पिंपल पैच सच में काम करता है? जानिए पिंपल पर लगाने से क्या होता
हेल्थ डेस्क। चेहरे पर अचानक निकला एक पिंपल अक्सर लोगों को उसे दबाने या बार-बार छूने के लिए मजबूर कर देता है। इसी समस्या के बीच पिंपल पैच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। छोटे-छोटे पारदर्शी या त्वचा के रंग वाले ये पैच कुछ ही घंटों में पिंपल को शांत दिखाने का दावा करते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि पिंपल पैच वास्तव में पिंपल को ठीक करता है या सिर्फ उसकी स्थिति को कुछ समय के लिए बेहतर दिखाता है?
पिंपल पैच आखिर काम कैसे करता है?
अधिकतर सामान्य पिंपल पैच हाइड्रोकॉलॉइड नाम की सामग्री से बने होते हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल मूल रूप से घावों की देखभाल में किया जाता रहा है।
जब इसे ऐसे पिंपल पर लगाया जाता है जिसमें सफेद या पीले रंग का सिर दिखाई दे रहा हो, तो पैच उस जगह से निकलने वाले तरल पदार्थ को सोखने में मदद करता है। इसी वजह से कुछ समय बाद पैच का रंग सफेद या धुंधला दिखाई देने लगता है।
इसका एक दूसरा फायदा भी है। पैच पिंपल को ढक देता है, जिससे व्यक्ति बार-बार उसे छूने, कुरेदने या दबाने से बच सकता है। यही आदत कई बार लालिमा और जलन को बढ़ा सकती है और पिंपल के बाद निशान का जोखिम भी बढ़ा सकती है।
हर पिंपल पर एक जैसा असर नहीं
यह समझना जरूरी है कि पिंपल पैच कोई ऐसा समाधान नहीं है जो हर तरह के पिंपल पर समान रूप से काम करे।
इनका फायदा आमतौर पर उन पिंपल पर ज्यादा दिखाई देता है जिनमें पहले से सफेद या पीला सिर बन चुका है। ऐसे मामलों में पैच सतह के करीब मौजूद तरल को सोख सकता है।
इसके उलट त्वचा के भीतर गहराई में बने दर्दनाक और सूजे हुए पिंपल पर इसका असर सीमित हो सकता है। ऐसे पिंपल में समस्या त्वचा की गहरी परतों में होती है, जहां केवल ऊपर से लगाया गया पैच पर्याप्त प्रभाव नहीं डाल पाता।
पैच का सफेद होना क्या बताता है?
सोशल मीडिया पर पिंपल पैच हटाते समय उसका सफेद दिखाई देना अक्सर लोगों को आकर्षित करता है। लेकिन इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि पैच ने त्वचा से पूरा पिंपल बाहर निकाल दिया।
दरअसल, हाइड्रोकॉलॉइड सामग्री नमी और तरल को सोखकर जेल जैसी संरचना बना सकती है। इसी वजह से इस्तेमाल के बाद पैच फूला हुआ या सफेद दिखाई देता है।
यानी यह बदलाव पैच के नमी सोखने की प्रक्रिया का संकेत है, न कि यह प्रमाण कि पिंपल पूरी तरह खत्म हो गया।
पिंपल पैच लगाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
अगर कोई व्यक्ति पिंपल पैच इस्तेमाल करता है, तो इसे साफ और पूरी तरह सूखी त्वचा पर लगाना बेहतर रहता है। पैच को पैकेजिंग पर दिए निर्देश के अनुसार कुछ घंटों या रातभर लगाया जा सकता है।
पैच गंदा, बहुत ज्यादा सूजा हुआ या ढीला हो जाए तो उसे बदल देना चाहिए। इस्तेमाल के बाद पुराने पैच को दोबारा लगाने के बजाय फेंक देना चाहिए।
सबसे जरूरी बात यह है कि पैच लगाने से पहले पिंपल को जोर से दबाने या फोड़ने की कोशिश न करें। पिंपल को कुरेदने से त्वचा में अतिरिक्त जलन और सूजन हो सकती है।
संवेदनशील त्वचा वालों को सावधानी जरूरी
हर व्यक्ति की त्वचा एक जैसी नहीं होती। कुछ लोगों को पैच के चिपकने वाले पदार्थ से लालिमा, खुजली या जलन हो सकती है। कुछ विशेष प्रकार के पैच में अतिरिक्त सक्रिय सामग्री भी होती है, जिससे संवेदनशील त्वचा पर परेशानी बढ़ सकती है।
अगर पैच लगाने के बाद तेज जलन, लगातार लालिमा या खुजली दिखाई दे, तो उसे हटा देना बेहतर है।
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खासकर जिन लोगों की त्वचा में सूजन या जलन के बाद आसानी से काले निशान पड़ते हैं, उन्हें नए उत्पाद को लेकर अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए।
पिंपल पैच को इलाज नहीं, एक सहायक विकल्प समझें
पिंपल पैच को लेकर उपलब्ध शुरुआती शोध उत्साहजनक जरूर है, लेकिन पिंपल और एक्ने के इलाज में इनके प्रभाव पर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं। कई अध्ययन छोटे स्तर के हैं और कुछ में उत्पाद निर्माता की फंडिंग भी रही है।
इसलिए पिंपल पैच को हर तरह के एक्ने का स्थायी इलाज मानना सही नहीं होगा। यह खासकर छोटे, सतह पर आए पिंपल को ढकने और उसे छूने से रोकने के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है।
अगर पिंपल बार-बार निकल रहे हैं, बहुत दर्दनाक हैं, गहरे हैं या ठीक होने के बाद लगातार निशान छोड़ रहे हैं, तो केवल पैच पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा उचित है।



