बलरामपुर : जिले के सेमरसोत अभ्यारण्य क्षेत्र के ग्राम कंडा में तस्करों द्वारा पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का मामला सामने आया है। अभ्यारण्य क्षेत्र में बेशकीमती सागौन के पेड़ों की बलि आधुनिक लकड़ी काटने की मशीनों से दी जा रही है।
IMD अलर्ट: तमिलनाडु समेत कई राज्यों में भारी बारिश, चक्रवाती तूफान का खतरा बढ़ा
रात के अंधेरे में ही जंगल से काटी गई लकड़ियों को ढोने का काम भी किया जा रहा है, जिसकी गवाही पेड़ों की ठूठ भी दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जंगल को उन्होंने बचा कर रखा था, वहां अब पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। वे कहते हैं कि उनके गांव में बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं, लेकिन अब यह भी सहन नहीं किया जा सकता कि उनके जंगलों की इस तरह से अन्धाधुंध कटाई हो रही हो।
महिला दुर्ग में धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़, प्रार्थना सभा में मचा हंगामा
अभ्यारण्य क्षेत्रों में वनोपज संग्रह करने के लिए विशेष नियम हैं, लेकिन ग्रामीणों को साधारण दातुन तोड़ने की भी अनुमति नहीं है। इस बीच, वहीं गांव में बड़े से बड़े और मोटे पेड़ों को तकनीक के जरिए काट कर गिराया जा रहा है, और रात के अंधेरे में इन लकड़ियों की तस्करी की जा रही है। यह सब या तो वन विभाग की मिलीभगत से हो सकता है या फिर स्थानीय लोगों के साथ मिलकर। खासकर विभाग की इस मसले पर मौन स्वीकृति ने ग्रामीणों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सेमरसोत अभ्यारण्य क्षेत्र के वनकर्मियों का कहना है कि गांव में सरकारी आवास नहीं होने के कारण वे मुख्यालय बलरामपुर से आकर जाते हैं। उन्हें लकड़ी की कटाई की जानकारी है, लेकिन यह सब खेल रात में होता है, इसलिए वे इस पर लगाम लगाने में सक्षम नहीं हैं।


