राज्य सरकार धर्मांतरण मामलों में पारदर्शिता और नियंत्रण बढ़ाने के लिए कानून को और कड़ा करने जा रही है। आगामी शीतकालीन सत्र में गृह मंत्री धर्मांतरण संशोधन विधेयक पेश करेंगे, जिसमें प्रस्ताव है कि कोई भी व्यक्ति धर्म बदलने से कम से कम 60 दिन पहले प्रशासन को इसकी जानकारी देगा।
सूत्रों के अनुसार, इस नए ड्राफ्ट को तैयार करने के लिए सरकार ने 9 राज्यों के मौजूदा धर्मांतरण कानूनों की स्टडी की है। इन राज्यों के प्रावधानों और कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए संशोधन का मसौदा अंतिम रूप दिया गया है।
नए बिल में धर्म बदलने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया है। सूचना देने के बाद प्रशासन सत्यापन करेगा और संबंधित व्यक्ति को किसी तरह का दबाव, प्रलोभन या धमकी न मिले, इसकी जांच सुनिश्चित की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने और वास्तविक इच्छुक व्यक्तियों को सुरक्षित माहौल देने के लिए यह विधेयक जरूरी है।
विपक्ष ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होगी, जबकि सरकार का कहना है कि बिल का उद्देश्य केवल जबरन धर्मांतरण रोकना है, किसी की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाना नहीं।
शीतकालीन सत्र के दौरान यह विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा, जिसके बाद व्यापक चर्चा के साथ पारित होने की संभावना है।


