विश्व बैंक (World Bank) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में भारत की वित्तीय प्रणाली की जमकर सराहना की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले एक दशक में न केवल अपनी आर्थिक नींव को मजबूत किया है, बल्कि वित्तीय क्षेत्र को “अधिक विविध, स्थिर और समावेशी” बनाने में भी उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है।
वित्तीय मजबूती की मिसाल
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की बैंकिंग व्यवस्था, डिजिटल पेमेंट नेटवर्क, और वित्तीय समावेशन कार्यक्रमों (Financial Inclusion) ने देश की आर्थिक स्थिरता को गहरा किया है। विशेष रूप से UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और जनधन योजना जैसी पहलों ने देश के हर वर्ग को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। विश्व बैंक ने उल्लेख किया कि भारत का फिनटेक सेक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अन्य विकासशील देशों के लिए एक वैश्विक मॉडल बन चुका है।
निवेश और विकास के नए अवसर
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ने हाल के वर्षों में कॉरपोरेट टैक्स सुधार, वित्तीय नियमों की पारदर्शिता, और मुद्रास्फीति नियंत्रण में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन सुधारों के चलते विदेशी निवेश (FDI) में स्थिरता आई है और भारत की छवि एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों की राय
वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिपोर्ट भारत के आर्थिक आत्मविश्वास को दर्शाती है। “भारत की आर्थिक प्रगति केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है, यह लोगों की जीवनशैली में आए सुधार की भी कहानी है,” — रिपोर्ट में उद्धृत विशेषज्ञ। विश्व बैंक ने यह भी कहा कि भारत यदि इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा तो 2030 तक वह न केवल एशिया बल्कि विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्तियों में शामिल हो जाएगा। भारत की वित्तीय प्रणाली अब स्थिरता, नवाचार और पारदर्शिता के तीन स्तंभों पर आगे बढ़ रही है, जो इसे वैश्विक स्तर पर एक प्रेरक उदाहरण बनाता है।
विश्व बैंक ने भारत की वित्तीय प्रणाली को बताया “मजबूत और समावेशी”। डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेक्टर को माना विकास का इंजन। निवेश माहौल और बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी। भारत भविष्य के बड़े आर्थिक लक्ष्यों की दिशा में अग्रसर।


