Sanju Samson
भारतीय क्रिकेट टीम में जगह के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच संजू सैमसन ने अपनी बल्लेबाजी से जवाब देने के साथ-साथ मानसिक दबाव को लेकर भी खुलकर बात की है। अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में 22 गेंदों पर 57 रन की विस्फोटक पारी खेलने के बाद सैमसन ने टीम के भीतर प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया से आने वाले दबाव पर अपनी सोच सामने रखी।
दरअसल, भारतीय टीम के शीर्ष क्रम में इन दिनों कई विकल्प मौजूद हैं। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा के साथ युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी टीम संयोजन की चर्चा में हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अंतिम मुकाबले में प्लेइंग इलेवन में किसे मौका मिलेगा। सैमसन ने इस बहस को व्यक्तिगत मुकाबले के रूप में देखने के बजाय अपने प्रदर्शन और तैयारी पर ध्यान देने की बात कही।
22 गेंदों में 57 रन ने बदल दिया माहौल
अफगानिस्तान ने पहले टी20 मैच में भारत के सामने 160 रन का लक्ष्य रखा था। जवाब में भारतीय पारी की शुरुआत करने उतरे संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने तेजी से रन जुटाए और पहले विकेट के लिए 88 रन की साझेदारी की।
सैमसन ने महज 22 गेंदों में 57 रन बनाकर अपनी पारी में आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उनकी इस पारी की मदद से भारत ने लक्ष्य को केवल 14.5 ओवर में हासिल कर लिया।
सैमसन के लिए यह पारी इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि इससे पहले उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल उठते रहे थे। ऐसे में बड़े स्कोर का पीछा करते हुए तेजी से रन बनाना उनके लिए सिर्फ टीम की जीत में योगदान नहीं था, बल्कि दबाव की स्थिति में अपने खेल पर भरोसा बनाए रखने का उदाहरण भी रहा।
वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्या बोले संजू?
टीम में युवा प्रतिभाओं के आने के साथ प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक है। 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी लगातार चर्चा है कि उन्हें अंतिम मुकाबले में भारतीय प्लेइंग इलेवन में जगह मिल सकती है।
लेकिन सैमसन ने इस प्रतिस्पर्धा को लेकर किसी तरह की व्यक्तिगत चिंता जाहिर करने के बजाय मानसिक तैयारी को अहम बताया। उनका कहना था कि भारतीय क्रिकेटरों पर बाहर से आने वाली बातें असर डालती हैं, लेकिन खिलाड़ी को यह स्पष्ट रखना चाहिए कि उसे मैदान पर किस मानसिकता के साथ उतरना है।
यही बात इस पूरे मामले को दिलचस्प बनाती है। एक तरफ सैमसन जैसा अनुभवी खिलाड़ी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उतार-चढ़ाव देखे हैं, वहीं दूसरी तरफ सूर्यवंशी जैसी बेहद कम उम्र की प्रतिभा है, जिसे भविष्य की संभावनाओं के तौर पर देखा जा रहा है।
‘हम रोबोट नहीं हैं’—सैमसन की बात का असली मतलब
सैमसन ने यह भी स्वीकार किया कि बाहर से होने वाली आलोचना और टिप्पणियां कभी-कभी उन्हें प्रभावित करती हैं। उन्होंने साफ कहा कि क्रिकेटर भी इंसान हैं और हर टिप्पणी से पूरी तरह अप्रभावित रहना संभव नहीं है।
यह स्वीकारोक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पेशेवर खेल में मानसिक दबाव अक्सर दिखाई नहीं देता। खिलाड़ी से हर मैच में प्रदर्शन की उम्मीद होती है और खराब पारी के बाद सोशल मीडिया तथा क्रिकेट विशेषज्ञों की टिप्पणियां दबाव को और बढ़ा सकती हैं।
सैमसन के मुताबिक उन्होंने समय के साथ इन चीजों को संभालना सीखा है। उनका जोर इस बात पर है कि यदि बल्लेबाज हर शॉट से पहले इस बात के बारे में सोचता रहे कि आउट होने पर लोग क्या कहेंगे, तो उसका स्वाभाविक खेल प्रभावित हो सकता है।
यानी सैमसन के लिए समाधान आलोचना को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि उसके बावजूद अपनी प्रक्रिया पर कायम रहना है।
भारत के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा क्यों महत्वपूर्ण है?
भारतीय टी20 क्रिकेट में शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा टीम मैनेजमेंट के लिए एक अलग तरह की चुनौती पैदा करती है। एक ओर स्थापित खिलाड़ी हैं, वहीं दूसरी ओर युवा बल्लेबाज लगातार अवसर के लिए तैयार हैं।
वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलने की स्थिति में टीम के पास एक ऐसा बल्लेबाज होगा जो कम उम्र में ही बड़े स्तर पर चर्चा में आ चुका है। लेकिन किसी युवा खिलाड़ी को शामिल करना और उसे नियमित भूमिका देना दो अलग बातें हैं। टीम संयोजन में बल्लेबाजी क्रम, विकेटकीपिंग विकल्प, बाएं-दाएं हाथ का संतुलन और मौजूदा फॉर्म जैसे कई पहलू देखे जाते हैं।
इसी कारण एक अच्छी पारी के बाद किसी खिलाड़ी की जगह को स्थायी मान लेना या एक खराब मैच के आधार पर उसे बाहर मान लेना जल्दबाजी होगी।
अंतिम मैच में किसे मिलेगा मौका?
सीरीज के शुरुआती मुकाबलों में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को सलामी बल्लेबाज के रूप में इस्तेमाल किया गया है। वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर की ओर से अंतिम मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी को मौका दिए जाने की संभावना को लेकर संकेत मिले हैं।
ऐसे में टीम चयन का सवाल अब और दिलचस्प हो गया है। यदि सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाता है, तो टीम प्रबंधन को शीर्ष क्रम में बदलाव करना पड़ सकता है।
हालांकि, किसी एक खिलाड़ी के शामिल होने को दूसरे के खिलाफ जीत या हार के रूप में देखना उचित नहीं होगा। भारतीय टीम के लिए असली फायदा यह है कि उसके पास अलग-अलग परिस्थितियों के लिए कई बल्लेबाजी विकल्प मौजूद हैं।
सैमसन के लिए आगे क्या मायने रखता है?
अफगानिस्तान के खिलाफ 57 रन की पारी निश्चित तौर पर सैमसन के आत्मविश्वास को मजबूत कर सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक पारी के बाद चुनौती खत्म नहीं होती। लगातार प्रदर्शन करना ही किसी खिलाड़ी की स्थिति को मजबूत करता है।
सैमसन की विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी दोनों उन्हें टीम संयोजन में उपयोगी विकल्प बनाती हैं। वहीं सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी के आने से प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।
आने वाले मुकाबलों में इसलिए सबसे ज्यादा नजर केवल इस बात पर नहीं होगी कि कौन प्लेइंग इलेवन में है, बल्कि इस बात पर भी होगी कि खिलाड़ी मिले अवसर का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
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