जम्मू-कश्मीर में मधुमेह (Diabetes) के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कश्मीर की तुलना में जम्मू क्षेत्र में डायबिटीज के मरीजों की संख्या कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव, असंतुलित खानपान और घटती शारीरिक सक्रियता के कारण पैदा हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में जम्मू क्षेत्र में मधुमेह के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वहीं कश्मीर में पारंपरिक खानपान और ठंडे मौसम में अधिक शारीरिक गतिविधियों के चलते मामले अपेक्षाकृत कम हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब बच्चों और किशोरों में भी टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो पहले केवल वयस्कों में देखे जाते थे। डॉक्टरों के अनुसार, जंक फूड, मोबाइल की लत और व्यायाम की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. राकेश गुप्ता बताते हैं,
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“पहले टाइप-1 डायबिटीज बच्चों में आम थी, लेकिन अब 12-15 साल के किशोरों में टाइप-2 के मामले दिख रहे हैं। ये जीवनशैली से जुड़ा बदलाव है, जो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।”
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं, खानपान पर ध्यान दें और प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें। साथ ही, बच्चों को बाहर खेलने और स्क्रीन टाइम कम करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में जम्मू क्षेत्र में मधुमेह के मरीजों की संख्या राष्ट्रीय औसत से भी अधिक हो सकती है।


