मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ी सैन्य कार्रवाई के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। जवाबी ड्रोन हमलों और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका से निवेशकों में चिंता बढ़ी है।
मंगलवार को WTI क्रूड 8.6% बढ़कर 77.36 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 6.7% चढ़कर 81.29 डॉलर पर पहुंच गया, जो करीब एक साल का उच्च स्तर है। अमेरिका में भी पेट्रोल की औसत कीमतों में रातों-रात बढ़ोतरी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है, क्योंकि विश्व के लगभग 20% तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है।
भारत के लिए फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश के पास पर्याप्त कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन का भंडार उपलब्ध है तथा रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाने की तैयारी है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तनाव लंबा खिंचा तो घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के पार जा सकती हैं।


