‘वध 2’ एक बार फिर दर्शकों को सस्पेंस और थ्रिल के अंधेरे गलियारों में ले जाती है। फिल्म की कहानी धीरे-धीरे परतें खोलती है और दर्शक को लगातार सोचने पर मजबूर करती है कि अगला मोड़ क्या होगा। निर्देशक ने इस बार भी माहौल और किरदारों की मनोदशा को बखूबी पर्दे पर उतारा है, जिससे फिल्म की पकड़ शुरुआत से ही मजबूत बनी रहती है।
फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका अभिनय है। मुख्य कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों में जान डाल दी है और भावनात्मक व मानसिक द्वंद्व को बेहद सधे हुए अंदाज में पेश किया है। संवाद कम हैं, लेकिन प्रभावशाली हैं, जो कहानी की गंभीरता को और गहरा करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी सस्पेंस को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
क्लाइमैक्स में निर्देशक ऐसा पासा पलटते हैं, जिसकी उम्मीद दर्शक शायद नहीं करता। आखिरी 20 मिनट फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाते हैं और कहानी को नया अर्थ देते हैं। कुल मिलाकर, ‘वध 2’ उन दर्शकों के लिए एक मजबूत थ्रिलर है, जो कंटेंट-ड्रिवन और गंभीर सिनेमा देखना पसंद करते हैं।



