मार्च महीने में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 3.88% दर्ज की गई है, जिससे महंगाई के मोर्चे पर दबाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार कच्चे तेल, ईंधन और कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी इसका मुख्य कारण रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल का असर घरेलू स्तर पर भी दिखाई देने लगा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई सबसे ज्यादा बढ़ी, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी लागत बढ़ने का दबाव देखा गया। इससे उत्पादन लागत बढ़ने और आगे चलकर खुदरा महंगाई पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यह स्थिति नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
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विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में महंगाई पर और दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में India की अर्थव्यवस्था के लिए कीमतों को नियंत्रित रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।


