पुतिन का भारत दौरा
नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं। उनके दौरे से पहले रूस की एडवांस टीम और सैन्य अधिकारी दिल्ली-एनसीआर पहुंच चुके हैं। रूस के तीन सैन्य परिवहन विमान नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे हैं, जहां रूसी टीम ने यात्रा, सुरक्षा और लॉजिस्टिक तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। पुतिन के 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात करने की संभावना है। बैठक में व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और रक्षा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
पुतिन के दौरे से पहले पहुंची एडवांस टीम
पुतिन के भारत दौरे से पहले रूस की एडवांस टीम दिल्ली-एनसीआर पहुंच गई है। रिपोर्टों के अनुसार, रूसी टीम के साथ सैन्य अधिकारी और सुरक्षा से जुड़े कर्मचारी भी आए हैं। टीम ने राष्ट्रपति के ठहरने, आवागमन, सुरक्षा और कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
रूस के तीन सैन्य परिवहन विमान नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे। इनमें एक रूसी IL-76 विमान भी शामिल बताया गया है। नोएडा एयरपोर्ट पर विदेशी सैन्य विमानों की यह शुरुआती लैंडिंग इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि विदेशी प्रतिनिधिमंडल आमतौर पर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का इस्तेमाल करते रहे हैं।
रूसी टीम ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर पुतिन की यात्रा से जुड़े इंतजामों की समीक्षा की। हालांकि, राष्ट्रपति के विमान के आगमन और अंतिम सुरक्षा कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी अलग-अलग चरणों में जारी की जा सकती है।
11 सितंबर को मोदी-पुतिन मुलाकात
राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 11 सितंबर को द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक BRICS नेताओं की मुख्य बैठक से पहले होगी। पुतिन की यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-रूस संबंधों के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, परिवहन और रक्षा सहयोग पर बातचीत हो सकती है। रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति, भुगतान व्यवस्था और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के उपाय भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
दोनों नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श कर सकते हैं। यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत और रूस के संबंधों को लेकर इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रक्षा सहयोग पर भी नजर
पुतिन-मोदी बैठक में रक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी नजर रहेगी। मीडिया रिपोर्टों में रूस के Su-57 लड़ाकू विमान, S-400 प्रणाली की शेष आपूर्ति और परमाणु ऊर्जा तथा पनडुब्बी सहयोग जैसे विषयों की चर्चा की गई है। हालांकि, इन मुद्दों पर किसी संभावित समझौते या घोषणा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
भारत और रूस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरण, तकनीक, प्रशिक्षण और रखरखाव से जुड़े विषयों पर बातचीत होती रही है।
इसलिए बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान और आधिकारिक घोषणाओं से यह स्पष्ट होगा कि रक्षा क्षेत्र में कोई नया समझौता हुआ है या मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है।
व्यापार और ऊर्जा एजेंडे में शामिल
भारत और रूस के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना भी बैठक का प्रमुख विषय हो सकता है। दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, भुगतान व्यवस्था, परिवहन गलियारों और निवेश को बढ़ावा देने के विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में रूस से भारत को होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, गैस, पेट्रोकेमिकल और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी देखी जा सकती हैं।
दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित करने और भारतीय निर्यात बढ़ाने पर भी बातचीत हो सकती है। भारत रूस को दवाइयां, कृषि उत्पाद, मशीनरी और अन्य वस्तुओं का निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
पुतिन BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे
क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव के अनुसार, पुतिन भारत यात्रा के दौरान BRICS बिजनेस फोरम के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। यह फोरम BRICS देशों के कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच है।
बिजनेस फोरम में निवेश, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े विषयों पर चर्चा हो सकती है। पुतिन के संबोधन में रूस और BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर रहने की संभावना है।
पुतिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ Innoprom प्रदर्शनी का दौरा भी कर सकते हैं। यह प्रदर्शनी उद्योग, तकनीक और व्यापारिक सहयोग से जुड़े क्षेत्रों को प्रदर्शित करती है। दोनों नेताओं की मौजूदगी से भारत-रूस औद्योगिक साझेदारी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
BRICS सम्मेलन में पुतिन की भूमिका
BRICS शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता वैश्विक शासन, बहुपक्षीय सहयोग, आर्थिक साझेदारी और विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे।
भारत इस वर्ष BRICS सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में रूस, चीन, ईरान और अन्य सदस्य देशों के प्रमुख नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी नेताओं का स्वागत करेंगे और विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।
पुतिन की मौजूदगी सम्मेलन के राजनीतिक और रणनीतिक महत्व को बढ़ाती है। रूस BRICS को बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और विकासशील देशों के सहयोग के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखता है।
पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात पर भी नजर
BRICS सम्मेलन के दौरान पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी मुलाकात हो सकती है। भारत में आयोजित होने वाले सम्मेलन में मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग के बीच बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रहेगी।
भारत के लिए यह सम्मेलन विभिन्न देशों के साथ संतुलित कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर है। रूस और चीन के साथ भारत के अलग-अलग द्विपक्षीय संबंध हैं, जबकि BRICS मंच पर तीनों देश वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर एक साथ चर्चा करते हैं।
दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
विदेशी नेताओं के आगमन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा टीमों ने होटल, सम्मेलन स्थल, एयरपोर्ट और वीआईपी रूट का निरीक्षण किया है।
BRICS सम्मेलन के दौरान 25 हजार के करीब सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, एंटी-ड्रोन सिस्टम, स्नाइपर और विशेष सुरक्षा दलों की व्यवस्था की गई है। 35 से अधिक मार्गों पर यातायात नियंत्रण और 22 स्थानों पर डायवर्जन की योजना है।
रूसी और चीनी सुरक्षा दल भारतीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहे हैं। वीआईपी काफिलों की आवाजाही के दौरान आम यातायात को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।
पुतिन की यात्रा का महत्व
पुतिन का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितता बनी हुई है। भारत और रूस दोनों अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखने और नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस यात्रा से केवल राजनीतिक संबंधों को ही नहीं, बल्कि ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, परिवहन और तकनीक से जुड़े सहयोग को भी दिशा मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक परिणाम प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान से स्पष्ट होंगे।
FAQs
1. पुतिन भारत क्यों आ रहे हैं?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय बातचीत के लिए भारत आ रहे हैं।
2. मोदी-पुतिन की मुलाकात कब होगी?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक 11 सितंबर को होने की संभावना है।
3. पुतिन की एडवांस टीम भारत कब पहुंची?
पुतिन के दौरे से पहले रूस की एडवांस टीम और सैन्य अधिकारियों के साथ तीन रूसी परिवहन विमान नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचे हैं।
4. बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है?
व्यापार, कच्चा तेल, ऊर्जा, रक्षा सहयोग, S-400 की आपूर्ति, परमाणु ऊर्जा और परिवहन जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है।
5. BRICS सम्मेलन कब होगा?
BRICS नेताओं का मुख्य सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा।
निष्कर्ष
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा BRICS शिखर सम्मेलन के साथ-साथ भारत-रूस संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके पहुंचने से पहले रूसी एडवांस टीम और सैन्य परिवहन विमान दिल्ली-एनसीआर पहुंच चुके हैं। 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, परिवहन और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। पुतिन BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करने और Innoprom प्रदर्शनी का दौरा करने वाले हैं। बैठक के बाद होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से दौरे के वास्तविक परिणाम स्पष्ट होंगे।
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