नई दिल्ली। ‘कावेरी कॉलिंग’ अभियान के तहत पेड़ आधारित खेती (ट्री-बेस्ड एग्रीकल्चर) को बढ़ावा देने की पहल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि करना है। अभियान से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि भूमि पर बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और किसानों को अतिरिक्त आय के स्रोत प्राप्त होते हैं।
इस पहल में Isha Foundation की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। फाउंडेशन किसानों को पेड़ आधारित खेती के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, पौधों की उपलब्धता और प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। इसके माध्यम से कई किसानों ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ वृक्षारोपण को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है और कृषि जोखिम को भी कम किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेड़ आधारित खेती जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित हो सकती है। इससे न केवल हरित आवरण बढ़ता है, बल्कि भूमि की उत्पादकता और जैव विविधता में भी सुधार होता है। कावेरी कॉलिंग अभियान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


