमकी, असहज स्पर्श, जबरदस्ती या कोई सीक्रेट रखने का दबाव हो तो भरोसेमंद वयस्क को बताओ।
डर नहीं, अभ्यास बच्चों को ज्यादा तैयार करता है
बच्चों को सुरक्षा सिखाने का सबसे अच्छा तरीका उन्हें हर समय डर में रखना नहीं है। घर में माता-पिता अलग-अलग परिस्थितियां बनाकर बच्चे से पूछ सकते हैं—“अगर कोई तुम्हें कार में बैठने के लिए कहे तो क्या करोगे?”, “अगर कोई तुम्हारा पता पूछे तो क्या कहोगे?” या “अगर कोई कहे कि यह बात मम्मी-पापा को मत बताना तो?”
फिर बच्चे से जवाब बोलवाएं और जरूरत के अनुसार सुधार करें।
NCMEC भी रोल-प्ले और नियमित बातचीत को बच्चों की सुरक्षा शिक्षा का हिस्सा मानता है। नियमित अभ्यास से बच्चे संकट की स्थिति में केवल माता-पिता की मदद का इंतजार करने के बजाय खुद सुरक्षित प्रतिक्रिया देने के लिए बेहतर तैयार हो सकते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चा यह महसूस करे कि मुसीबत में पड़ने पर उसे डांट नहीं पड़ेगी। अगर बच्चा किसी संदिग्ध घटना के बाद यह सोचता रहा कि “मम्मी-पापा नाराज होंगे”, तो वह जानकारी छिपा सकता है। इसलिए घर का माहौल ऐसा होना चाहिए जहां बच्चा छोटी से छोटी असहज घटना भी बिना डर बताए।



