Senior Citizen Savings Scheme: 30 लाख जमा करने पर सालाना ₹2.46 लाख ब्याज, जानें हर तिमाही कितनी मिलेगी रकम
नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026। रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि नौकरी की सैलरी बंद होने के बाद रोजमर्रा के खर्च कैसे चलते रहें और जमा पूंजी भी अनावश्यक जोखिम में न पड़े। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सरकार की Senior Citizens Savings Scheme (SCSS) वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण छोटी बचत योजना है।
SCSS में मौजूदा ब्याज दर 8.2 प्रतिशत सालाना है। योजना में एक खाते में अधिकतम 30 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं और ब्याज का भुगतान मासिक नहीं, बल्कि हर तिमाही किया जाता है। इसलिए 30 लाख रुपये पर बनने वाली रकम को “₹20,500 हर महीने” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है। यह केवल मासिक औसत के तौर पर निकाली गई राशि है।
30 लाख रुपये जमा करने पर कितना ब्याज?
अगर कोई पात्र निवेशक SCSS में 30 लाख रुपये जमा करता है और उस पर 8.2 प्रतिशत की दर लागू होती है, तो एक साल का साधारण हिसाब इस प्रकार बनेगा:
₹30,00,000 × 8.2% = ₹2,46,000 सालाना ब्याज
यानी चार तिमाहियों में बांटने पर लगभग ₹61,500 प्रति तिमाही ब्याज बनता है। इसका 12 महीनों के हिसाब से औसत करीब ₹20,500 प्रति माह बैठता है।
लेकिन यहां सबसे जरूरी बात भुगतान की है—निवेशक के खाते में हर महीने ₹20,500 नहीं आएंगे। ब्याज तिमाही आधार पर दिया जाता है। यानी नियमित आय की योजना बनाते समय ₹61,500 की तिमाही राशि को ध्यान में रखना चाहिए। इंडिया पोस्ट भी SCSS के ब्याज भुगतान को quarterly बताता है।
15 लाख रुपये लगाने पर कितनी आमदनी?
हर वरिष्ठ नागरिक के पास 30 लाख रुपये निवेश करने की क्षमता हो, यह जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए 15 लाख रुपये निवेश करने पर 8.2 प्रतिशत की दर से सालाना ब्याज करीब ₹1.23 लाख होगा।
इसका मतलब है कि लगभग ₹30,750 प्रति तिमाही ब्याज मिल सकता है। 12 महीनों में औसत निकालें तो यह करीब ₹10,250 प्रति माह के बराबर बैठता है।
इस तरह SCSS की उपयोगिता उन लोगों के लिए ज्यादा समझ में आती है जो रिटायरमेंट के बाद अपनी मूल पूंजी को अपेक्षाकृत सुरक्षित साधन में रखते हुए उससे नियमित ब्याज आय चाहते हैं।
पति-पत्नी दोनों निवेश करें तो तस्वीर कैसे बदलेगी?
पति और पत्नी, यदि दोनों योजना के लिए पात्र हैं, तो अपने-अपने नाम से खाते खोलकर निवेश कर सकते हैं। ऐसे में परिवार के स्तर पर कुल निवेश की क्षमता बढ़ सकती है।
उदाहरण के तौर पर यदि दोनों 30-30 लाख रुपये निवेश करते हैं, तो कुल राशि 60 लाख रुपये होगी। 8.2 प्रतिशत की दर पर इसका सालाना ब्याज लगभग ₹4.92 लाख बनता है।
चार तिमाहियों में यह करीब ₹1.23 लाख प्रति तिमाही बैठता है। सालभर का औसत निकालने पर रकम करीब ₹41,000 प्रति माह के बराबर आती है। लेकिन यहां भी वास्तविक भुगतान हर महीने नहीं, बल्कि तिमाही आधार पर होगा।
SCSS कितने साल के लिए होता है?
SCSS की मूल अवधि पांच साल है। पात्रता और लागू नियमों के अनुसार खाते को आगे बढ़ाने का विकल्प भी उपलब्ध है। योजना की ब्याज दर स्थायी रूप से 8.2 प्रतिशत पर लॉक मान लेना सही नहीं है; छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की सरकार समय-समय पर समीक्षा करती है। आर्थिक मामलों के विभाग की वेबसाइट पर छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों से संबंधित तिमाही समीक्षा और अधिसूचनाएं जारी की जाती हैं।
यानी कोई व्यक्ति आज योजना में निवेश करता है तो उसे निवेश की अवधि और आगे की दरों से जुड़े नियमों को समझकर ही रिटायरमेंट प्लान बनाना चाहिए।
कौन खोल सकता है SCSS खाता?
यह योजना मुख्य रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए है। कुछ परिस्थितियों में 55 से 60 वर्ष के बीच रिटायर हुए नागरिकों और कुछ सेवानिवृत्त रक्षा कर्मचारियों के लिए भी पात्रता के प्रावधान हैं। इंडिया पोस्ट के अनुसार योजना में अधिकतम जमा सीमा 30 लाख रुपये है।
इसलिए केवल उम्र पूरी होना ही पर्याप्त मानना ठीक नहीं है। निवेश से पहले अपनी पात्रता, सेवानिवृत्ति की स्थिति और खाते से जुड़े मौजूदा नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।
ब्याज पर टैक्स का भी रखना होगा हिसाब
SCSS से मिलने वाला ब्याज अपने आप टैक्स-फ्री नहीं हो जाता। निवेशक की कुल आय, लागू टैक्स व्यवस्था और उस समय प्रभावी आयकर नियमों के आधार पर ब्याज आय पर कर देयता बन सकती है।
यही वजह है कि सिर्फ 8.2 प्रतिशत ब्याज देखकर किसी योजना को अपनी पूरी रिटायरमेंट बचत के लिए चुन लेना उचित वित्तीय रणनीति नहीं होगी। निवेशक को यह भी देखना चाहिए कि उसके पास कितनी मासिक जरूरतें हैं, कितनी रकम आपातकाल के लिए अलग रखी गई है और ब्याज आय पर संभावित टैक्स कितना होगा।
सिर्फ ब्याज दर नहीं, कैश-फ्लो भी महत्वपूर्ण
SCSS की सबसे बड़ी व्यावहारिक उपयोगिता इसका तिमाही ब्याज भुगतान है। रिटायरमेंट के बाद जिन लोगों को पेंशन के अतिरिक्त निश्चित अंतराल पर आय की जरूरत होती है, उनके लिए ऐसा कैश-फ्लो उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, 30 लाख रुपये को पांच साल के लिए एक ही जगह रखने का अर्थ यह भी है कि निवेशक को अपनी तरलता (liquidity) की जरूरत पहले से समझनी होगी। अचानक बड़े मेडिकल खर्च, पारिवारिक जरूरत या अन्य आपात स्थिति के लिए पूरी बचत को SCSS में डाल देना उचित नहीं माना जा सकता। योजना में समय से पहले खाता बंद करने के भी नियम और कटौतियां हैं।



