वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल अब पहले की तुलना में महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा रणनीति पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार वैश्विक सप्लाई, शिपिंग लागत और भुगतान व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के कारण रूसी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, ने पिछले कुछ वर्षों में रूस से सस्ते तेल की बड़ी मात्रा में खरीद की थी। लेकिन अब बढ़ती लागत के कारण रिफाइनरी और सरकार दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयात लागत बढ़ती है, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अब आयात स्रोतों में विविधता लाने और वैकल्पिक ऊर्जा विकल्पों पर अधिक जोर देना होगा। साथ ही सरकार को कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए टैक्स और सब्सिडी जैसी नीतियों में संतुलन बनाना पड़ सकता है, ताकि आम उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ न पड़े।


