बालाघाट। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का उल्लेख करते हुए उनकी सराहना की है। उन्होंने कहा कि गंभीर संकट के बीच यात्रियों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की चिंता किए बिना डटे रहना भारतीय संस्कृति और इस मिट्टी में आए संस्कारों को दर्शाता है। यह बात उन्होंने 6 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के कारंजा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।
बालाघाट के कार्यक्रम में स्मित मच्छार का जिक्र
मोहन भागवत बालाघाट के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे थे। कारंजा में स्मृति भवन और नेत्रालय के लोकार्पण कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने देश और समाज के लिए सेवा की भावना पर बात की। इसी दौरान उन्होंने हाल में फ्लाईदुबई की उड़ान में सामने आए संकट का उल्लेख करते हुए कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका को याद किया।
भागवत के अनुसार, विमान में मौजूद यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्मित मच्छार ने जिस तरह स्थिति का सामना किया, वह भारतीय संस्कारों का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं में व्यक्ति की व्यक्तिगत चिंता से ऊपर दूसरों की सुरक्षा का भाव सामने आता है।
174 लोगों वाली उड़ान में सामने आया था संकट
कैप्टन स्मित मच्छार फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के पायलट थे। यह विमान 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रहा था। उड़ान के दौरान कॉकपिट में गंभीर घटना हुई और स्मित मच्छार घायल हो गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उनके ओमानी को-पायलट ने उन पर हमला किया और विमान के नियंत्रण को लेकर संकट पैदा हुआ। विमान में कुल 174 लोग सवार थे।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद बाहर मौजूद लोगों को अंदर पहुंचने और स्थिति को नियंत्रित करने का मौका मिला। इस घटनाक्रम के बाद विमान को सुरक्षित रूप से उतारा गया।
पहले भी मिल चुकी है पायलट को सराहना
स्मित मच्छार की भूमिका की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई प्रमुख नेताओं ने सराहना की है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2 अक्टूबर को उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत कर उनके साहस की प्रशंसा की थी। नेतन्याहू ने भी उनकी बहादुरी का उल्लेख किया था।
देशहित और सेवा पर भी बोले भागवत
बालाघाट कार्यक्रम में मोहन भागवत ने देश के कल्याण को नागरिकों के कल्याण से जोड़ते हुए सेवा और वास्तविक कार्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल भाषण महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि किए गए कार्य का सार अधिक मायने रखता है।
कैप्टन स्मित मच्छार का उदाहरण देते हुए उनका संदेश यात्रियों की सुरक्षा के लिए संकट के समय दिखाई गई जिम्मेदारी और साहस से जुड़ा रहा।



