छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाके से मानवता और सरकारी व्यवस्था की हकीकत दिखाने वाली एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। महज ₹1500 की सहायता राशि पाने के लिए एक बहू को अपनी बुजुर्ग सास को कंधे पर बैठाकर करीब 9 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग महिला चलने-फिरने में असमर्थ थी, लेकिन राशि निकालने के लिए बैंक या केंद्र तक पहुंचना जरूरी था।
घटना ने सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है। कागजों में सुविधाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में न तो पर्याप्त परिवहन सुविधा है और न ही बुजुर्गों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था, जिसके कारण परिवारों को मजबूरी में ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं।
इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों ने मांग की है कि दूरस्थ गांवों में बैंकिंग और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच आसान बनाई जाए ताकि बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।


