टी20 विश्वकप के शेड्यूल और फॉर्मेट को लेकर फैंस के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुपर-8 चरण में कौन-सी टीम किस ग्रुप में जाएगी। टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में टीमों को अलग-अलग ग्रुप में बांटा जाता है, जहां राउंड-रॉबिन के आधार पर मुकाबले होते हैं। हर ग्रुप से टॉप-2 टीमें सुपर-8 में क्वालिफाई करती हैं और कुल 8 टीमें अगले चरण में पहुंचती हैं।
सुपर-8 के लिए पहले से तय ग्रुपिंग सिस्टम लागू होता है। यानी शुरुआती ग्रुप में टीम किस पोजिशन पर फिनिश करती है, उसी आधार पर उसे सुपर-8 के ग्रुप-1 या ग्रुप-2 में रखा जाता है। आमतौर पर ग्रुप-A और ग्रुप-B की क्वालिफाई करने वाली टीमें एक सुपर-8 ग्रुप में जाती हैं, जबकि ग्रुप-C और ग्रुप-D की टीमें दूसरे सुपर-8 ग्रुप का हिस्सा बनती हैं, ताकि संतुलन बना रहे।
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अगर शुरुआती दौर में कोई बड़ा उलटफेर होता है और कोई कमजोर मानी जा रही टीम टॉप-2 में पहुंच जाती है, तो भी सुपर-8 की ग्रुपिंग में बदलाव नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति में पहले से तय फॉर्मेट के मुताबिक ही टीमें आगे बढ़ती हैं। इसके बाद सुपर-8 में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाती हैं, जहां से खिताबी मुकाबले की तस्वीर साफ होती है।



