वरिष्ठ पत्रकार पायल मेहता का 46 वर्ष की उम्र में निधन, संसद की रिपोर्टिंग के लिए याद की जाएंगी
नई दिल्ली/मुंबई। भारतीय पत्रकारिता के लिए रविवार की सुबह एक दुखद खबर लेकर आई। वरिष्ठ पत्रकार पायल मेहता का 46 वर्ष की उम्र में मुंबई में अचानक निधन हो गया। बताया गया कि शनिवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और करीब रात 2 बजे उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज शुरू हो पाता, उससे पहले ही उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद पत्रकारिता जगत और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर है। मौत की चिकित्सकीय वजह की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पायल मेहता लंबे समय से संसद, केंद्र सरकार और राष्ट्रीय राजनीति को कवर कर रही थीं। मौजूदा समय में वह एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार संस्थान में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत थीं। उनके हालिया काम से भी पता चलता है कि वह लगातार राष्ट्रीय नीतियों, सरकार और संसद से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग कर रही थीं।
संसद की रिपोर्टिंग उनके करियर की खास पहचान रही
संसद का बीट पत्रकारिता के सबसे demanding क्षेत्रों में माना जाता है। यहां रिपोर्टर को केवल सदन की कार्यवाही दर्ज नहीं करनी होती, बल्कि विधेयकों, राजनीतिक रणनीति, मंत्रालयों के फैसलों और नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच खबर का वास्तविक संदर्भ तलाशना पड़ता है।
पायल मेहता की पहचान इसी निरंतरता से बनी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके निधन पर कहा कि वह संसद की कार्यवाही को बेहद प्रतिबद्धता और पेशेवर तरीके से कवर करती थीं। उन्होंने यह भी याद किया कि संसद सत्र के दौरान पायल अक्सर सुबह से देर रात तक वहां मौजूद रहती थीं।
उनके काम की एक खासियत यह थी कि उनकी रिपोर्टिंग केवल राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहती थी। उनके नाम से पिछले वर्षों में संसद, सरकारी नीतियों, राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक नीति से जुड़े कई समाचार प्रकाशित हुए।
प्रधानमंत्री मोदी समेत कई नेताओं ने जताया दुख
पायल मेहता के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें मेहनती पत्रकार बताते हुए कहा कि वह जमीनी स्तर से जुड़ी रहती थीं और राष्ट्रीय मुद्दों की गहरी समझ के साथ रिपोर्टिंग करती थीं। प्रधानमंत्री ने उनके व्यवहार में मौजूद गर्मजोशी और मानवीय संवेदनशीलता को भी याद किया।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए उन्हें एक पेशेवर पत्रकार के रूप में याद किया, जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद बीट के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की।
इन श्रद्धांजलियों में एक बात लगातार सामने आई—उनकी पहचान सिर्फ राजनीतिक खबरें कवर करने वाली पत्रकार के रूप में नहीं, बल्कि अपने बीट पर लगातार मौजूद रहने वाली पेशेवर रिपोर्टर के तौर पर थी।
पत्रकारिता की दुनिया में अचानक खाली हुई एक जगह
46 वर्ष की उम्र में पायल मेहता का निधन ऐसे समय हुआ जब वह अपने पेशेवर जीवन के सक्रिय दौर में थीं। उनकी हालिया रिपोर्टिंग से स्पष्ट है कि वह आखिरी दिनों तक नियमित रूप से काम कर रही थीं। 15 सितंबर 2026 को भी उनके नाम से राष्ट्रीय महत्व के विषय पर रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
संसद जैसे बीट में वर्षों तक काम करने वाले पत्रकार धीरे-धीरे उस संस्थान की अनौपचारिक स्मृति का हिस्सा बन जाते हैं। कौन-सा मुद्दा कब उठा, किसी नीति के पीछे क्या संदर्भ था और राजनीतिक घटनाक्रम किस दिशा में बढ़ रहा है—ऐसी समझ समय के साथ बनती है। पायल मेहता ने अपने करियर में इसी तरह की निरंतरता हासिल की थी।
उनके निधन के बाद उनके परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और पूरे मीडिया समुदाय के लिए यह एक गहरा व्यक्तिगत और पेशेवर नुकसान है। फिलहाल उनके निधन की परिस्थितियों से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।



